जोधपुर। वसुंधरा राजे को लेकर बीकानेर में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ न अपने बयान पर सफाई दी गई है। राठौड़ ने रविवार को जोधपुर में कहा कि मेरे बयान ‘सीएम पद की कोई गारंटी नहीं होती’ को गलत तरीके से पेश किया गया। मेरा आशय यह था कि भाजपा में सभी कार्यकर्ता एक सिपाही की तरह काम करते हैं। पद का निर्णय ऊपर वाला करता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊपर वाला से उनका मतलब विधाता, भगवान से था, जो हर व्यक्ति की किस्मत तय करता है। मैंने जो दोहा बोला था, उसका मतलब यही था, लेकिन उसका गलत मतलब निकाला गया। हम सब पार्टी के सिपाही हैं। मेरी कल ही वसुंधराजी बात हुई है। सब मिलकर काम करते हैं।
वसुंधरा राजे ने झालावाड़ की एक सभा में कहा था कि लोग कहते हैं कि मेरा काम नहीं हुआ, करवाओ। भैया मैं नहीं लड़ सकती। जब मेरा ही चला गया और मैं नहीं बचा सकी। राजे के इस बयान के कई मायने निकाले गए। इस बयान पर मदन राठौड़ ने बीकानेर में कहा कि वसुंधरा राजे के काम भी लगातार हो रहे हैं. वे पार्टी की वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। जब उनसे सवाल किया गया कि उन्होंने मुख्यमंत्री का पद नहीं बचा पाने की पीड़ा बताई। इस पर राठौड़ ने राजस्थानी कहावत कही कि ‘डिठी कोनी कोरे मूंग री, मांगे घी अर दाल; मोटी तू क्यूं झगड़ो करे, देख थारी नार’। इस कहावत के अर्थ को लेकर अब सियासी जानकारी अपने-अपने हिसाब से कयास लगा रहे हैं
मदन राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हमेशा महिलाओं के सम्मान के लिए काम करते रहे हैं। पहले तीन तलाक कानून लाकर महिलाओं को सम्मान दिया। अब महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए यह अधिनियम लाया जा रहा है, जो स्वागत योग्य है। राठौड़ ने जैसलमेर जाने से पहले सर्किट हाउस में भाजपा नेताओं से चर्चा की। पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।
राठौड़ ने रिफाइनरी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह राजस्थान की शान है, लेकिन कांग्रेस ने आनन फानन में इसका शिलान्यास करवा दिया था। एमओयू की शर्तें हमारे प्रतिकूल थी. जमीन और तेल हमारा होने के बावजूद हमें सालाना 3700 करोड़ देने की शर्त रखी गई थी। अब प्रधानमंत्री ने रिफाइनरी से जुड़े विकास के लिए बजट दिया है। कार्यकर्ताओं की बैठक के बाद राठौड़ ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत द्वारा रिफाइनरी मामले में राठौड़ को बोलने का हक नहीं होने के बयान पर कहा कि हो सकता है कि मुझे एबीसीडी नहीं आती है, लेकिन वो बताएं कि उनको निष्ठा क्या पाकिस्तान के प्रति है। क्यों वे कह रहे हैं कि हमारे विदेश मंत्री माफी मांगें? उनको बताना होगा कि ऐसा उन्होंने क्यों कहा। हमारे मंत्री ने पाकिस्तान को दलाल देश कहा था, इसमें उनको क्यों तकलीफ हुई। क्या वो पाकिस्तान परस्त हैं ?