जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोटा न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की किडनी फेल और पांच मौतों के मामले में भाजपा सरकार पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि कोई जिम्मेदार नहीं है,तो फिर पांच मौतें कैसे हुई।
अशोक गहलोत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ऑपरेशन के बाद पांच प्रसूताएं डायलिसिस पर जिंदगी की सांसें गिन रही हैं। उनसे निःशुल्क इलाज और ट्रांसप्लांट का वादा किया गया था, लेकिन कैडेवर सूची में पंजीकरण दो महीने बाद 15 सितंबर को हुआ। जांच में निलंबित तीन डॉक्टरों को क्लीन चिट देकर बहाल कर दिया गया, जबकि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा रही। साथ ही RGHS योजना के 52 लाख लाभार्थियों को भुगतान अटकने से हो रही परेशानी पर भी सरकार को घेरा।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि प्रसूताएं आज तक डायलिसिस के सहारे हैं। परिजनों को आगे के इलाज की कोई जानकारी तक नहीं दी जा रही। सवाल सीधा है, अगर किसी की व्यक्तिगत लापरवाही नहीं थी, तो पांच महिलाओं की मौत और कई की किडनी फेल होने का जिम्मेदार कौन है? पीड़ित परिवार जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं, फिर भाजपा सरकार रिपोर्ट सार्वजनिक करने से क्यों बच रही है ? जिन बेटियों की जिंदगी दांव पर है, उन्हें वादों में उलझाए रखना संवेदनहीनता की हद है। इन्हें जल्द ट्रांसप्लांट, पूरा मुआवजा और जवाबदेही चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने RGHS योजना को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा है और कहा कि उस समय कांग्रेस सरकार ने RGHS इसलिए शुरू की थी कि कर्मचारी, पेंशनर और उनके परिवार को इलाज के लिए कभी जेब न टटोलनी पड़े। आज उसी RGHS के 52 लाख लाभार्थी भाजपा सरकार में अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। भुगतान अटका है, निजी अस्पताल योजना से हाथ खींच रहे हैं और कहीं-कहीं कैशलेस के नाम पर मरीजों से एक लाख रुपए से ज्यादा नकद वसूल लिए गए। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा मार उन पेंशनर्स पर पड़ी है, जिन्हें उम्र की परेशानियों के कारण बार-बार दवाएं और इलाज लेना पड़ता है। जिन बुजुर्गों ने पूरी जिंदगी सरकारी सेवा में लगा दी, उन्हें बुढ़ापे में इलाज के लिए अस्पताल दर अस्पताल ठोकरें खानी पड़ रही हैं। हालत यह है कि सरकारी कर्मचारी नौकरी में परेशानी के डर से शिकायत तक दर्ज नहीं करा पा रहे। राइट टू हेल्थ, चिरंजीवी और निःशुल्क दवा एवं जांच योजना की तरह RGHS भी इसी सोच से बनी थी कि हर किसी को इलाज मिले। गहलोत ने लिखा, ‘भजनलाल जी, बुजुर्गों और आम लोगों को इलाज के लिए तरसाना बंद कीजिए, भुगतान का संकट तुरंत सुलझाइए।