जयपुर। राजस्थान में काम करने वाले बड़ी संख्या में फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद सवाल उठ रहा है कि इतना बड़ा रैकेट आखिरकार कैसे और किसके संरक्षण में काम कर रहा था। अशोक जी ने कड़ियां से कड़ियां जोड़ते हुए कई डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है।
दरअसल विदेश से एमबीबीएस की डिग्री लेकर आने वाले जो अभ्यर्थी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम (FMGE) पास नहीं कर पाते, वो फर्जी प्रमाण पत्र देकर इंटर्नशिप के लिए आवेदन करते और RMC से प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन करवा लेते। एसओजी की जांच में सामने आया है कि अब तक 93 ऐसे फर्जी डॉक्टर बने हैं।
एसओजी के एडीजी विशाल बंसल का कहना है कि इस खेल में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. अजय शर्मा और नोडल ऑफिसर अखिलेश माथुर की बड़ी भूमिका रही है। ये दोनों यह भी जांच नहीं करवाते कि अभ्यर्थी ने जो एफएमजीई प्रमाण पत्र जारी किया है, वह असली है या फर्जी। सत्यापन के बिना इंटर्नशिप करवाने और प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन करवाने के इस खेल में बड़े पैमाने पर रुपए का लेन-देन हुआ. एक अभ्यर्थी से 20 से 25 लाख रुपए तक वसूले गए। यह पूरा मामला करोड़ों रुपए के खेल का है। अब तक इस मामले में 23 आरोपियों को एसओजी गिरफ्तार कर चुकी है।
एसओजी की पड़ताल में सामने आया है कि विदेश से एमबीबीएस करने के बाद जो अभ्यर्थी एफएमजीई परीक्षा पास नहीं कर पाए। उन्होंने फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर रजिस्ट्रेशन करवा लिया। इसके बाद वे ऐसे ही दूसरे अभ्यर्थियों का रजिस्ट्रेशन भी करवाने लगे। दलालों और आरएमसी के तत्कालीन रजिस्ट्रार ने एक गिरोह बना लिया, जो मोटी रकम लेकर एफएमजीई प्रमाण पत्र का सत्यापन किए बिना इंटर्नशिप करवाने और रजिस्ट्रेशन करने लगा। अब तक एसओजी ने 93 ऐसे डॉक्टरों को चिह्नित किया है। आने वाले समय में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
फर्जी एफएमजीई प्रमाण पत्र को लेकर मिली एक शिकायत की एसओजी ने जांच की तो बड़ी गड़बड़ी सामने आई. इस मामले में एसओजी ने सबसे पहले पीयूष त्रिवेदी को गिरफ्तार किया, जो विदेश से एमबीबीएस की डिग्री लेने के बाद एफएमजीई परीक्षा पास नहीं कर पाया, लेकिन फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर इंटर्नशिप की। उसके साथ ही देवेंद्र सिंह गुर्जर और शुभम गुर्जर को गिरफ्तार किया गया। इनसे पूछताछ में मास्टरमाइंड के रूप में भानाराम का नाम सामने आया, लेकिन वो फरार हो गया।
इस मामले की सभी कड़ियां भानाराम पर आकर अटक रही थी। वह एसओजी से बचने के लिए विदेश भाग गया। उसने थाईलैंड, श्रीलंका, दुबई, कजाकिस्तान और नेपाल में फरारी काटी. उसे एसओजी ने पिछले दिनों दिल्ली हवाई अड्डे से पकड़ा। उसके साथ इंद्रराज गुर्जर को भी गिरफ्तार किया। भानाराम ने कजाकिस्तान से एमबीबीएस किया था. उसी ने पीयूष, देवेंद्र, शुभम और इंद्रराज को फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट दिलवाया और आरएमसी से इंटर्नशिप करवाई।
इंद्रराज गुर्जर ने कजाकिस्तान से एमबीबीएस करने के बाद दिसंबर 2022 का फर्जी FMGE सर्टिफिकेट भानाराम को रुपए देकर लिया, जिसके आधार पर उसने आरएमसी में आवेदन कर इंटर्नशिप पूरी कर ली और प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन भी हासिल कर लिया। एसओजी ने जिन 93 फर्जी डॉक्टरों को चिह्नित किया है। उनमें ज्यादातर कजाकिस्तान से एमबीबीएस करने वाले हैं।
पड़ताल में सामने आया है कि भानाराम और अन्य दलाल 20-25 लाख रुपए लेकर फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने से लेकर इंटर्नशिप करवाने तक की व्यवस्था करते थे। जांच में सामने आया कि इस गिरोह में दो यूनिट हैं। पहली यूनिट का काम है विदेश से डिग्री लेकर एफएमजीई परीक्षा पास नहीं कर पाने वालों को फर्जी प्रमाण पत्र दिलवाना होता, जबकि दूसरी यूनिट का काम फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में इंटर्नशिप करवाना और उसका प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट तैयार करवाना होता। इस गिरोह की सांठ-गांठ तत्कालीन रजिस्ट्रार अजय शर्मा से थी।
एसओजी की पड़ताल में सामने आया है कि फर्जी एफएमजीई प्रमाण पत्र दिलवाने और उसके आधार पर इंटर्नशिप व रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए 20 से 25 लाख रुपए लिए जाते थे। इनमें से 11 लाख रुपए राजस्थान मेडिकल काउंसिल में जाते थे, जबकि बाकि रकम दलालों में बंटती थी। इस मामले में आगे जांच जारी है। फर्जी प्रमाण पत्र से रजिस्ट्रेशन करवाने वाले डॉक्टरों के साथ ही इस खेल में शामिल बाकि दलाल भी एसओजी के राडार पर हैं। दावा यह है कि सभी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।