चंपत राय,महासचिव,अनिल मिश्रा ट्रस्टी का इस्तीफा मंजूर, कोषाध्यक्ष ने यह जानकारी दी है

अयोध्या। चंपत राय,महासचिव, और अनिल मिश्रा ट्रस्टी श्री राममंदिर ट्रस्ट के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए है। सवाल यह है कि क्या इन इस्तीफों के स्वीकारने से चंदा चोरी के दाग धुल सकते हैं।

चंदा चोरी के सवालों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की अयोध्या में बैठक संपन्न हुई । ट्रस्ट की बैठक के बाद कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने बताया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। इसी के साथ उन्होंने कहा कि ‘राम मंदिर चढ़ावा चोरी से सभी सदस्य आहत’ हैं। इस क्रम में कार्यवाहक के रूप में कृष्ण मोहन को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा मंदिर परिसर में सीईओ तैनात किए जाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया गया है।

मणिरामदास छावनी में हुई बैठक में कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था में खामियों की बात को स्वीकार करते हुए चढ़ावा चोरी को लेकर कहा कि इससे करोड़ों राम भक्तों को ठेस पहुंची है।
महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में हुई बैठक में कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बैठक में एजेंडा पेश किया। बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सदस्य विश्व तीर्थ प्रसनाचार्य, स्वामी परमानंद गिरी, जगद्गुरु बासुदेवानंद सरस्वती, कृष्ण मोहन, महंत दिनेंद्र दास, पदेन सदस्य जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी, विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में विहिप दिनेश चंद्र, महंत कमल नयन दास भी बैठक मे मौजूद रहे.वहीं वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए ट्रस्ट संयोजक के परासन, पदेन सदस्य प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद, केंद्रीय सचिव प्रशांत लोखंडे व मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी जुड़े।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह तय किया गया था कि ट्रस्ट की तय बैठक जो मूल रूप से 11 जुलाई के लिए निर्धारित थी, जितनी जल्दी हो सके, आयोजित की जाए।  इसलिए, सभी को दी गई जानकारी के आधार पर आज, 6 जुलाई को किया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि हम सभी इससे आहत और दुखी हैं। चोरी कितनी बड़ी या छोटी थी, यह गौण बात है। मुख्य चिंता की बात यह है कि यहां ऐसा माहौल कैसे बनने दिया गया। बहरहाल, सच्चाई हमारे सामने है और उस पर विचार करना हमारा कर्तव्य है। इसी वजह से तय तारीख से पहले ही हम आज गहरे चिंतन और दुख के साथ एकजुट हुए।
उन्होंने कहा कि हमारे महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं। महासचिव के तौर पर काम कर रहे चंपत राय बहुत आहत थे। उन्हें लगा कि जब तक न्याय पूरी तरह से नहीं हो जाता, यानी दोषियों को पकड़ा नहीं जाता और उन्हें उचित सज़ा नहीं मिलती, तब तक अपने पद पर बने रहना ठीक नहीं है। इसी भावना से प्रेरित होकर उन्होंने अपना इस्तीफा दिया। यह ऐसा मामला नहीं था जिसे हम बस स्वीकार या अस्वीकार कर सकें।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि एक बार इस्तीफ़ा सौंपे जाने के बाद, उसे स्वीकार करने या अस्वीकार करने का फ़ैसला हमारे हाथ में नहीं था। हमें बस उसे स्वीकार करना था. नतीजतन, हमने उसे स्वीकार कर लिया। उस समय हमने चंपत राय की सेवाओं को भी माना और उनकी सराहना की। उन्होंने खुद बड़े दिल से यह फ़ैसला लिया। उन्होंने इतने सालों तक राम मंदिर के निर्माण के लिए काम किया है।
ज़िम्मेदारी कृष्ण मोहन को सौंपी गई है, जो यहां अंतरिम जनरल सेक्रेटरी के तौर पर बैठे हैं. आरोप लगाए जाते हैं कि कई अन्य बेहतरीन चढ़ावे और दान की गई चीज़ें भी बिना किसी सुराग के गायब हो गईं। हम इन सभी चीज़ों का रिकॉर्ड रखने वाला रजिस्टर आपको दिखाने के लिए लाए हैं। हम उन सभी चीज़ों का विवरण पेश करेंगे जिनके बारे में सवाल उठाए गए हैं। हम आज ये सब आपके सामने दिखाने जा रहे हैं। इसके अलावा, हम आपको बताना चाहते हैं कि हमारे पास ऐसी 2800 चीज़ों की सूची वाला एक रजिस्टर है और वे सभी सुरक्षित हैं।

