जयपुर। प्रदेश भर में आज शीतलाष्टमी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने माता शीतला के मंदिर में विधि-विधान से पूजाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इस मौके पर जयपुर जिले के चाकसू स्थित शील की डूंगरी पर परंपरागत रूप से मेले का आयोजन किया गया। जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने शीतला माता के दर्शन किए।
शीतला अष्टमी के दिन बुधवार सुबह महिलाओं ने व्रत भी रखा और शीतला माता की पूजा करने पहुंचीं पूजा करते हुए महिलाओं ने माता को बासी पकवानों का भोग अर्पित करने के साथ नीम के पत्ते, हल्दी, रोली और जल चढ़ाया। कई स्थानों पर घरों की शुद्धि के लिए नीम की पत्तियों का उपयोग भी किया। शीतला माता का संबंध स्वास्थ्य और रोग निवारण से जोड़ा जाता है। शीतला अष्टमी का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य से भी जुड़ा माना जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता की पूजा करने से चेचक, खसरा, चिकनपॉक्स और मौसमी संक्रमण जैसी बीमारियों से रक्षा होती है।
शीतलाष्टमी के मौके पर माता शीतला को ठंडे और बासी पकवानों का भोग लगाया। मंदिर परिसर में सुबह से ही पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर तक चलता रहा। श्रद्धालु महिलाएं घरों में एक दिन पहले बनाए गए पकवान जैसे पूड़ी, पुए, दही-बड़े, मीठे चावल, हलवा सहित अन्य व्यंजनों को थाल में सजाकर मंदिर पहुंचीं और माता को भोग अर्पित किया।
मान्यता है कि शीतलाष्टमी के दिन माता शीतला की पूजा करने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और बीमारियों से भी रक्षा होती है। इसी आस्था के चलते विभिन्न इलाकों से महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर मंदिर पहुंचीं और माता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। मंदिर में दर्शन के लिए आई महिलाओं ने कतारबद्ध होकर माता के दर्शन किए और पूजा की। इस दौरान मंदिर में भक्ति गीतों और जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। कई महिलाओं ने अपने बच्चों और परिजनों के साथ माता के दरबार में माथा टेककर मनोकामनाएं मांगीं। मंदिर समिति और स्थानीय लोगों की ओर से श्रद्धालुओं की व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे।