पुलिस कमिश्नर से मुलाकात, लिखित में बात, धरना-प्रदर्शन समाप्त

जयपुर। एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला के साथ दिल्ली की पुलिसकर्मी की ओर से की गई मारपीट और अभद्रता के मामले में जीरो एफआईआर लिखने की मांग पर चल रहे धरना- प्रदर्शन में पहली बार जयपुर पुलिस कमिश्नर पहुंचे और उन्होंने जीरो एफआईआर लिखित में फिर दर्ज नहीं करने के कारण बताए।

पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल ने बुधवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को लिखित पत्र सौंपकर एफआईआर दर्ज नहीं करने के कारण बताए। इसके बाद कांग्रेस ने तीन दिन से चल रहा धरना खत्म कर दिया और अब इस मामले में अदालत जाने का ऐलान किया।
कांग्रेस की ओर से 3 दिन से चल रहे धरने में बुधवार सुबह करीब 10.30 बजे पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल कमिश्नरेट के कमरा नंबर 9 में धरने पर बैठे डोटासरा और दूसरे नेताओं से मिलने पहुंचे। करीब 11.30 बजे दो पुलिस अधिकारी आयुक्त का जवाब लेकर डोटासरा से मिले, और दोपहर करीब 12.30 बजे आयुक्त ने डोटासरा को लिखित पत्र सौंपा, जिसमें जीरो एफआईआर दर्ज नहीं करने के कारण बताए गए हैं।

पत्र में दिए गए कारणों का पूरा ब्योरा अभी सामने नहीं आया है। जयपुर पुलिस मंगलवार को प्रेस नोट में कह चुकी थी कि इस घटना को लेकर दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में एफआईआर 291/2026 पहले से दर्ज है और रितु बराला की शिकायत भी उसी में शामिल कर जांच की जा रही है, इसलिए उन्हीं तथ्यों पर जयपुर में अलग एफआईआर दर्ज करना विधिसम्मत नहीं माना गया।

धरना समाप्त कर कमिश्नरेट से बाहर आने के बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि पुलिस आयुक्त ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया है, इसलिए कांग्रेस अब न्यायालय की शरण लेगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए भी कानूनी कदम उठाए जाएंगे। रितु बराला ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने इसे सत्ता की विफलता बताया।
धरना खत्म होने के बाद नेता कमिश्नरेट से बाहर निकले तो कार्यकर्ताओं ने डोटासरा के समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए। डोटासरा ने उन्हें अपने नाम के नारे लगाने से रोका और इशारा करते हुए कहा कि केवल राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगाए जाएं। कांग्रेस के मुताबिक राहुल गांधी ने ही डोटासरा को फोन कर जयपुर में एफआईआर दर्ज कराने को कहा था।

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