राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार की अभी ज्यादा जरूरत नहीं

जयपुर। भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय पर नवनियुक्त पदाधिकारियों के साथ बैठक कर पिछले तीन महीनों के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार का निर्णय केवल मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत फैसला नहीं होगा, बल्कि संगठन और राष्ट्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद ही अंतिम रूप लिया जाएगा। इसके साथ राधामोहन दास ने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के उस बयान का भी समर्थन किया,जिसमें उन्होंने राजनीतिक नियुक्तियों और संगठन दायित्व में पार्टी के मूल कार्यकर्ता को प्राथमिकता देने की बात कही।
बैठक में पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ता सुनवाई फिर से शुरू करने और संगठनात्मक जिलों की संरचना को लेकर भी चर्चा हुई। प्रभारी ने कहा कि जिन पदाधिकारियों को अब तक कोई विशेष जिम्मेदारी नहीं दी गई थी, उन्हें भी कार्य सौंपे गए हैं। संगठन में जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा किया जा रहा है और हर महीने समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। अग्रवाल ने कहा कि प्रत्येक पदाधिकारी से व्यक्तिगत रूप से उनके योगदान के बारे में जानकारी ली गई और आगे के लिए लक्ष्य तय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा मुख्यालय में फिर से कार्यकर्ता सुनवाई शुरू होगी। सप्ताह में तीन दिन मंत्री बैठकर आम जनता की समस्याएं सुनेंगे, जबकि हर दिन एक पदाधिकारी भी शिकायतों की सुनवाई करेगा और उनके समाधान की निगरानी करेगा। कार्यकर्ता सुनवाई की हर महीने समीक्षा होगी।

मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अग्रवाल ने कहा कि राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार की अभी ज्यादा जरूरत महसूस नहीं हो रही है। फिर भी अगर मंत्रियों की परफॉर्मेंस के आधार पर कुछ बदलाव करना भी होगा, तो ये निर्णय केवल मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत फैसला नहीं होगा, बल्कि संगठन और राष्ट्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद ही अंतिम रूप लिया जाएगा। मंत्रिमंडल विस्तार पर बोलते हुए अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री जब यह महसूस करेंगे कि विस्तार की आवश्यकता है, तब वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से चर्चा करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा में कोई भी व्यक्ति संगठन से ऊपर नहीं होता। मुख्यमंत्री के पास यह विशेषाधिकार जरूर होता है कि वे मंत्रियों के काम का आकलन करें, लेकिन अंतिम निर्णय संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत ही होता है।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के हालिया बयान का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि राजे ने एक सैद्धांतिक और सकारात्मक बात कही है। जो कार्यकर्ता अच्छा काम करता है, उसे उचित स्थान मिलना चाहिए। अग्रवाल ने यह भी कहा कि वसुंधरा राजे पार्टी की वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं और आज भी जनता में उनकी अच्छी पकड़ है. उनका बयान पूरी तरह संगठन के हित में है।
राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अग्रवाल ने कहा कि सभी को एक साथ समाहित करना संभव नहीं होता। पार्टी कार्यकर्ताओं को उनकी क्षमता के अनुसार अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाती हैं। उन्होंने बताया कि नियुक्तियों की प्रक्रिया कई स्तरों से गुजरती है, इसलिए इसमें समय लगता है, लेकिन जल्द ही घोषणाएं की जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि अभी सरकार के लगभग ढाई साल का कार्यकाल शेष है, ऐसे में सामूहिक निर्णय के आधार पर नियुक्तियां की जाएंगी। भाजपा में कार्यकर्ताओं को ‘बौना’ नहीं माना जाता और न ही यहां डरने वाली कार्यसंस्कृति है।
अग्रवाल ने बताया कि प्रशासनिक जिलों के अनुरूप संगठन के जिलों का पुनर्गठन किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष को अधिकृत कर दिया गया है और जल्द ही इसकी घोषणा भी होगी  इसके साथ ही पंचायत और निकाय चुनावों की तैयारियों को लेकर भी पार्टी सक्रिय हो गई है। जहां तक पंचायत निकाय चुनाव में हो रही देरी का सवाल है उसमें पार्टी का कोई हस्तक्षेप नही होता, यह सिर्फ सिर्फ निर्वाचन आयोग का काम। निर्वाचन आयोग तय करेगा कि कब चुनाव करना है कब नहीं करना। भारतीय जनता पार्टी चुनाव को लेकर संगठनात्मक स्तर पर पूरी तरह से तैयार है।

कांग्रेस पर हमला बोलते हुए अग्रवाल ने कहा कि पार्टी के भीतर ही आपसी संघर्ष चल रहा है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तंज कसते हुए कहा कि उनका ‘इंतजार शास्त्र’ अपने ही नेताओं पर निशाना साधता है। गहलोत अपने ही सहयोगियों से प्रतिस्पर्धा करते रहे हैं और उनकी राजनीति आंतरिक द्वेष से प्रभावित रही है,इसलिए वह बीजेपी के कंधे पर बंदूक रख अपनी ही पार्टी के नेताओं पर इंतजार शास्त्र के बहाने निशाना साध रहे हैं। अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस के अंदर की लड़ाई का असर जनता पर पड़ता है, जबकि भाजपा संगठनात्मक मजबूती और सामूहिक निर्णय के आधार पर आगे बढ़ रही है।

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