जयपुर। देश में परिसीमन को लेकर किए जा रहे संविधान संशोधन को लेकर तमिलनाडु और तेलंगाना के मुख्यमंत्री की ओर से केंद्र सरकार को दी है चेतावनी के बाद अब राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी केंद्र सरकार को दक्षिण के राज्यों की चेतावनी को गंभीरता से लेने को कहा है। गहलोत ने कहा कि नरेंद्र मोदी को दक्षिण की चिंता को गंभीरता से लेना चाहिए, नहीं तो 60 के दशक के हालात बन सकते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने बुधवार को जयपुर एयरपोर्ट पर कहा कि अगर दक्षिण के लोगों को यह महसूस हो गया कि उत्तर भारतीय हमारे ऊपर अनावश्यक परिसीमन थोप रहे हैं तो स्थिति कमजोर हो सकती है, हालत बिगाड़ सकते हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने जो चेतावनी दी है वो बहुत ही खतरनाक है। जैसे 1960 के दशक में दक्षिण के राज्यों में आंदोलन हुए थे, कहीं वैसे ही स्थिति नहीं बन जाए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने अपनी बात कही है उससे अंदाजा लगा लीजिए कि उनके दिलों में आग लगी हुई है, यह बहुत ही संवेदनशील मामला है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण मिले यह सभी विपक्ष के लोग चाहते हैं, लेकिन परिसीमन का जो तरीका अपना रहे हैं वह ठीक नहीं है। मोदी सरकार 2021 में जनगणना नहीं करा पाई और बहानेबाजी करती रही, जबकि जनगणना हो जानी चाहिए थी। अब जनगणना के कमिश्नर कह रहे हैं कि 2027 में जनगणना कराएंगे। वहीं, महिला आरक्षण पर चर्चा के लिए मोदी सरकार की ओर से बुलाए जा रहे संसद के विशेष सत्र को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब कई राज्यों में चुनाव चल रहे हैं तो ऐसे में संसद का विशेष सत्र नहीं बुलाना था। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा था कि जब चुनाव खत्म हो जाए तब इसे बुलाना था। अभी सभी लोग चुनाव में व्यस्त हैं।
गहलोत ने कहा कि मोदी सरकार के मन में खोट है और यह षड्यंत्र कर रहे हैं। अगर संसद में महिला आरक्षण बिल पारित नहीं हुआ तो यह कहेंगे कि विपक्ष ने महिलाओं को आरक्षण का बिल पास नहीं होने दिया। इस तरह का षड्यंत्र उचित नहीं है। 3 साल पहले जब महिला आरक्षण बिल पास हो गया था तभी इसे लागू करना था, लेकिन तब मोदी सरकार ने इसे लागू नहीं किया। उन्होंने कहा कि 2021 की जनगणना के आधार पर लागू करेंगे, लेकिन अब 2011 की जनगणना को ही आरक्षण का आधार माना जा रहा है। अचानक मोदी सरकार यह फार्मूला क्यों लेकर आई है यह समझ से परे है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राजस्थान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि निकाय ओर पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट की डेडलाइन खत्म हो चुकी है, लेकिन सरकार चुनाव नहीं करा रही है। अब इस मामले में राष्ट्रपति को दखल देना चाहिए। कानून का लगातार उल्लंघन हो रहा है। भजनलाल सरकार संविधान की मूल भावना को चोट पहुंचा रही है। ऐसी स्थिति में सरकार को बर्खास्त करना चाहिए, लेकिन बर्खास्त कौन करे ? बर्खास्त करने वाले उनके पार्टनर हैं। गहलोत ने कहा कि डबल इंजन की सरकार में बड़ा इंजन दिल्ली और छोटा इंजन राजस्थान में है। भजनलाल सरकार उनकी चहेती है, जबकि इनका कृत्य बर्खास्त करने लायक है।
गहलोत ने कहा कि यह सरकार न सुप्रीम कोर्ट की सुन रही है और न ही हाईकोर्ट की सुन रही है। इससे बड़ा संविधान का उल्लंघन क्या होगा? इस मामले में राष्ट्रपति को आगे आना चाहिए। गवर्नर से बात करनी चाहिए और कहना चाहिए कि चुनाव टाइम पर होने चाहिए। हमारे समय में हम भी एक बार चुनाव स्थगित करने की सोच रहे थे। राजस्थान में कर्मचारियों के हड़ताल चल रही थी, लेकिन हमने हड़ताल के बीच ही निकाय पंचायत चुनाव कराए थे। चुनाव कराने के लिए कोई भी रास्ता निकल सकता है, लेकिन यह लोग घबराए हुए हैं। इनका निकाय और पंचायत चुनाव में सूपड़ा साफ हो जाएगा, इसीलिए यह लोग चुनाव कराने से डर रहे हैं।