“सनातन संवाद’’ में मंदिर प्रबंधन, सामाजिक व्यवस्था एवं जनजागरण जैसे विषयों पर हुआ व्यापक मंथन
*‘‘सनातन संवाद’’ प्रथम कड़ी का सफल आयोजन*
*सनातन मूल्यों एवं सामाजिक समरसता पर गहन चर्चा की आवश्यकता है – वासुदेव देवनानी*
जयपुर। संस्कृति युवा संस्था द्वारा आयोजित ‘‘सनातन संवाद – प्रथम कड़ी’’ का आयोजन जयपुर में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस अवसर पर धर्म, संस्कृति एवं सामाजिक व्यवस्था से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। संवाद के दौरान केवल मंदिर प्रबंधन और समाज-परिवार व्यवस्था ही नहीं, बल्कि वर्तमान समय में सनातन मूल्यों की प्रासंगिकता, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण एवं जनजागरण जैसे मुद्दों पर भी गहन मंथन हुआ।
समारोह के मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘‘सनातन संस्कृति हमारी पहचान और समाज की आधारशिला है। इसे सशक्त बनाए रखने के लिए संवाद, जागरूकता और समाज की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। ऐसे संवाद समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।’’
राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. अरूण चतुर्वेदी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि गृहस्थ परंपरा से संचालित मंदिर आज भी समाज में एक सशक्त, जीवंत और अनुकरणीय व्यवस्था के रूप में कार्य कर रहे हैं। चर्चा में यह बात प्रमुख रूप से सामने आई कि परिवार आधारित सेवा परंपरा में श्रद्धा, उत्तरदायित्व, निरंतरता और पारदर्शिता का संतुलित समन्वय देखने को मिलता है, जो मंदिरों को समाज से सीधे जोड़ता है। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक मार्गदर्शन, संस्कार निर्माण और सेवा कार्यों के केंद्र भी हैं।
संवाद के दौरान प्रमुख रूप से उठाये गये प्रमुख बिन्दु निम्न रहे –
1 मंदिर माफ़ी की ज़मीनों को मुक्त करवाने के लिए !
2 वर्तमान समय में सनातन मूल्यों की प्रासंगिकता
3 परिवार व्यवस्था में आ रहे बदलाव और उनके समाधान
4 समाज में नैतिकता और संस्कारों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता
5 युवा पीढ़ी को संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के प्रयास
सनातन संवाद के आयोजक और संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने कहा कि समाज में संवाद और समन्वय की आवश्यकता है कि राज्य में आज अनेक स्थानों पर गृहस्थ/परिवार आधारित सेवा परंपरा सफलतापूर्वक संचालित हो रही है।
इनमें प्रमुख रूप से खाटू श्याम मंदिर (सीकर), श्रीनाथजी मंदिर (नाथद्वारा), करणी माता मंदिर (देशनोक), मोती डूंगरी गणेश मंदिर (जयपुर), सालासर बालाजी (चूरू), मेहंदीपुर बालाजी (दौसा), एकलिंगजी (उदयपुर), चारभुजा जी (राजसमंद), रणछोड़जी मंदिर (बालोतरा), ब्रह्मा मंदिर (पुष्कर), रानी सती मंदिर (झुंझुनू), जीण माता (सीकर), त्रिपुरा सुंदरी (बांसवाड़ा), गोविंद देव जी (जयपुर), कैलादेवी (करौली), जगदीश मंदिर (उदयपुर), रामदेवरा (जैसलमेर), नाकोड़ा जी (बाड़मेर) सहित अनेक मंदिर शामिल हैं।
जहाँ पीढ़ियों से परिवारों द्वारा सेवा, पूजा-पद्धति और प्रबंधन की परंपरा को सफलतापूर्वक निभाया जा रहा है। साथ ही सामाजिक और धार्मिक कार्यो के साथ सेवा के सभी प्रकल्प आपदा के समय सरकारी सहयोग और बड़े आयोजनों में अपनी महती भूमिका निभा रहे है। लेकिन इनमे आने वाले श्रद्धालु को और सुविधा मिले इस के लिए सरकारी स्तर पर भी सहयोग और बढ़ाने की आवश्यकता है।साथ ही जो सेवा कार्यो में आगे आकर कार्य कर रहे है सरकार उन्हें सम्मानित भी करें !
संवाद में उपस्थित विद्वानों एवं वक्ताओं ने कहा कि ‘‘आज के समय में समाज को जोड़ने और सकारात्मक दिशा देने के लिए ऐसे मंचों की अत्यंत आवश्यकता है। संवाद के माध्यम से ही हम परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित कर सकते हैं।’’
कार्यक्रम संयोजक पंडित राजकुमार चतुर्वेदी ने बताया कि ‘‘सनातन संवाद’’ को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी इसी प्रकार के संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक पहुँच बनाकर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा, जिससे सनातन विचारधारा, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूकता को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है।
संस्कृति युवा संस्था के संरक्षक एच.सी. गणेशिया ने कहा कि ‘‘सनातन संवाद केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सतत विचार प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य समाज में जागरूकता, समन्वय और सकारात्मक परिवर्तन लाना है। हम इस मंच के माध्यम से समाज के सामने ऐसे विषय और उदाहरण रखना चाहते हैं, जो भविष्य की दिशा तय करने में सहायक हों।’’
संवाद का निष्कर्ष यह रहा कि सनातन परंपराएं आज भी समाज की मजबूत आधारशिला हैं, और उन्हें सशक्त बनाए रखने के लिए संवाद, सहभागिता और जनजागरण की दिशा में निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से खोजी द्वारा विधायक बालमुकुंदाचार्य महाराज हाथोज धाम, आचार्य श्री श्री 1008 रामरिछपाल दास, महाराज त्रिवेणी धाम, धन्ना पीठाधीश्वर बजरंग देवाचार्य महाराज, संत समाज के अध्यक्ष सियाराम दास , शुक्र सम्प्रदाय आचार्य अलबेली माधुरी शरण जी महाराज, पंचखंड पीठाधीश्वर स्वामी सोमेन्द्र महाराज, स्वामी मोनू महाराज अमरापुर, आचार्य राजेश्वर , महेन्द्र चौहान खाटू धाम एवं स्वामी योगेन्द्रनाथ महाराज (नाथ सम्प्रदाय) उपस्थित रहे और सभी ने अपने विचार साझा किये।और सभी ने ये अंत में यही कहा की सनातन की रक्षा के लिए हम आगे आए !