घड़साना/ श्रीगंगानगर। पिछले 31 दिनों से शांतिपूर्ण धरने पर बैठे किसानों का सब्र आखिरकार टूट गया और घड़साना में अनूपगढ़ शाखा से सिंचाई पानी की मांग को लेकर चल रहा किसानों का धरना स्थल से शनिवार देर रात देर रात किसान सभा के बाद आरएलपी सुप्रीमो एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में रात करीब 10 बजे श्रीगंगानगर की ओर पैदल कूच कर दिया। किसानों को रोकने के लिए प्रशासन ने 12 एमडी टोल नाके के पास बैरिकेडिंग कर रास्ता बंद किया। प्रशासन की तरफ से लगभग 500 पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया, लेकिन यहां पर किसानों की बढ़ती भीड़ के बीच पुलिस से टकराव की स्थिति बन गई। किसानों ने बैरिकेड्स हटाकर टोल नाके पर कब्जा कर लिया। हालात को देखते हुए पुलिस प्रशासन को पीछे हटना पड़ा। देर रात तक आंदोलन को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी।
शनिवार की दोपहर से ही घड़साना धान मंडी में ‘खेत बचाओ किसान बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले किसानों का हुजूम जुटने लगा था। आंदोलन के समर्थन में घड़साना के व्यापारियों ने बाजार पूरी तरह बंद रखे। शाम करीब छह बजे जब सांसद हनुमान बेनीवाल सभा स्थल पहुंचे।
मंच से सभा को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने साफ लफ्जों में कहा कि 31 दिनों से वे धूप, धूल और ठंड में बैठे हैं, मगर सरकार केवल खोखले आश्वासनों की घुट्टी पिला रही है। हनुमान बेनीवाल ने गहलोत-भजनलाल सरकारों की नीतियों पर तीखे हमले बोलते हुए प्रशासन को रात सवा नौ बजे तक का अल्टीमेटम थमा दिया। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों का समाधान नहीं हुआ तो वे पीछे नहीं हटेंगे और किसानों के साथ जयपुर में सचिवालय का घेराव करेंगे। इसके बाद उन्होंने किसानों के साथ श्रीगंगानगर कूच का ऐलान कर दिया। रात करीब 10 बजे उनके नेतृत्व में किसानों का जत्था पैदल रवाना हो गया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में किसान कूच में शामिल होने लगे।
श्रीगंगानगर की ओर बढ़ते काफिले को रोकने के लिए घड़साना से कुछ दूरी पर स्थित 12 MD टोल नाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया. मौके पर करीब 500 से 550 पुलिस और आरएसी के हथियारबंद जवानों की तैनाती की गई थी. सड़क पर कटीले तार, भारी पत्थर और लोहे के बड़े-बड़े बैरिकेड्स लगाकर रास्ता पूरी तरह सील कर दिया गया था।
रात करीब 11 बजे जब हजारों किसानों का रेला टोल नाके पर पहुंचा, तो पुलिस अधिकारियों ने समझाइश की कोशिश की, मगर आक्रोशित किसान रुकने को तैयार नहीं थे। कुछ ही मिनटों में स्थिति धक्का-मुक्की से बढ़कर सीधे टकराव में तब्दील हो गई। किसानों ने ट्रैक्टर आगे किए और मजबूत बैरिकेड्स को रौंदते हुए किनारे कर दिया। किसानों की भारी भीड़ और बढ़ते दबाव के आगे पुलिस के सुरक्षा घेरे पूरी तरह बिखर गए। किसी भी बड़ी अप्रिय घटना को टालने के लिए पुलिस बल को पीछे हटना पड़ा, जिसके बाद किसानों ने टोल प्लाजा पर पूरी तरह अपना डेरा जमा लिया। देर रात प्रशासन ने किसानों के संभावित अगले पड़ाव को देखते हुए रामसिंहपुर और श्रीगंगानगर मार्ग पर भी नाके लगाने शुरू कर दिए। अब किसानों के अनूपगढ़ की तरफ रुख करने की संभावना को लेकर प्रशासन सतर्क है। विभिन्न मार्गों पर पुलिस तैनाती बढ़ाकर आवाजाही और कानून-व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है।
आंदोलन की शुरुआत 10 सितंबर को हुई थी। प्रशासन की बेरुखी को देखते हुए 18 सितंबर से किसानों ने घड़साना उपखंड कार्यालय के मुख्य द्वार पर पड़ाव डाल दिया गया। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, जल संसाधन विभाग और किसान प्रतिनिधियों के बीच छह दौर से अधिक की वार्ताएं हुईं, लेकिन हर बार बात बेनतीजा रही. किसान नेताओं का आरोप है कि अधिकारी केवल मौखिक वादे करते हैं, लेकिन समझौते पर हस्ताक्षर करने से भागते हैं। किसानों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर मुहर लगाकर लिखित आदेश जारी नहीं होते, तब तक वे सड़कों से हटने वाले नहीं हैं। किसानों का कहना है कि एक महीने से अधिक समय तक धरना देने और लगातार वार्ताओं के बावजूद केवल आश्वासन मिलना पर्याप्त नहीं है। उन्हें पानी की व्यवस्था पर स्पष्ट निर्णय और लिखित सहमति चाहिए।
किसान अनूपगढ़ शाखा में सिंचाई पानी की समस्या का स्थाई समाधान चाहते हैं। उनकी प्रमुख मांगों में छह महीने का स्थाई रेगुलेशन लागू करना, चार में से दो समूहों को पर्याप्त सिंचाई पानी उपलब्ध करवाना, संबंधित सिंचाई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करना तथा फसल खराबे की विशेष गिरदावरी करवाकर बीमा क्लेम और उचित मुआवजा दिलाना शामिल है। किसानों का कहना है कि पर्याप्त पानी नहीं मिलने से बिजाई प्रभावित हो रही है। आगे फसल पकाने के समय भी पानी की कमी का संकट खड़ा हो सकता है। इसलिए पानी के बंटवारे की ऐसी व्यवस्था लागू होनी चाहिए, जिससे किसानों को हर बार आंदोलन करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़े।