बजट सिर्फ जुमले की बरसात, विकास के पहिए को पीछे धकेला

जयपुर। राज्य सरकार की ओर से विधानसभा में पेश किए गए बजट पर बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बजट को जुमलों की बौछार बताते हुए आंकड़ों के आधार पर सरकार को घेरा।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इस सरकार की प्राथमिकता में चिकित्सा, शिक्षा और कृषि नहीं है। क्योंकि इन तीनों ही बड़े महकमों का बजट कम कर दिया गया है। जूली ने कहा कि पिछली बार शिक्षा के लिए 18.2 प्रतिशत का बजट रखा गया था, लेकिन इस साल 17.1 प्रतिशत बजट कर दिया है. डेढ़ लाख पद शिक्षकों के रिक्त चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल के क्षेत्र में भी सरकार ने बजट कम किया है. चिकित्सा के क्षेत्र में सरकार ने पिछला बजट 8.4% रखा था, इस बार 8.1% कर दिया है। इसी के चलते आरजीएचएस में भुगतान नहीं हो रहा है। पेंशनर्स और बुजुर्गों को दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं, इलाज नहीं मिल पा रहा है। जूली ने कहा कि भाजपा सरकार ने अपने घोषणा पत्र में एग्रीकल्चर के लिए बात की थी, लेकिन पिछली बार जहां सरकार ने कृषि पर 4.6% बजट दिया था, इस बार 4.5 प्रतिशत बजट दिया गया है, जो कि पिछली बार से कम है। उन्होंने कहा कि किसानों को सम्मान निधि नहीं दी जा रही है। इसके अलावा भरपाई की घोषणा नहीं की गई है। एससी एसटी इनकी प्राथमिकता में नहीं है।

सरकार के वित्तीय प्रबंधन को लेकर टीकाराम जूली ने कहा कि विकास के पहियों को पीछे धकेल दिया है। देश और प्रदेश में डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद 16वें वित्त आयोग से हमारा पैसा 6.3% से घटकर 5.93% कम कर दिया है. इसलिए इस साल राजस्थान को केंद्र से 1700 करोड़ रुपए कम मिलेंगे, क्या मुख्यमंत्री बार-बार दिल्ली जाकर कुछ नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान विधानसभा से प्रस्ताव बनाकर केंद्र को भेजा जाना चाहिए कि जो पूरा पैसा राजस्थान का है, वो उसे मिलना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि इस सरकार में वृद्धा, विधवा और महिलाओं को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा के तहत मिलने वाले 1250 रुपए की पेंशन भी समय पर नहीं दी जा रही है। हमारी सरकार बने तो 2000 रुपये सामाजिक सुरक्षा पेंशन देंगे। जूली ने सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार ने आईआईटी के तर्ज पर राजस्थान में इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की स्थापना करने की बात कही थी, लेकिन आज तक उसे नहीं बनाया है। इसके अलावा सरकार ने अपने संकल्प पत्र में जोधपुर में टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय स्थापित करने की बात कही थी, उसकी भी घोषणा आज तक नहीं की गई है। वहीं, प्रदेश में पहला एविएशन विश्वविद्यालय स्थापित करने का वादा किया गया था, उस पर भी अभी तक कोई घोषणा नहीं की गई है।

जूली ने कहा कि हमारी सरकार के समय लोकतंत्र मजबूत था, इसलिए कर्मचारी अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री से कर सकते थे, लेकिन इस सरकार में 9, 18, 27 के वेतनमान और सहित अन्य मांगों को लेकर कर्मचारी लंबे समय से आंदोलन करते आ रहे हैं, लेकिन कर्मचारियों के लिए बजट में एक भी घोषणा नहीं की गई, जिसको लेकर कर्मचारी नाराज हैं और आंदोलन कर रहे हैं। वकील भी राजस्थान में जगह-जगह आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वित्त मंत्री ने 3:15 घंटे का भाषण पढ़ा और उसके दौरान चार-पांच मंत्री तो नींद लेते हुए नजर आए। उन्होंने कहा कि देश में पहला बजट 1860 में पेश किया गया था, तब से लेकर आज तक इसे नीरस बजट कभी नहीं देखा है।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर शेरो शायरी के जरिए भी तंज कसा। उन्होंने कहा, ‘यहां जो बैठे हो पहली सिफ में अभी से उड़ने लगे हवा में, तुम्हारा लहजा बता रहा है कि तुम्हारी दौलत नई नई है।’ इसी प्रकार एक अन्य शेर के जरिए उन्होंने कहा,’ कितने सांचों में ढल कर आए हैं, ख्वाब की तरह पलकर आए हैं तुम, सिफारिश से जहां पहुंचे हो, वहां हम चलकर आए हैं।

जूली ने कहा कि भाजपा के नेता बजट की तुलना बेटा-बेटी से करते हैं. वित्त मंत्री ने बजट पेश किया और इस सदन में भाजपा के सदस्य ने बेटियों को बेटों की तुलना में कमजोर बताया, इससे शर्म की बात कुछ नहीं हो सकती है। जूली ने कहा कि सरकार ने लाडो प्रोत्साहन योजना की बात की है और दो-दो लाख रुपए किस्तों में देने की बात कही है, लेकिन सरकार ने अभी तक डेढ़ लाख रुपये ही दिए हैं।
जूली ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि बजट पेश होने के बाद मैं देख रहा था कि मुख्यमंत्री को कोई धन्यवाद देने नहीं पहुंचा, बजट इतना नीरस था कि कोई भी मुख्यमंत्री को धन्यवाद देने नहीं पहुंचा है। जूली ने कहा कि भाजपा बिहार, महाराष्ट्र और असम में महिलाओं के खाते में 10000 रुपए डालने की बात करती है, तो फिर राजस्थान की महिलाओं से क्या दुश्मनी है, उनके खातों में 10000 क्यों नहीं देते हो, क्या चुनाव से 3 महीने पहले ही खाते में रुपए डालोगे।

जूली ने जल जीवन मिशन में गलत आंकड़े पेश करने का मामला उठाते हुए कहा कि सरकार ने बजट में कहा है कि जल जीवन मिशन में साल 2024-25 में 25 लाख घरों में नल लगाएंगे और 25-26 में 20 लाख घरों में पानी उपलब्ध करवाएंगे, लेकिन 2024 में 9 लाख 44000 कनेक्शन ही हो पाए हैं, वो भी हमारी सरकार के समय हुए हैं. उन्होंने कहा कि 25-26 में केवल 2 लाख 25000 कनेक्शन ही दे पाए हैं।

सरकार ने 14 लाख नए कनेक्शन देने की घोषणा बजट में की है, लेकिन जिस दिन बजट पेश हो रहा था, उसी दिन जेजेएम के पोर्टल पर कनेक्शन का आंकड़ा 13 लाख 49000 दिखा रहा था। उन्होंने कहा कि ईस्टर्न कैनाल परियोजना को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं, यमुना जल को लेकर बड़ी-बड़ी बातें हो रही हैं, लेकिन अभी तक इन पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया गया है और मुख्यमंत्री भागीरथी बनकर घूम रहे हैं।

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