मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जन महाभियोग आना मोदी सरकार के लिए शर्मनाक

 

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जन महाभियोग की नौबत मोदी सरकार के लिए शर्मनाक स्थिति, ज्ञानेश कुमार में शर्म बची है तो पद छोड़ें : टीकाराम जूली , नेता प्रतिपक्ष

– चुनाव आयोग केवल निष्पक्ष होना ही नहीं चाहिए, बल्कि उसकी कार्यप्रणाली में निष्पक्षता दिखाई भी देनी चाहिए
-यदि ज्ञानेश कुमार में शर्म और नैतिकता बची है तो उन्हें देश की जनभावनाओं का सम्मान करते हुए अपने पद से हट जाना चाहिए
– एक बार चुनाव आयोग की स्वायतत्ता बहाल होने दो फिर देख्नेगें मोदी कहाँ ठहरने वाले

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने दिल्ली में शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मॉक पार्लियामेंट में जन महाभियोग लाए जाने को देश की जनभावनाओं की अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि यह केवल विपक्ष की राजनीतिक आवाज नहीं, बल्कि उन करोड़ों नागरिकों की पीड़ा और आक्रोश का प्रतीक है, जिनके नाम वैध मतदाता होने और देश का नागरिक होने के बावजूद मतदाता सूची से काट दिए गए।

जूली ने कहा कि आज देश का पूरा विपक्ष लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के सवाल पर एकजुट होकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जन महाभियोग लेकर आया है। यह स्थिति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह , ज्ञानेश कुमार के लिए आत्ममंथन और शर्मिंदगी का विषय होनी चाहिए।

जिस भारत के लोकतंत्र की मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती रही है, वहां लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण संस्थान चुनाव आयोग के मुखिया के खिलाफ जन महाभियोग जैसी पहल करने की नौबत आना बेहद गंभीर स्थिति है। प्रधानमंत्री और स्वयं मुख्य चुनाव आयुक्त को सोचना चाहिए कि देश में ऐसे हालात क्यों पैदा हुए कि विपक्ष को लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस तरह का कदम उठाना पड़ा।

जूली ने कहा कि चुनाव आयोग केवल निष्पक्ष होना ही नहीं चाहिए, बल्कि उसकी कार्यप्रणाली में निष्पक्षता दिखाई भी देनी चाहिए। दुर्भाग्य से मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में चुनाव आयोग इस कसौटी पर खरा उतरने में विफल रहा है। लोकतंत्र में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता सबसे महत्वपूर्ण है। यदि मतदाता को ही अपने वोट के अधिकार और मतदाता सूची में अपना नाम सुरक्षित रहने का भरोसा नहीं रहेगा तो लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद कमजोर होगी।

जूली ने कहा कि भाजपा के नेता जब यह कहते हैं कि मोदी कहीं नहीं जाने वाले, तो उनकी इस धारणा के पीछे भी कहीं न कहीं वोट चोरी और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों की अनदेखी का भरोसा दिखाई देता है।
यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी लोकप्रियता और जनसमर्थन पर इतना ही विश्वास है तो उन्हें चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता बहाल करने में क्या परेशानी है? मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने से सरकार पीछे क्यों हट रही है? चुनाव आयोग की स्वायत्तता बहाल कर दीजिए, मतदाता सूची से छेड़छाड़ की आशंकाओं को दूर कर दीजिए और हर नागरिक के वोट की निष्पक्षता सुनिश्चित कर दीजिए, फिर प्रधानमंत्री मोदी को चुनाव में उतरने दीजिए। लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि है, लेकिन चुनाव निष्पक्ष होंगे तभी जनता का फैसला भी पूरी विश्वसनीयता के साथ सामने आएगा।

जूली ने कहा कि हमारी मंशा किसी संवैधानिक संस्था को कमजोर करने की नहीं है, बल्कि हम चाहते हैं कि संविधान की भावना के अनुरूप चुनाव आयोग पूरी निष्पक्षता से काम करे और आम आदमी का उस पर भरोसा कायम रहे। यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार में शर्म और नैतिकता बची है तो उन्हें देश की जनभावनाओं का सम्मान करते हुए अपने पद से हट जाना चाहिए। लोकतंत्र में पद से बड़ा देश और संविधान होता है। आज देश की यही भावना है कि मतदाता के अधिकारों की रक्षा हो और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर जनता का विश्वास बहाल हो।

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