केंद्रीय मंत्री सरेआम कर्मचारियों को धमकी दे रहे है,सरकार मुंह में दही जमाकर बैठी है

संविधान के अनुसार चलने वालों का कवच है टीकाराम जूली , किसी की भी धमकियों से न डरें राज्य कर्मचारी : टीकाराम जूली ,नेता प्रतिपक्ष राजस्थान विधानसभा

– प्रदेश में सरकार दीया लेकर ढूंढने से भी नहीं मिल रही,जंगलराज चल रहा
– पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव टालने के लिए सरकार नए-नए बहाने खोज रही है

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश की चरमराती प्रशासनिक व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि राजस्थान में ‘सिस्टम का पूर्ण ब्रेकडाउन’ हो चुका है। सरकार की निष्क्रियता पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि आज हालात ऐसे हैं कि दीया लेकर ढूंढने पर भी सरकार कहीं नजर नहीं आती। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदेश में निर्वाचित सरकार का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है।
जूली ने कहा कि यह राजस्थान का दुर्भाग्य है कि वर्तमान भाजपा सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होने के बजाय केवल दिल्ली दरबार के ‘एक्सटेंशन काउंटर’ की भूमिका निभा रही है।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा राज्य कर्मचारियों को दी गई धमकी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “एक केंद्रीय मंत्री सरेआम कर्मचारियों का भविष्य बर्बाद करने की धमकी दे रहे हैं और राज्य सरकार मुंह में दही जमाकर बैठी है। यह चुप्पी न केवल कायरतापूर्ण है, बल्कि प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के हितों के साथ विश्वासघात है, कोई बीस साल का पट्टा लिखा कर नहीं लाया है ,लोकतंत्र में जनता ही माई-बाप होती है।”
कर्मचारियों का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि”कर्मचारी किसी व्यक्ति या दल के गुलाम नहीं, बल्कि संविधान के सजग प्रहरी हैं। व्यक्ति आते-जाते रहते हैं, लेकिन देश संविधान से चलता है। मैं आश्वस्त करता हूं कि बिना डरे अपना काम करें, जो संविधान के साथ चलेगा, टीकाराम जूली उसके लिए ‘मजबूत कवच’ बनकर खड़ा रहेगा।”

जूली ने सरकार पर स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों से भागने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण आयोग का कार्यकाल 31 मार्च को समाप्त हो रहा है, लेकिन सरकार चुनाव टालने के लिए नए-नए बहाने खोज रही है।
सुप्रीम कोर्ट के ‘किशनसिंह तोमर बनाम म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ अहमदाबाद (2006)’ मामले का हवाला देते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि शीर्ष अदालत के आदेशानुसार चुनाव समय पर कराना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “इनकी मानसिकता पूरी तरह तानाशाही है। ये सत्ता का केंद्रीकरण कर लोकतंत्र की जड़ें काटना चाहते हैं, जिससे प्रदेश में एक बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है।”

कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि स्वयं मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग होने के बावजूद अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। जोधपुर के भीकमकोर में दिनदहाड़े हुई हत्या इसका जीवंत प्रमाण है। प्रदेश में कानून का इकबाल खत्म हो चुका है।

विकास कार्यों के मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। जयपुर के कांवटिया अस्पताल के विस्तार और नए ट्रॉमा सेंटर का प्रस्ताव पिछले दो वर्षों से फाइलों में दम तोड़ रहा है। वहीं जयपुर मेट्रो फेज-2 की फाइनल डीपीआर पिछले नौ महीनों से केंद्र सरकार के पास लंबित पड़ी धूल खा रही है। इससे साफ है कि राज्य और केंद्र के बीच समन्वय का अभाव है और जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

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