जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आईएएस शिखर अग्रवाल के एपीओ होने और 40 विला खरीद प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कई सवाल दागे हैं।
शुक्रवार को जयपुर में मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से जवाब मांगते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण मंडल के तत्कालीन चेयरमैन की भूमिका पर सवाल उठाए और इस मामले की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग कर डाली।
इसी के साथ पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री को रिश्तेदारों को सत्ता और प्रशासन से दूर रखने की सलाह फिर दोहराई है।
आईएएस शिखर अग्रवाल के एपीओ होने के बाद गहलोत ने 40 विला खरीद प्रकरण को लेकर इसे मौजूदा सरकार के करीब तीन साल के कार्यकाल का बड़ा कथित घोटाला बताते हुए कहा कि मामला केवल एक अधिकारी के एपीओ होने से खत्म नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद लिए फैसलों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
गहलोत ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण मंडल के तत्कालीन चेयरमैन की भूमिका पर गंभीर सवाल हैं। इन फैसलों की प्रकृति से जानबूझकर भ्रष्टाचार की आशंका पैदा होती है। गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से खुद सामने आकर यह बताने की मांग की है कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है और आगे सरकार क्या कदम उठाने जा रही है?। गहलोत ने पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को देने की मांग की। उन्होंने विदेश में मौजूद संबंधित अधिकारी दंपती से तत्काल भारत लौटकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की अपील भी की। ये सभी आरोप और जांच की मांग गहलोत की ओर से उठाए गए हैं। मामले में संबंधित अधिकारियों और सरकार का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
गहलोत ने शिखर अग्रवाल प्रकरण के साथ मुख्यमंत्री के सामने अधिकारियों के बीच कथित विवाद का जिक्र करते हुए एक आईजी की उदयपुर में पोस्टिंग पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी को कार्रवाई का सामना कराने के बजाय अच्छी पोस्टिंग दी गई। गहलोत ने इस घटनाक्रम की जांच की जरूरत बताते हुए कहा, मुख्यमंत्री के कार्यकाल में ऐसे और भी मामले हो सकते हैं, जिनकी जानकारी सामने आनी बाकी है। उन्होंने उदयपुर विकास प्राधिकरण में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए अधिकारी की पोस्टिंग तथा तबादले को लेकर सरकार से जवाब मांगा। गहलोत का कहना है, शिखर अग्रवाल का मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निर्णयों की जवाबदेही का सवाल बन गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को फिर से सलाह देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को अपने रिश्तेदारों को सत्ता और प्रशासन से दूर रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों के नाम भी विवादों में सामने आ रहे हैं। गहलोत ने एक युवक का नाम लेते हुए कहा कि वे जयपुर में घूम रहे हैं, जबकि उनके मुताबिक पुलिस रिकॉर्ड में वे फरार हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में युवक को भरतपुर में पकड़ा गया था। उन्होंने मुख्यमंत्री की शपथ से पहले एक मामले को बंद किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। गहलोत ने सरकार से पूछा कि यदि किसी व्यक्ति को लेकर पुलिस रिकॉर्ड में ऐसी स्थिति है तो उसके संबंध में कार्रवाई और मौजूदा स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही?
गहलोत ने एसआईआर मुद्दे पर चुनाव आयोग पर एनडीए सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए 13 करोड़ से अधिक वोट कटने का दावा किया। उन्होंने लोकतंत्र बचाओ रैली को राष्ट्र और लोकतंत्र की रक्षा का अभियान बताया। भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान पर गहलोत ने कहा कि ऐसा पहली बार देखा जा रहा कि विपक्ष की रैली के जवाब में सत्ता पक्ष को भी सड़क पर उतरना पड़ रहा है।
लोकतंत्र बचाओ रैली के समर्थन में गहलोत ने एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग एनडीए सरकार के दबाव में काम कर रहा है. गहलोत ने एसआईआर के जरिए 13 करोड़ से अधिक वोट काटे जाने का दावा किया और सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के दिए हलफनामों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने न्यायपालिका और जांच एजेंसियों पर दबाव होने का आरोप लगाया एवं कहा, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर देश में चिंता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में रैली किसी राजनीतिक दल की ताकत दिखाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए सामूहिक आवाज उठाने का प्रयास है।
गहलोत ने कहा कि जब विपक्ष लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहता है तो उसके कार्यक्रमों पर सवाल खड़े किए जाते हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल भी अपने राजनीतिक कार्यक्रम करता है। विपक्ष की रैली के जवाब में भाजपा का काउंटर अभियान चलाना राजनीतिक रूप से सवाल खड़े करता है। गहलोत ने स्पष्ट किया कि विपक्ष रैलियों के जरिए सरकार बदलने की बात नहीं सोच सकता। लोकतंत्र में सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है, रैली नहीं। रैली और प्रदर्शन जनता की आवाज उठाने तथा सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का माध्यम हैं। उन्होंने सभी लोकतंत्र समर्थकों से इसमें भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार है जब विपक्ष के सवालों के जवाब देने के लिए सरकार को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। विपक्ष सड़कों पर उतरे यह तो समझ में आता है, लेकिन सत्ता पक्ष भी सड़कों पर उतर जाए तो फिर क्या हो सकता है ? इसको समझा जा सकता है। ऐसा कभी नहीं होता की सत्ता पक्ष को इस तरह से सड़क पर उतरना पड़े।
शिखर अग्रवाल मामले में गहलोत का सीएमओ पर निशाना, सीबीआई – ED जांच की मांग की