मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को कोसने और सैर सपाटे में ही 3 साल बिता दिए, बचे समय में कुछ तो काम करो – टीकाराम जूली, नेता प्रतिपक्ष
– तीन साल से रटी-रटाई बातें ही दोहराते हैं, अब तो लोगों को उनके भाषण भी याद हो गए
लोकतंत्र का चीरहरण करने वाले अब ‘लोकतंत्र बचाओ’ के कार्यक्रम कर रहे हैं
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कोटा में दिए गए बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री तीन साल से कांग्रेस को कोसने का काम कर रहे हैं। उनके पास अपने कार्यकाल की कोई ठोस उपलब्धि बताने के लिए नहीं है, इसलिए हर बार वही रटी-रटाई बातें दोहराकर जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने का प्रयास करते हैं। मुख्यमंत्री जी को बताना चाहिए कि तीन साल में प्रदेश के किसानों, युवाओं, महिलाओं और आमजन के लिए ऐसा कौन सा काम किया है, जिस पर वे जनता के बीच जाकर बात कर सकें?
जूली ने कहा कि ” मुख्यमंत्री तीन साल से रटी-रटाई बातें ही दोहरा रहे हैं। अब तो लोगों को उनके भाषण भी याद हो गए हैं। कांग्रेस को कोसने और सैर-सपाटे में ही तीन साल बिता दिए। मुख्यमंत्री जी, अब तो प्रदेश की जनता के लिए कुछ काम करिए और उनके आभाव और परेशानियां दूर कीजिए।”
जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री अक्सर यमुना जल समझौते की बात करते हैं, लेकिन चूरू के तांबाखेड़ी में किसान पिछले 72 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। किसान परेशान हैं, प्रदेश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात हैं और किसानों को अपनी फसल तथा पशुधन की चिंता सता रही है। मुख्यमंत्री जी को किसानों की समस्याओं की सुध लेने का समय नहीं है, लेकिन कांग्रेस को कोसने के लिए उनके पास पर्याप्त समय है। उन्हें बताना चाहिए कि किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं?
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री आवास से चंद मीटर की दूरी पर चोरी की वारदात हो जाती है। जब मुख्यमंत्री की नाक के नीचे राजधानी में लोग सुरक्षित नहीं हैं तो प्रदेश के बाकी जिलों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। दूसरी तरफ, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पर इतने गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री इन मामलों पर चुप्पी साधे हुए हैं। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच कब होगी और जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी?
जूली ने कहा कि लोकतंत्र का चीरहरण करने वाली भाजपा अब लोकतंत्र बचाने के कार्यक्रम आयोजित कर रही है। यह अपने आप में हास्यास्पद है। लोकतंत्र की दुहाई देने से पहले मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि नगरीय निकाय चुनावों में पुलिस और प्रशासन का दुरुपयोग करने की नौबत क्यों आई? मुख्यमंत्री जी, ये चुनाव आपके लिए खतरे की घंटी थे, क्योंकि जीत और हार का अंतर एक प्रतिशत से भी कम रहा। यदि आपको अपनी जीत का इतना ही भरोसा था तो फिर पुलिस और प्रशासन के दुरुपयोग की जरूरत क्यों पड़ी?
जूली ने कहा कि भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दीपावली पर दीयों और तेल के बजट में कटौती की जा रही है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर हजारों दीये जलाने में कोई कमी नहीं रखी जाती। सरकार को बताना चाहिए कि आमजन की खुशियों और परंपराओं के लिए संसाधनों की कमी क्यों है, लेकिन राजनीतिक आयोजनों के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं रहती?
उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर मुख्यमंत्री के बयान को लेकर कहा कि जब राहुल गांधी ने हरियाणा, कर्नाटक और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में मतदाता सूची से नाम काटने और जोड़ने को लेकर तीन बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ठोस तथ्यों और सबूतों के साथ गंभीर सवाल उठाए थे, तब केंद्र की भाजपा सरकार ने आज तक इनकी जांच क्यों नहीं करवाई? सरकार बताए कि आखिर कहां से वोट काटे जा रहे हैं और कहां नए वोट जोड़े जा रहे हैं? केवल निर्वाचन आयोग के हलफनामे का हवाला देकर गंभीर सवालों से बचा नहीं जा सकता। लोकतंत्र में मतदाता सूची की पारदर्शिता और हर पात्र मतदाता के मताधिकार की रक्षा सर्वोपरि है।
जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री को अब कांग्रेस को कोसना बंद करके अपने तीन साल के कार्यकाल का हिसाब देना चाहिए। प्रदेश की जनता को भाषण नहीं, काम चाहिए। किसानों को राहत, युवाओं को रोजगार, महिलाओं को सुरक्षा और आमजन को बेहतर कानून व्यवस्था चाहिए। मुख्यमंत्री जी को समझना होगा कि रटी-रटाई बातें दोहराने से जनता के सवाल खत्म नहीं होंगे।