उन्होंने कहा कि ट्रस्ट ऐसे बेहतरीन काम को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और हमने इस मकसद के लिए खास अधिकारियों को नियुक्त करने के लिए एक छोटी सी कमेटी बनाई है। हम इसी तरह काम को आगे बढ़ाएंगे। हम 22 तारीख को फिर से मिल रहे हैं। हमें उम्मीद है कि तब तक SIT की अंतिम रिपोर्ट हमें मिल जाएगी। हम उस रिपोर्ट पर चर्चा करने और अतिरिक्त ट्रस्टी नियुक्त करने के लिए 22 तारीख को मिल रहे हैं। हम साफ़ तौर पर कहना चाहते हैं कि चोरी तो चोरी होती है और SIT अभी इस मामले की जांच कर रही है। यानी यह प्रशासन की ज़िम्मेदारी है। हम भी ज़ोरदार मांग करते हैं कि दोषियों को पकड़ा जाए।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में राम मंदिर के लेखा जोखा को भी प्रस्तुत किया गया। 3 घंटे तक चली बैठक के बाद ट्रस्ट द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि 2020 में ट्रस्ट की स्थापना के पश्चात 6 वर्ष से कम के अल्पकाल में प्रभु श्री रामलला के भावी और अप्रतिम मंदिर के निर्माण का ऐतिहासिक कार्य सम्पूर्ण हुआ। इसी अवधि में मुख्य मंदिर एवं परकोटे में बने समस्त मंदिरों में प्राण-प्रतिष्ठा, ध्वजारोहण और श्रीराम यंत्र की स्थापना के महती कार्य सम्पन्न हुये

वहीं निधि समर्पण अभियान एवं कॉर्पस दान के माध्यम से प्राप्त कुल राशि 3264 करोड़ रुपए में से 2370 करोड़ रुपए निर्माण एवं पूंजीगत व्यय में उपयोग की गई है। प्रारम्भ से लेकर 31 मार्च, 2026 तक कुल चढ़ावा 582 करोड़ रुपए प्राप्त हुआ, जिसमें से 391 करोड़ रुपए की राशि संचालन व्यय में उपयोग ली गई। शेष राशियां बैंक खातों में उपलब्ध हैं। ये समस्त वितीय सूचनाएँ समय समय पर ट्रस्ट ने मीडिया के समक्ष प्रस्तुत की हैं।

नगद राशि के अतिरिक्त अनेक श्रद्धालुओं ने वस्तु के रूप में प्रभु श्री रामलला को भेंट अर्पित की हैं। ऐसी कुल 2926 भेंट प्राप्त हुई हैं, जो समस्त, तिथि अनुसार, सम्पूर्ण विवरण के साथ रजिस्टर में दर्ज हैं और उनका भौतिक सत्यापन एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फ़र्म द्वारा आंतरिक अंकेक्षक के नाते प्रति वर्ष किया जाता है। काउंटर पर ऐसी भेंट देने वाले समस्त श्रद्धालुओं को रसीदें दी गई हैं और काउंटर के अतिरिक्त दी गई भेंट के लिए भी रसीद दी गई है।ट्रस्ट ने एक उपयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी का चयन करने के निमित्त तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति में सेवानिवृत न्यायाधीश प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े रहेंगे। समस्त श्रद्धालुओं से निवेदन किया है कि जो भी अपनी दी हुई भेंट का उपयोग जानना अथवा सत्यापन करना चाहें, वे कभी भी ट्रस्ट के अधिकारी से तिथि व समय निश्चित कर अयोध्या आएं। प्रभु श्री रामलला के दर्शन के साथ अपनी भेंट का सत्यापन कर सकते हैं। चांदी की वस्तुओं को भारत सरकार की टकसाल में गला कर छड़ें बनाई गई हैं, जिनके मूल स्वरूप का विवरण फोटो व वजन सहित उपलब्ध है। गलाने के पश्चात चांदी की शुद्धता और कुल वजन के टकसाल के प्रमाण-पत्र भी उपलब्ध हैं।

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