जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महिला आरक्षण बिल पारित नहीं होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिए गए राष्ट्र के नाम संबोधन में कांग्रेस सहित अन्य दलों पर लगाए गए आरोपों को लेकर प्रधानमंत्री पर पलटवार किया है। गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री में दम है, तो संसद को भंग कराकर चुनाव करा लें। पता चल जाएगा कि देश और प्रदेश की महिलाएं किसके साथ हैं।
गहलोत ने प्रधानमंत्री के भाषण के बाद मीडिया में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने आचार संहिता का उल्लंघन किया है और दूरदर्शन सहित कई सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग करके पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास किया है। गहलोत ने कहा कि चुनाव आयोग इस पर कोई संज्ञान नहीं लगा क्योंकि चुनाव आयोग तो भाजपा का विभाग बनकर काम कर रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कांग्रेस, सपा, डीएमके और टीएमसी सहित अन्य पार्टियों का नाम लेकर कहा कि महिलाएं इन दलों से बदला लेंगी। इससे अच्छा मामला क्या होगा कि प्रधानमंत्री को चुनाव करवा लेने चाहिए। प्रधानमंत्री विपक्ष को धमकी दे रहे हैं कि महिलाएं उन्हें छोड़ेंगी नहीं, प्रधानमंत्री को चाहिए कि चुनाव करवा लें, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री के विचार खतरनाक हैं। प्रधानमंत्री पहले कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते थे। फिर विपक्ष मुक्त भारत की बात करने लगे। उनके विचार खतरनाक हैं, क्योंकि वो रूस और चीन की तरह एक पार्टी का राज चाहते हैं जहां पर चुनाव नाम मात्रा के होते हैं। वहां पर कोई विपक्ष नहीं होता है। गहलोत ने कहा कि जिस तरह से प्रधानमंत्री ने विपक्षी पार्टियों पर हमला बोला है, उसके कई मायने निकलकर आ रहे हैं। टीएमसी और डीएमके का नाम लेकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के मतदाताओं को भड़का रहे हैं. इस तरह का रवैया ठीक नहीं है।
गहलोत ने कहा कि 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने महिलाओं को निकाय और पंचायत चुनाव में आरक्षण दिया था. पहले 33% दिया था, उसके बाद में 50% कर दिया था। भाजपा वाले कितना भी कह लें कि कांग्रेस महिला विरोधी है, लेकिन लोग इनके झांसे में आने वाले नहीं हैं।
गहलोत ने कहा कि साल 2023 में महिला आरक्षण को लेकर जो कानून पारित हुआ था, सत्ता पक्ष विपक्ष दोनों ने मिलकर सर्वसम्मति से पारित किया था तो फिर 3 साल सरकार क्यों सोए रही। उस वक्त मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने कहा था कि इस कानून को तुरंत लागू करना चाहिए, लेकिन 3 साल के बाद सरकार अब इसमें संशोधन करना चाह रही थी। इसके पीछे जरूर कोई इनका षड्यंत्र था। गहलोत ने कहा कि सरकार को अगर बिल पारित करवाना था, तो इसके लिए पहले सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए थी। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि 29 अप्रैल की वोटिंग के बाद विशेष सत्र बुला लीजिए,लेकिन प्रधानमंत्री ने उनकी बात नहीं मानी। प्रधानमंत्री और पूरी बीजेपी को मालूम था कि यह बिल पारित नहीं होगा।
गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री का टारगेट पश्चिम बंगाल है। इसीलिए बीच चुनाव विशेष सत्र बुलाया गया और जब बिल पारित नहीं हो पाया, तो विपक्ष को बदनाम करने के लिए पूरे देश में आंदोलन किया जा रहे हैं। गहलोत ने कहा कि यह विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश थी, जो असफल हो गई। गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री ने दक्षिण की सरकारों को बुलाकर बात क्यों नहीं की। इन्हें मालूम था कि कुछ नहीं होने वाला है।
गहलोत ने कहा कि जो जनगणना 2021 में होनी थी आज 2026 चल रहा है, 5 साल बीत गए, लगातार जनगणना की मांग चल रही है क्योंकि जनगणना होगी तो ओबीसी की महिलाओं को भी आरक्षण मिलेगा। जनगणना के कमिश्नर खुद कह रहे हैं कि 2027 तक जनगणना करा देंगे। प्रधानमंत्री को उस पर विश्वास करना चाहिए था, लेकिन उनकी नियत आरक्षण देने की नहीं है। इसलिए सब कुछ तमाशा किया है और प्रधानमंत्री ने जो भाषण दिया है, बहुत ही खतरनाक है। प्रधानमंत्री सरकारी संसाधनों के जरिए तमिलनाडु और बंगाल में कैंपेन कर रहे हैं और विपक्षी दलों को बदनाम कर रहे हैं।