कांग्रेस को न दे सीख,महिलाओं की विरोधी भाजपा

महिलाओं की विरोधी भाजपा कांग्रेस को न दे सीख, महिला आरक्षण के नाम पर देश के साथ किया छलावा: टीकाराम जूली दलित, ओबीसी , कमजोर वर्गों के के साथ अन्याय नहीं होने देगी कांग्रेस

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के हालिया बयान को तथ्यों से परे और भ्रामक करार देते हुए तीखा हमला बोला है। जूली ने कहा कि भाजपा द्वारा महिला हितैषी होने का किया जा रहा दावा केवल एक चुनावी मुखौटा है, जबकि असलियत में उनकी नीयत महिलाओं को वास्तविक अधिकार देने की नहीं, बल्कि इस संवेदनशील विषय पर केवल राजनीति करने की है।

जूली ने स्पष्ट किया कि मामला केवल महिला आरक्षण बिल का नहीं था, बल्कि इसकी आड़ में परिसीमन से जुड़ी गहरी साजिश थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार परिसीमन को उस आधार पर करना चाहती थी, जिसमें उसे जातिगत जनगणना के आंकड़ों की जरूरत न पड़े। इससे भाजपा को अपनी मनमानी करने और चुनावी क्षेत्रों में हेरफेर करने की पूरी आजादी मिल जाती। विपक्ष ने इसी “छिपे हुए एजेंडे” का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा की इसी कुत्सित नीयत को जनता ने पहचान लिया और उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा।
टीकाराम जूली ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी दलित, ओबीसी और कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मोदी सरकार महिला आरक्षण को केवल एक ‘हथियार’ बनाकर संविधान की मूल भावना को चोट पहुँचाने की कोशिश कर रही है। जूली ने संकल्प दोहराया कि महिलाओं के नाम पर संविधान को कमजोर करने या संवैधानिक मर्यादाओं को तोड़ने के मोदी सरकार के हर कदम को कांग्रेस पूरी ताकत से रोकेगी। भाजपा यह समझ ले कि दलितों और पिछड़ों के अधिकारों से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जूली ने केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि 2023 में जो महिला आरक्षण विधेयक संसद में सर्वसम्मति से पारित हुआ था, उसे मोदी सरकार ‘अभी और इसी वक्त’ लागू क्यों नहीं करती? उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष महिला आरक्षण के पक्ष में एकजुट है, लेकिन मोदी सरकार इसे जनगणना और परिसीमन के जाल में फंसाकर टाल रही है।

जूली ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा और मोदी सरकार का ‘सर्वसम्मति’ में रत्ती भर भी विश्वास नहीं है; यह सरकार केवल ‘इवेंट मैनेजमेंट’ और ‘पीआर’ के दम पर देश को गुमराह करने में विश्वास रखती है। महिला आरक्षण जैसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर भी सरकार विपक्ष को साथ लेकर चलने में पूरी तरह विफल रही है।
उन्होंने कहा कि चूंकि मोदी सरकार इस महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक को उसकी मूल भावना के साथ लागू करने और तार्किक परिणति तक पहुँचाने में नाकाम रही है, इसलिए नैतिकता के आधार पर प्रधानमंत्री मोदी को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए । जो सरकार देश की आधी आबादी को उनके हक के नाम पर केवल छलावा देती हो, उसे सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

भाजपा को आईना दिखाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जो पार्टी आज तक अपने संगठन में किसी महिला को ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष’ नहीं बना सकी, वह महिलाओं के सशक्तीकरण की बात कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत में महिलाओं को मतदान का अधिकार और बराबरी की शक्ति स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत बाद कांग्रेस की प्रगतिशील सोच के कारण मिली। देश को पहली महिला राष्ट्रपति, श्रीमती प्रतिभा पाटिल, कांग्रेस शासन के दौरान ही मिलीं। इसके साथ ही, पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण देकर उन्हें सत्ता की मुख्यधारा से जोड़ने की नींव हमारे दूरदर्शी नेता स्वर्गीय श्री राजीव गांधी ने रखी थी। जूली ने स्पष्ट कहा कि कि महिला आरक्षण के लिए पूरा विपक्ष तैयार है, लेकिन मोदी सरकार की नीयत साफ नहीं है। इन लोगों ने महिला आरक्षण को केवल एक मुखौटा बनाया ताकि उसकी आड़ में गलत तरीके से परिसीमन करवाया जा सके।

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