पवन खेड़ा के खिलाफ गैर जमानती वारंट से इनकार

 

गुवाहाटी। पवन खेड़ा के खिलाफ गुवाहाटी की एक अदालत ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा उनके पास कई पासपोर्ट और विदेश में संपत्ति होने के आरोपों को लेकर दायर मामले में गैर जमानती वारंट जारी करने के अनुरोध वाली असम पुलिस की याचिका खारिज कर दी है।

कामरूप मेट्रो के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) द्वारा 7 अप्रैल को यह आदेश पारित किया गया था। यह आदेश खेड़ा द्वारा तेलंगाना उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने से एक दिन पहले सुनाया गया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत के आदेश की प्रति रविवार को यहां मीडिया के साथ साझा की गई। सीजेएम ने कहा कि जांच अधिकारी द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी करने के लिए बताए गए आधार पूरी तरह से अनुमानों और अटकलों पर आधारित हैं, और रिकॉर्ड में मौजूद किसी भी सामग्री से समर्थित नहीं हैं। आदेश में कहा गया, “इसके अलावा, चूंकि यह मामला संज्ञेय है और अपराध गैर-जमानती है, इसलिए जांच अधिकारी को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार जांच के उद्देश्य से आवश्यक समझे जाने पर बीएनएसएस की धारा 35 के तहत गिरफ्तारी करने का अधिकार पहले से ही प्राप्त है। मुख्य न्यायिक न्यायाधीश ने कहा कि उपरोक्त के मद्देनजर, गैर-जमानती वारंट जारी करने के अनुरोध को इस स्तर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है और इसलिए इसे अस्वीकार किया जाता है।

खेड़ा के खिलाफ मामला गुवाहाटी अपराध शाखा पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 175 और 318 सहित विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा ने 6 अप्रैल को कांग्रेस नेता और उनके साथ मिलीभगत करने वाले सभी अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।

उन्होंने दावा किया कि खेड़ा द्वारा 5 अप्रैल को नई दिल्ली और गुवाहाटी में आयोजित दो संवाददाता सम्मेलन में लगाए गए आरोप गलत और निराधार हैं। खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिंकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट/गोल्डन कार्ड और विदेश में संपत्ति है, जिसका उल्लेख उनके पति के चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि खेड़ा द्वारा अपने आरोपों के समर्थन में दिखाए गए सभी दस्तावेज फर्जी, छेड़छाड़ किए गए, जाली और गढ़े हुए थे और ये दावे  सार्वजनिक अव्यवस्था और सार्वजनिक संशय पैदा करने के आपराधिक इरादे से किए गए थे,जिससे एक अत्यंत संवेदनशील चुनावी चरण में सार्वजनिक अशांति भड़काने, नागरिकों को गुमराह करने और सार्वजनिक शांति भंग करने की आशंका थी।

खेड़ा को तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 10 अप्रैल को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी। हालांकि, पिछले सप्ताह उच्चतम न्यायालय ने असम सरकार की याचिका पर गौर करते हुए इस मामले में उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी। उच्चतम न्यायालय ने खेड़ा की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने रिंकी भुइयां सरमा द्वारा उनके खिलाफ दायर मामले में 20 अप्रैल तक गिरफ्तारी से सुरक्षा का अनुरोध किया था।

उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस नेता को इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए असम की सक्षम अदालत में याचिका दायर करने को कहा था और स्पष्ट किया था कि वहां की अदालत उनकी याचिका पर तेलंगाना उच्च न्यायालय और उसके द्वारा की गई किसी भी प्रतिकूल टिप्पणी पर ध्यान दिए बिना सुनवाई करेगी।

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