जयपुर। एसीबी मामलों की विशेष अदालत क्रम-1 ने जल जीवन मिशन में हुए करीब 960 करोड़ रुपए के घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व आईएएस और तत्कालीन अतिरिक्त जलदाय सचिव सुबोध अग्रवाल को 13 अप्रैल तक रिमांड पर एसीबी को सौंप दिया है। कई दिनों की फरारी के अग्रवाल कल एसीबी की पकड़ में आए थे।हाल ही में अदालत की ओर से आरोपी सुबोध अग्रवाल को भगोड़ा घोषित किया था।
एसीबी ने शुक्रवार को आरोपी सुबोध अग्रवाल को अदालत में पेश कर 14 अप्रैल तक रिमांड मांगा। एसीबी की ओर से कहा गया कि आरोपी से प्रकरण को लेकर पूछताछ करनी है। वहीं यह भी जानकारी हासिल की जाएगी की इस घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। वहीं सुबोध अग्रवाल के वकील ने पुलिस रिमांड का विरोध किया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है। वहीं सुबोध अग्रवाल ने अदालत कक्ष के बाहर कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। उन्हें उम्मीद है कि न्याय होगा, सत्यमेव जयते।
जल जीवन मिशन घोटाले को लेकर एसीबी ने पूर्व में तत्कालीन जलदाय मंत्री महेश जोशी और ठेका फर्म के संचालकों को गिरफ्तार किया था। यह सभी सुप्रीम कोर्ट से जमानत ले चुके हैं। इसके अलावा पिछले दिनों एसीबी ने जलदाय विभाग के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों दिनेश गोयल, कृष्णदीप गुप्ता, शुभांशु दीक्षित, सुशील शर्मा, विशाल सक्सेना, अरुण श्रीवास्तव, डीके गौड, महेन्द्र प्रकाश सोनी, निरिल कुमार और मुकेश पाठक को गिरफ्तार किया था। एसीबी कोर्ट इन सभी अधिकारियों की जमानत अर्जियों को खारिज कर चुकी है।
सुबोध अग्रवाल की ओर से मामले में अपने खिलाफ दर्ज एसीबी की इस एफआईआर को रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। गत 19 फरवरी को याचिका दायर होने के बाद नाटकीय घटनाक्रम में उनके अधिवक्ता ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश कर अपना वकालतनामा वापस ले लिया। अब उनकी ओर से दूसरे अधिवक्ता पेश हो रहे हैं। सुबोध अग्रवाल का कहना है कि जलदाय विभाग के अधिकारी विशाल सक्सेना के बयान पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, जबकि मामले का खुलासा होने के बाद उसके कार्यकाल में विशाल पर कार्रवाई की गई थी।
जल जीवन मिशन घोटाले को लेकर एसीबी ने साल 2024 में एफआईआर दर्ज की थी। जांच में सामने आया कि ठेका फर्म श्री गणपति ट्यूबवेल और श्री श्याम ट्यूबवेल के संचालकों ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर पीएचईडी के अफसरों से मिलीभगत कर करीब 960 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए।