जयपुर। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से प्रधानमंत्री मोदी के पिता को लेकर दिए गए बयान के बाद भाजपा ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया और कई जगहों पर पुतले फूंके। इस मामले को लेकर राजस्थान भाजपा ने भी प्रदेशभर में प्रदर्शन किए हैं। इस बीच राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खरगे के बयान के बचाव में भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि खरगे का उद्देश्य किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत अपमान करना नहीं था, वे भारत के सबसे अनुभवी राजनेताओं में से एक हैं और प्रधानमंत्री पद की गरिमा को अच्छी तरह समझते हैं।
गहलोत ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि- ‘नानी याद दिला देना’ और ‘बाप की जागीर समझना’ जैसे मुहावरे भारत की आम बोलचाल का हिस्सा हैं और लंबे समय से इस्तेमाल होते रहे हैं। इनका अर्थ हमेशा व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि भावनात्मक या अलंकारिक संदर्भ में होता है। खरगे ने भी इसी तरह की आम बोलचाल की शैली में अपनी बात कही है, इसलिए भाजपा को इस मुद्दे पर हंगामा करने का अधिकार नहीं है।
इसी के साथ पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि भाजपा को आज मर्यादा और अमर्यादित भाषा की बातें याद आ रही हैं, लेकिन साल 2019 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को लेकर टिप्पणी की थी, तब भाजपा नेताओं की मर्यादा कहां चली गई थी। गहलोत ने कहा कि भाषा और मर्यादा के मामले में भाजपा को दोहरा मापदंड नहीं अपनाना चाहिए।
गहलोत ने कहा कि भाजपा को हर मुद्दे पर राजनीति करने और जनता का ध्यान भटकाने के बजाय लोकतंत्र से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब देना चाहिए। खरगे के बयान को लेकर जिस तरह भाजपा हंगामा कर रही है, उससे लगता है कि उसके पास जनता के वास्तविक मुद्दों पर जवाब देने के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने उत्तराखंड के हल्द्वानी में खरगे की जनसभा के बाद मंच के कथित शुद्धिकरण का मुद्दा भी उठाया। गहलोत ने सवाल किया कि आखिर दलित नेता की सभा के बाद मंच के शुद्धिकरण जैसी घटना क्यों हुई? कांग्रेस ने यह मुद्दा संसद में भी उठाया था और उस समय भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जांच कराने की बात कही थी। गहलोत ने पूछा कि उस जांच का क्या हुआ और उसके नतीजे जनता के सामने क्यों नहीं रखे गए ?
गहलोत ने कहा कि आज देश के सामने सबसे बड़ा सवाल वोट चोरी के आरोपों और चुनाव आयोग की निष्पक्षता का है। कांग्रेस, युवा पीढ़ी और पूरा विपक्ष लंबे समय से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहा है, लेकिन इन सवालों पर केंद्र सरकार की ओर से अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। जब विपक्ष और युवा अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाते हैं, तो भाजपा उनके सवालों का जवाब देने के बजाय उन्हें विदेशी ताकतों से जोड़ने और उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाने लगती है। भाजपा को राजनीतिक हंगामे के बजाय लोकतंत्र, चुनावी प्रक्रिया और जनता से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब देना चाहिए।