वाल्मीकि जयन्ती पर “आदिकवि वाल्मीकि – साहित्यिक योगदान एवं लोकमंगल की अवधारणा” संगोष्ठी

आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी की जयन्ती पर “आदिकवि वाल्मीकि – साहित्यिक योगदान एवं लोकमंगल की अवधारणा” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन
रामायण के अयोध्या काण्ड में वर्णित 14 सूत्रों को अपने जीवन में आत्मसात करें – अजय असवाल
संस्कृत भाषा की शक्ति करती है हमारा संरक्षण – कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा
जयपुर। शान्ति एवं अहिंसा विभाग द्वारा राजस्थान संस्कृत अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी की जयन्ती पर अकादमी संकुल सभागार में “आदिकवि वाल्मीकि – साहित्यिक योगदान एवं लोकमंगल की अवधारणा” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम” के सामूहिक गान से कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया। अजय असवाल, निदेशक, शांति एवं अहिंसा निदेशालय ने अध्यक्षीय उद्बोधन में महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उनके द्वारा रचित रामायण के अयोध्या काण्ड में वर्णित 14 सूत्रों को आत्मसात करने एवं समग्र समाज को मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की जीवनी से छोटी–छोटी एवं अच्छी आदतें अंगीकार करने की आवश्यकता पर बल डाला। उन्होने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए वाल्मीकि रचित रामायण में उद्धरित प्रसंगों से प्रेरणा ले कर श्रीराम के आदर्शो एवं चरित्र को अपनी जीवनशैली में अंगीकृत करने का आह्वान किया।
संगोष्ठी में जगद्गुरु रामानन्दाचार्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा ने मुख्य अतिथि के रुप में अपने उद्बोधन में छात्र–छात्राओं को वाल्मीकि जी द्वारा रचित रामायण में वर्णित श्री राम की समस्त जीवों के लोक मंगल की अवधारणा को साकार करने हेतु किये गये कार्यों के बारे में अवगत कराया।
मुख्य वक्ता के रुप में कौशलेन्द्र दास, आचार्य ने महर्षि वाल्मीकि जी द्वारा रचित रामायण में श्री राम जी एवं सीता जी के चरित्र की सुन्दर एवं सरल शब्दों में व्याख्या कर उपस्थित छात्र–छात्राओं को रामायण का अर्थ समझाया।
राजस्थान संस्कृत अकादमी की निदेशक डॉ. लता श्रीमाली ने अतिथियों का स्वागत करते हुये महर्षि वाल्मीकि जी के द्वारा रचित रामायण ग्रन्थ की चौपाईयों के माध्यम से सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
संगोष्ठी में बड़ी संख्या में राजस्थान शिक्षक प्रशिक्षण विद्यापीठ, राजस्थान संस्कृत महाविद्यालय एवं जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शैक्षणिक स्टॉफ द्वारा उत्साह के साथ भाग लिया गया। छात्र–छात्राओं ने अपने शोधपत्रों के वाचन में महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन पर प्रकाश डाला। वक्ताओं रीना शर्मा, अंकिता शर्मा, किरण शर्मा एवं सुधा बुनकर को निदेशालय द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किये गये। उपस्थित छात्र–छात्राओं द्वारा राम भजन की सुन्दर प्रस्तुति दी गई।
कार्यक्रम की रुपरेखा का चित्रण शांति एवं अहिंसा निदेशालय की उप निदेशक, मधु रघुवंशी द्वारा तथा आभार वरिष्ठ लेखाधिकारी, महिमा पचार द्वारा प्रकट किया गया। राष्ट्रगान के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *