डोटासरा ने जताई आपत्ति,यूसीसी का मसौदा तैयार नहीं, जनसुनवाई के लिए बुला लिया

 

जयपुर। प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले राजनीतिक दलों को बिना कोई ड्राफ्ट तैयार किया जनसुनवाई के लिए बुलवाए जाने पर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कड़ी आपत्ति जताते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखा है।

डोटासरा ने लिखा है कि प्रदेश सरकार द्वारा दिनांक 6 एवं 7 जुलाई को समान नागरिक संहिता (UCC) कानून बनाने के संबंध में जनसुनवाई आयोजित कर विभिन्न राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया गया है। जबकि वास्तविकता यह है कि राज्य सरकार ने अभी तक न तो इस कानून का कोई मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार किया है और न ही सुझाव एवं आक्षेप आमंत्रित करने के लिए उसे किसी पोर्टल अथवा अन्य माध्यम से सार्वजनिक किया है।

डोटासरा का कहना है कि किसी भी कानून को लागू करने अथवा उस पर जनसुझाव आमंत्रित करने से पूर्व उसका मसौदा सार्वजनिक किया जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का आवश्यक हिस्सा होता है, ताकि आमजन एवं संबंधित पक्ष उसके प्रावधानों का अध्ययन कर अपने सुझाव एवं आक्षेप प्रस्तुत कर सकें। किंतु बिना किसी मसौदे अथवा ड्राफ्ट को सार्वजनिक किए सरकार समाज में जनसुनवाई के बहाने एक अनुचित बहस प्रारंभ करना चाहती है, जो प्रदेश के सामाजिक समरसता समर के ताने-बाने पर सीधा प्रहार है तथा सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने वाला कदम है।

डोटासरा ने पत्र में लिखा है कि इस प्रकार की बहस से विभिन्न धर्मों, जातियों एवं जनजातियों के मध्य अपने अधिकारों, परंपराओं एवं रीति-रिवाजों को लेकर गंभीर आशंकाएं उत्पन्न हो रही हैं। इस प्रकार की जनसुनवाई से समाज के विभिन्न वर्गों के मध्य वैमनस्यता की भावना उत्पन्न होने की आशंका है। कांग्रेस पार्टी ऐसी किसी भी बहस का स्पष्ट रूप से विरोध करती है, जिससे प्रदेश की सामाजिक समरसता एवं सौहार्द प्रभावित होता हो।

इसी के साथ डोटासरा ने समस्याओं पर ध्यान दिलाते हुए लिखा है कि वर्तमान में प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था बदहाल हो चुकी है। आमजन को न समय पर उपचार मिल रहा है और न ही आवश्यक दवाइयां उपलब्ध हो रही हैं। नकली दवाइयों के कारण सरकारी चिकित्सालयों में प्रसूताओं की मृत्यु जैसी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं सामने आई हैं। आरजीएचएस योजना का लाभ लाभार्थियों को नहीं मिल रहा है। मंहगाई चरम पर है, प्रदेश का युवा-नौजवान रोजगार के लिए भटक रहा है, बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही है तथा युवा पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या से ग्रस्त है।

इसी प्रकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था भी रसातल में पहुंच चुकी है। विद्यालय भवन जर्जर हो रहे हैं, शिक्षकों के पद रिक्त हैं तथा विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। आए दिन व्यापारियों से रंगदारी वसूलने के लिए गोलीबारी की घटनाएं हो रही हैं। महिलाओं एवं बालिकाओं के साथ दुराचार की घटनाएं प्रदेश को शर्मसार कर रही हैं तथा अपराधी बेखौफ होकर घूम रहे हैं। प्रदेश का अन्नदाता खाद, बीज एवं यूरिया की कमी से जूझ रहा है। प्रदेश का कृषि मंत्रालय आकंठ भ्रष्टाचार में लिप्त है, जिसकी खबरें आए दिन समाचार पत्रों एवं मीडिया में प्रकाशित हो रही हैं। प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में पेयजल एवं बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी गंभीर अभाव बना हुआ है।
इन ज्वलंत जन समस्याओं पर जनसुनवाई एवं समाधान न कर सरकार प्रदेश की मूल समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।

प्रदेश के आमजन की उपरोक्त जन समस्याओं के समाधान हेतु यदि जनसुनवाई आयोजित की जाती है तो कांग्रेस पार्टी के सभी कार्यकर्ता उसमें भाग लेकर अपने अमूल्य सुझाव सरकार को देने के लिए सदैव तैयार रहेंगे। सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाली तथा बिना किसी मसौदे के आयोजित की जा रही इस अर्थहीन जनसुनवाई का कोई कानूनी अधिकार एवं औचित्य नहीं है।

पीसीसी अध्यक्ष ने आग्रह किया है कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने वाली इस जनसुनवाई के आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का कष्ट करें तथा प्रदेश की मूलभूत जन समस्याओं के समाधान हेतु जनसुनवाई आयोजित करने के निर्देश जारी करें, ताकि कांग्रेस पार्टी सहित सभी पक्ष अपने सार्थक सुझाव सरकार के समक्ष प्रस्तुत कर सकें।

अन्यथा कांग्रेस पार्टी वर्तमान स्वरूप में बिना मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार किए एवं उसे सार्वजनिक किए समान नागरिक संहिता (UCC) के संबंध में आयोजित की जा रही इस जनसुनवाई का पूर्णतः बहिष्कार करने के लिए बाध्य होगी।

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