कौन जीतेगा बंगाल : ‘दीदी’ की साख और ‘दादा’ की चुनौत
कोलकाता। भारत के सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्यों में से एक पश्चिम बंगाल एक बार फिर लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव के लिए तैयार है। चुनाव आयोग ने 294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुनावी बिगुल फूंक दिया है। इस बार राज्य में दो चरणों में मतदान होगा—23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026।
मुख्य मुकाबला टीएमसी बनाम भाजपा में ही…
राज्य में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होने की उम्मीद थी, लेकिन जमीन पर मुख्य लड़ाई फिर से ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शुभेंदु अधिकारी/नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सिमटती दिख रही है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC): मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी कल्याणकारी योजनाओं और ‘बंगाली अस्मिता’ के दम पर चौथे कार्यकाल की उम्मीद कर रही हैं। पार्टी का नारा इस बार भी राज्य की संस्कृति और विकास के इर्द-गिर्द बुना गया है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP): भाजपा ने हाल ही में अपना ‘संकल्प पत्र’ (घोषणापत्र) जारी किया है, जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, महिलाओं को ₹3000 मासिक सहायता और घुसपैठ को रोकने जैसे वादे किए गए हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने भ्रष्टाचार मुक्त बंगाल का नारा बुलंद किया है।
प्रमुख मुद्दे महत्वपूर्ण:
भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था: पिछले कुछ वर्षों में संदेशखाली और आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज जैसी घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, जिसे विपक्ष बड़ा मुद्दा बना रहा है।
कल्याणकारी योजनाएं: टीएमसी की मुफ्त राशन और नकद सहायता योजनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ मजबूत रखी है।
मतुआ समुदाय और नागरिकता: मतुआ वोट बैंक इस बार भी निर्णायक भूमिका में रहेगा, जहाँ भाजपा CAA के क्रियान्वयन को लेकर अपनी बढ़त बनाए रखना चाहती है।
बेरोजगारी और पलायन: युवाओं के बीच रोजगार की कमी और औद्योगिक विकास की धीमी गति विपक्षी दलों के लिए बड़ा हथियार बनी हुई है।
चुनावी शेड्यूल :
कार्यक्रम तारीख
पहला चरण (152 सीटें) 23 अप्रैल 2026
दूसरा चरण (142 सीटें) 29 अप्रैल 2026
मतगणना (रिजल्ट) 4 मई 2026
जहाँ एक तरफ ममता बनर्जी अपनी पुरानी साख बचाने की जद्दोजहद में हैं, वहीं भाजपा 2021 की हार का बदला लेने और बंगाल की सत्ता पर पहली बार काबिज होने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। वामपंथ और कांग्रेस का गठबंधन भी कुछ सीटों पर खेल बिगाड़ने की ताकत रखता है। 4 मई को आने वाले नतीजे न केवल बंगाल का भविष्य तय करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय करेंगे।