जयपुर। राजधानी जयपुर राजस्थान के सभी पेट्रोल पंपों पर इन दिनों पेट्रोल-डीजल की सीमा निर्धारित किए जाने के बाद संकट के संकेत है। कई पंपों पर ग्राहकों को 4900 रुपये से ज्यादा का पेट्रोल देने से मना किया जा रहा है, जबकि कुछ जगहों पर डीजल और पेट्रोल की मात्रा भी तय कर दी गई है। खास बात यह है कि इस पूरे मामले में अब तक कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है, लेकिन जमीन पर नियम पूरी तरह लागू दिखाई दे रहे हैं।
राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि तेल कंपनियों की ओर से मौखिक निर्देश के जरिए बिक्री की सीमा तय की जा रही है। कहीं 49 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर डीजल की सीमा तय की गई है, तो कहीं 4900 रुपये तक पेट्रोल और 50 हजार रुपये तक डीजल देने की बात कही जा रही है। इसे लेकर जयपुर सहित कई पेट्रोल पंपों पर नोटिस भी लगा दिया गया है।
यह मामला सामने तो पहले ही आ चुका था और डीलर्स संगठन ने इंडियन ऑयल के राज्य स्तरीय समन्वयक मनोज गुप्ता को पत्र लिखकर इस व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन के महासचिव शशांक कौरानी का कहना है कि तेल कंपनियां पहले से ही डिपो से कम सप्लाई दे रही हैं और अब बिक्री पर भी अनौपचारिक कैप लगाकर डीलर्स पर दबाव बनाया जा रहा है।
डीलर्स का आरोप है कि अगर कोई पंप निर्धारित सीमा से ज्यादा ईंधन देता है, तो उसकी सप्लाई या बिक्री प्रभावित करने की चेतावनी दी जा रही है। इससे पंप संचालकों में डर का माहौल है. इस पूरे घटनाक्रम का असर किसानों और निर्माण कार्यों पर भी पड़ सकता है। खुले में बैरल या कैन में डीजल देने पर भी रोक की बातें सामने आ रही हैं, जबकि किसान और निर्माण कंपनियां लंबे समय से इसी व्यवस्था के जरिए डीजल लेती रही हैं। ऐसे में खेती और निर्माण कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
पंप संचालकों ने यह भी कहा है कि पेट्रोल पंप आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आते हैं, जहां न्यूनतम स्टॉक बनाए रखना जरूरी होता है,लेकिन जब डिपो से पर्याप्त सप्लाई ही नहीं मिलेगी, तो कई पंप ड्राई होने की स्थिति में पहुंच सकते हैं। ऐसे में कार्रवाई का खतरा भी डीलर्स पर ही आएगा। डीलर्स संगठन ने मांग की है कि तेल कंपनियां इस मामले में स्पष्ट और लिखित आदेश जारी करें।