वसुंधरा की नसीहत, दलबदलू नेताओं से सावधान रहने की जरूरत

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सरकार और संगठन को नसीहत देते हुए कहा कि पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। दल बदलू नेताओं से सावधान रहने की जरूरत है।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने संगठन और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दल बदलने वाले नेताओं और अवसरवादी राजनीति पर चिंता जताते हुए कहा कि पार्टी को सबसे बड़ा खतरा उन लोगों से है जो स्वार्थ के लिए दल बदलते हैं और संगठन की विचारधारा के प्रति निष्ठावान नहीं होते। कई ऐसे लोग होते हैं जो दल तो बदल लेते हैं, लेकिन उनका दिल और मानसिकता नहीं बदलती। ऐसे लोग सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए काम करते हैं और पार्टी की मूल भावना से उनका कोई जुड़ाव नहीं होता।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो दल बदलने के बाद पूरी तरह पार्टी में घुल-मिल जाते हैं, जैसे दूध और शक्कर एक हो जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद संगठन को सतर्क रहने की आवश्यकता है। वे हमेशा इस बात पर जोर देती रही हैं कि भाजपा के मूल विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ताओं को हर समय सम्मान मिलना चाहिए। संगठन की ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता होते हैं, न कि वे लोग जो केवल अपने हितों के लिए पार्टी का उपयोग करते हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे बड़ा खतरा उन लोगों से है जो पहले अपना हित देखते हैं और पार्टी के भविष्य की चिंता नहीं करते। ऐसे कई उदाहरण हैं जहां नेता एक दल से चुनाव जीतकर दूसरे दल में चले जाते हैं और फिर वहां से जीतकर वापस लौट आते हैं। इस प्रकार की राजनीति को उन्होंने संगठन के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने संगठन में नियुक्तियों और दायित्वों को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। राजे ने कहा कि जिम्मेदारियां केवल उन्हीं कार्यकर्ताओं को दी जानी चाहिए, जिनमें संगठन के प्रति निष्ठा, समर्पण और संस्कार हों।
उन्होंने जोर देकर कहा कि दायित्व देने से पहले कार्यकर्ताओं की पृष्ठभूमि और उनकी विचारधारा की प्रतिबद्धता को बार-बार जांचना आवश्यक है। उनके कार्यकाल में भी इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता था कि भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाए जो शुरू से पार्टी की विचारधारा से जुड़े रहे हैं। भाजपा का मूल सिद्धांत यही रहा है कि विचारधारा से कभी समझौता नहीं किया जाना चाहिए। राजे ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा सिद्धांतों को सर्वोपरि रखा। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सत्ता से ज्यादा महत्वपूर्ण विचारधारा और नैतिकता होती है ।

कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा की जड़ें जनसंघ से जुड़ी हैं। भारतीय राजनीति को समझने के लिए श्यामाप्रसाद मुखर्जी और भीमराव अंबेडकर के पत्रों का अध्ययन करना आवश्यक है, जो उन्होंने जवाहरलाल नेहरू को इस्तीफे के दौरान लिखे थे। उन्होंने इन पत्रों को ऐतिहासिक धरोहर बताया और कहा कि जनसंघ की स्थापना भी त्याग और बलिदान की नींव पर हुई थी। वर्षों की तपस्या और बलिदान के बाद आज पार्टी एक विशाल वटवृक्ष बन चुकी है।

उन्होंने कहा कि आज विपक्ष के नेता भी भाजपा के नेतृत्व की सराहना करते हैं। वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि जहां दुनिया युद्ध और संकट से जूझ रही है। वहीं, दूसरी तरफ भारत मजबूती से खड़ा है और पड़ोसी देशों की मदद भी कर रहा है। मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक मात्र ऐसी पार्टी है जो कार्यकर्ता आधारित है।

पार्टी विचारधारा से भटक कर चले गए थे उनको कुछ नहीं मिला। आपातकाल के दौरान हमने बहुत यातनाएं सही। संघ की शाखा से हमने संस्कार लिए है। राष्ट्र हमारे लिए सर्वोपरि है। कार्यक्रम में डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा, मंत्री किरोड़ी लाल मीणा, जोगाराम पटेल, सांसद मंजू शर्मा और विधायक गोपाल शर्मा सहित कई नेता मौजूद रहे।

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