मुख्यमंत्री जवाब दें 2023 के कानून को क्यों अटकाया केंद्र सरकार ने ? बिना जातिगत जनगणना के OBC महिलाओं के साथ अन्याय कर रही है भाजपा : टीकाराम जूली नेता प्रतिपक्ष राजस्थान विधानसभा
नारी शक्ति वंदन तो 3 साल पहले ही पास हो चुका, लागू कब करोगे ?
महिला मुख्यमंत्री को हटाकर खुद कुर्सी पर बैठे और बातें महिला सम्मान की करते हैं मुख्यमंत्री
लिखी-लिखाई पर्ची पढ़ रहे हैं मुख्यमंत्री, भाजपा के पास न नीति है न नीयत
जयपुर। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के रविवार को की गयी प्रेस वार्ता में विपक्ष पर लगाए आरोपों को सिरे से नकारते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के मुखिया पूरी तरह से दिल्ली के ‘रिमोट कंट्रोल’ से संचालित हैं। वहां से जो स्क्रिप्ट लिखकर दी जाती है, मुख्यमंत्री जी बिना अपना विवेक लगाए उसी को यहां दोहरा देते हैं।
जूली ने तंज कसते हुए कहा कि जिस पार्टी ने एक कद्दावर महिला नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को दरकिनार कर दिया, वह आज महिला सम्मान की बात कर रही है? क्या एक महिला मुख्यमंत्री की जगह खुद को थोपना ही भाजपा का असली महिला सम्मान है? प्रधानमंत्री मोदी की तरह मुख्यमंत्री भी राजस्थान में ‘पर्ची’ पढ़कर प्रदेशवासियों को भ्रमित करने का असफल प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री के बयान कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को रोककर विपक्ष ने महिलाओं का अपमान किया है आड़े हाथों लेते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि शायद मुख्यमंत्री जी को याद नहीं है कि वर्ष 2023 में यह बिल तो सर्वसम्मति से पास हो गया था हाँ लेकिन सरकार ने इसे लागू करने की नीयत नहीं दिखाई है।
टीकाराम जूली ने सवाल उठाया कि जब साल 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से महिला आरक्षण विधेयक पारित कर दिया था, तो भाजपा सरकार पिछले तीन वर्षों से कुंभकर्णी नींद क्यों सो रही थी? इसे अभी तक लागू क्यों नहीं किया गया? श्री जूली ने कहा कि पूरा विपक्ष और हमारे नेता राहुल गांधी व मल्लिकार्जुन खड़गे लगातार मांग कर रहे हैं कि आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। लेकिन भाजपा ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इसमें ‘परिसीमन’ और ‘जनगणना’ का पेच फंसाकर इसे अनिश्चितकाल के लिए अटका दिया है। यह महिलाओं के अधिकारों के साथ किया गया सबसे बड़ा विश्वासघात है।
भाजपा के हालिया संशोधन विधेयकों पर प्रहार करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इसमें दो गहरे षड्यंत्र छिपे हैं। पहला सीटों का मनमाना परिसीमन करना ताकि भाजपा लंबे समय तक सत्ता पर काबिज रह सके। दूसरा, महिला आरक्षण को चुनावी लाभ का झुनझुना बनाना।
जूली ने कहा कि भाजपा 2011 की जनगणना के पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन की छूट चाहती है, जो संसाधनों और न्याय के साथ खिलवाड़ है। भाजपा का असल मकसद महिलाओं को हक देना नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना है।
जूली ने स्पष्ट किया कि जब तक जातिगत जनगणना नहीं होगी, तब तक एससी, एसटी और विशेष रूप से ओबीसी वर्ग की महिलाओं को आरक्षण का वास्तविक लाभ मिलना नामुमकिन है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार ऐसा स्पष्ट बिल क्यों नहीं लाई जिससे समय पर जनगणना होकर सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व मिल सके?
जूली ने कहा कि देश और प्रदेश की महिलाएं बहुत समझदार हैं। वे जानती हैं कि जो दल 2023 में पास हुए कानून को तीन साल तक लागू नहीं कर पाया, उसकी नीयत में खोट है। भाजपा का यह सारा घटनाक्रम महज एक ‘तमाशा’ है जिसमें कोई दम नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि महिलाओं को केवल वोट बैंक समझने वाली भाजपा को आने वाले चुनावों में मातृशक्ति ही सबक सिखाएगी।