जयपुर। राजस्थान में जलजवन मिशन घोटाले को लेकर एसीबी ने एक बार फिर ताबड़तोड़ कार्यवाही की है। इस कार्रवाई के दौरान नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। एसीबी के छापों कार्यवाही आईएएस सुबोध अग्रवाल सहित अन्य आरोपियों के ठिकानों पर की गई।
एसीबी ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई में 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें पीएचईडी के सेवारत और सेवानिवृत्त इंजीनियर शामिल हैं। इससे पहले एसीबी की डेढ़ दर्जन टीमों ने मंगलवार सुबह से प्रदेश व अन्य राज्यों के करीब 15 ठिकानों पर छापेमारी की। जल जीवन मिशन घोटाले की जांच के लिए एसीबी की एक एसआईटी का गठन किया गया था। इस एसआईटी ने आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले एसीबी ने जल जीवन मिशन में व्याप्त भ्रष्टाचार के मामले में 2023 में ट्रैप की कार्रवाई को अंजाम दिया और मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में 11 आरोपियों और दो फर्मों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया जा चुका है।
गिरफ्तारी की जानकारी देते हुए एसीबी के डीजी गोविंद गुप्ता ने बताया कि जल जीवन मिशन घोटाले में मुख्य अभियंता (प्रशासन) दिनेश गोयल, मुख्य अभियंता (ग्रामीण) के डी गुप्ता, आरडब्ल्यूएसएसएमसी के तत्कालीन सचिव (अभी अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जयपुर क्षेत्र-द्वितीय सुभांशु दीक्षित, वित्तीय सलाहकार (अक्षय ऊर्जा) सुशील शर्मा, चूरू मुख्य अभियंता निरिल कुमार, निलंबित अधिशासी अभियंता विशाल सक्सेना, सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरुण श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता डीके गौड़ और सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता महेंद्र प्रकाश सोनी को गिरफ्तार किया है।
दरअसल जल जीवन मिशन घोटाले में साल 2024 में दर्ज मुकदमे की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर एसीबी की डेढ़ दर्जन टीमों ने अलसुबह जयपुर, बाड़मेर, उदयपुर, करौली, दिल्ली व अन्य राज्यों में करीब 15 ठिकानों पर की छापेमारी के दौरान आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। उन्हें जयपुर लाकर पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया है। अब इनसे पूछताछ और मामले में अनुसंधान जारी है।
2024 में दर्ज एक मुकदमे की जांच में सामने आया था कि श्रीगणपति ट्यूबवैल कंपनी और उसके प्रोप्राइटर महेश मित्तल, श्रीश्याम ट्यूबैवल कंपनी और प्रोप्राइटर पदमचंद जैन ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए और पीएचईडी के उच्चाधिकारियों से मिलीभगत कर टेंडर हासिल किए। इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र लगाकर करीब 960 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल कर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार करने की बात भी जांच में सामने आई है।
घोटाले में पीएचईडी के उच्चाधिकारियों ने आपराधिक मंशा से 50 करोड़ रुपए से ज्यादा के मेजर प्रोजेक्ट्स की निविदाओं में साइट विजिट की बाध्यता को नियमों के विपरीत शामिल किया। जिनमें बोलीदाताओं की पहचान उजागर कर टेंडर पुलिंग के कारण अप्रत्याशित रूप से ऊंचे टेंडर प्रीमियम मिले। जांच में यह भी सामने आया है कि इन टेंडरों का पीएचईडी के अधिकारियों ने अनुमोदन कर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया।
जांच के दौरान गड़बड़ी के सबूत सामने आने के बाद त्वरित और प्रभावी अनुसंधान के लिए एसपी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया गया। इस एसआईटी ने इस मामले में तकनीकी एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का गहनता से विश्लेषण किया। अब इस मामले में डीआईजी राजेश सिंह और डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में एसआईटी ने साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एडीजी स्मिता श्रीवास्तव के सुपरविजन में आरोपियों से पूछताछ और अग्रिम अनुसंधान जारी है।