जयपुर। महिला आरक्षण ओर परिसीमन के लिए लाए गए नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम लोकसभा में पारित नहीं होने के मुद्दे को लेकर भाजपा महिला मोर्चा ने शनिवार को राजधानी जयपुर में विरोध प्रदर्शन किया। इसमें बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर कांग्रेस और विपक्षी दलों के खिलाफ नारे लगाए और इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ कदम बताया।
महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने पार्टी मुख्यालय पर एकत्र होकर चौमू सर्किल तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी तख्तियां लिए नारे लगाते चली। उनका कहना था कि यह बिल देश की आधी आबादी को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने को लाया गया था, लेकिन विपक्ष ने विरोध कर अपने दोहरे चरित्र वाली राजनीति को उजागर किया। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़ ने कहा कि विपक्ष का संसद में इस बिल के खिलाफ मतदान करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने के प्रति कभी गंभीर नहीं रहे। यह केवल राजनीतिक लाभ के लिए महिलाओं के मुद्दों का उपयोग करते हैं, लेकिन जब वास्तविक निर्णय लेने का समय आता है, तो पीछे हट जाते हैं।
राखी राठौड़ ने कहा कि यह ऐतिहासिक अवसर था जब महिलाओं को नीति निर्माण में सीधी भागीदारी देने का रास्ता खुल सकता था, लेकिन कांग्रेस ने फिर अपनी पुरानी सोच का परिचय दिया। कांग्रेस का शाहबानो प्रकरण से तीन तलाक जैसे मुद्दों पर भी रुख महिला विरोधी रहा है। राठौड़ ने कहा, कांग्रेस की महिला विरोधी मानसिकता के खिलाफ 20 अप्रैल को जयपुर में प्रदेश भर हजारों महिलाएं एकत्रित होंगी और आमजन को कांग्रेस का आईना दिखाएंगी।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सुमन शर्मा ने विपक्ष के रवैये को अहंकारपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, सदन में बिल गिरने के बाद राहुल गांधी की प्रतिक्रिया बेहद आपत्तिजनक थी। उन्होंने इसे मजाक उड़ाने जैसा बताया. कहा कि देश की महिलाएं इसे कभी नहीं भूलेंगी। विपक्षी महिला नेता जैसे प्रियंका गांधी और डिम्पल यादव द्वारा इस बिल का विरोध करना और भी दुखद है। सुमन ने महिलाओं से इस दिन को याद रखने और मतदान करते समय उन राजनीतिक दलों को पहचाननें की अपील की, जो उनके अधिकारों के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह केवल विधेयक का मुद्दा नहीं है, बल्कि महिला सम्मान और अधिकारों से जुड़ा सवाल है।
प्रदेश उपाध्यक्ष सरिता गैना ने महिलाओं से एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, समाज की आधी आबादी संगठित होकर आवाज उठाए तो कोई भी शक्ति उनके अधिकार दबा नहीं सकती। यह समय है जब महिलाओं को आगे आकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी उनके अधिकारों के रास्ते में बाधा डालने का साहस न कर सके।