राजस्थान विधानसभा में सूरतगढ़ विधायक श्री डूंगर राम गेदर ने दो महत्वपूर्ण विधेयकों पर उठाए गंभीर सवाल
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में सूरतगढ़ विधायक डूंगर राम गेदर ने आज दो महत्वपूर्ण विधेयकों—राजस्थान आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय अजमेर विधेयक 2026 तथा राजस्थान पंचायती राज संशोधन विधेयक 2026—पर चर्चा के दौरान राज्य सरकार से कई गंभीर सवाल उठाते हुए दोनों विधेयकों को व्यापक विचार-विमर्श के लिए छह माह के लिए प्रचलित (स्थगित) करने की मांग की।
विधायक गेदर ने राजस्थान आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय अजमेर विधेयक 2026 पर बोलते हुए कहा कि राज्य में पहले से ही जोधपुर में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय कार्यरत है। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब एक आयुर्वेद विश्वविद्यालय पहले से मौजूद है, तो नए विश्वविद्यालय की आवश्यकता क्यों महसूस की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वर्तमान विश्वविद्यालय की क्षमता का पूरा उपयोग किया गया है और वहां मौजूद कमियों को दूर करने के लिए क्या प्रयास किए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक में जोधपुर स्थित विश्वविद्यालय और प्रस्तावित अजमेर विश्वविद्यालय के बीच कार्यों के विभाजन को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। साथ ही अनुसंधान को बढ़ावा देने की बात तो कही गई है, लेकिन इसके लिए न तो कोई स्पष्ट रोडमैप है और न ही वित्तीय प्रावधान दिखाई देता है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार आयुष क्षेत्र को मजबूत करना चाहती है तो इसके लिए शोध फंड, आधुनिक प्रयोगशालाएं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।
गेदर ने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए आवश्यक भूमि, भवन, अस्पताल, शोध केंद्र और अन्य बुनियादी सुविधाओं के निर्माण को लेकर भी विधेयक में कोई स्पष्ट समयसीमा या विस्तृत योजना प्रस्तुत नहीं की गई है। उन्होंने राज्य में आयुर्वेदिक चिकित्सा संस्थानों की वर्तमान स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि कई जिलों और ब्लॉक स्तर के आयुर्वेद चिकित्सालयों में न तो पर्याप्त स्टाफ है, न भवन और न ही दवाइयों की उपलब्धता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सूरतगढ़ का आयुर्वेद चिकित्सालय आज भी सामुदायिक भवन में संचालित हो रहा है, जबकि उसके लिए अलग भवन की व्यवस्था अब तक नहीं की गई।
विधायक गेदर ने आयुर्वेद की परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के समय में बच्चों में बढ़ते कुपोषण पर भी गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि जोधपुर स्थित आयुर्वेद विश्वविद्यालय के अध्यक्ष द्वारा किए गए एक अध्ययन में 11 परिवारों पर तीन माह तक मिट्टी के बर्तनों में भोजन पकाने और खाने का प्रयोग किया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। अध्ययन में पाया गया कि मिट्टी के बर्तनों में बने भोजन से पाचन, नींद और समग्र स्वास्थ्य में सुधार हुआ।
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में दिए जाने वाले मिड-डे मील और पोषाहार को मिट्टी के बर्तनों में पकाने और परोसने की व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे बच्चों को अधिक पौष्टिक भोजन मिल सके और पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों को भी बढ़ावा मिले।
उन्होंने कहा—“मिट्टी के बर्तनों में पका खाना जैसे अमृत की धार है और यही आयुर्वेद की सीख है और स्वस्थ जीवन का आधार है।”
इसी तरह राजस्थान पंचायती राज संशोधन विधेयक 2026 पर बोलते हुए विधायक गेदर ने कहा कि पिछले वर्षों में पंचायती राज व्यवस्था को कमजोर किया गया है और ग्रामीण विकास की गति प्रभावित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों से पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसके कारण ग्राम पंचायतों की स्थिति कमजोर हो गई है।
उन्होंने कहा कि सरपंचों का कार्यकाल तो बढ़ा दिया गया है, लेकिन उनके पास वास्तविक कार्य नहीं बचे हैं। वर्तमान में उनकी भूमिका केवल प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर करने तक सीमित हो गई है। उन्होंने पंचायत क्षेत्रों के परिसीमन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में पंचायत समिति के एक वार्ड की जनसंख्या लगभग 4000 है, जबकि दूसरे वार्ड की जनसंख्या 16000 तक है, जो संतुलित प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के विपरीत है।
विधायक गेदर ने तीन से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति देने के संशोधन पर भी स्पष्टीकरण मांगा और पूछा कि क्या इसी प्रकार का प्रावधान सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन और वेतन वृद्धि के मामलों में भी लागू किया जाएगा। उन्होंने यह भी मांग की कि पहले से दर्ज टीसी संबंधी मामलों में दर्ज मुकदमों को वापस लेने पर सरकार स्पष्ट नीति बताए।
उन्होंने सरकार की पंचायती राज व्यवस्था के प्रति नीति पर सवाल उठाते हुए कहा—
“दिखावे में तो विकास के ऊँचे मीनार रखे हैं, मगर पंचायती राज के हाथों में बस इंतजार रखे हैं।
छीनकर पंचायत का अधिकार उन्हें लाचार कर दिया है, अब गांव की तरक्की के बस इश्तिहार लिखे हैं।”
अंत में विधायक डूंगर राम गेदर ने दोनों विधेयकों पर व्यापक चर्चा, जनमत और ठोस योजना तैयार करने की आवश्यकता बताते हुए सरकार से आग्रह किया कि राजस्थान आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय अजमेर विधेयक 2026 तथा राजस्थान पंचायती राज संशोधन विधेयक 2026 को छह माह के लिए प्रचलित कर पुनर्विचार किया जाए, ताकि राज्य और जनता के हित में बेहतर निर्णय लिया जा सके।