जयपुर। राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव से पहले राज्य सरकार को मिली ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ओबीसी आरक्षण बढ़ाने की बजाए ओबीसी जातियों को आपस में लड़ाने का काम कर रही है।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में ओबीसी विभाग की प्रदेश कार्यकारिणी और जिलाध्यक्षों की बैठक के दौरान मीडिया से बात करते हुए डोटासरा ने कहा कि जो रिपोर्ट तीन महीने में आ जानी चाहिए थी, उसे आने में करीब डेढ़ साल लग गया। डोटासरा ने सवाल उठाया कि सरकार कह रही है कि रिपोर्ट में क्या है, इसकी जानकारी किसी को नहीं है, लेकिन अखबारों में रोजाना रिपोर्ट के आंकड़े कैसे प्रकाशित हो रहे हैं? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार इतनी ‘लीक’ है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट भी लीक हो गई। सरकार को बताना चाहिए कि आयोग ने ओबीसी की आबादी का आंकलन किया है या प्रदेश में जातिगत जनगणना की है।
डोटासरा ने कहा कि रोजाना अलग-अलग जातियों की आबादी के आंकड़े सामने आ रहे हैं। कहीं ओबीसी आबादी 55 प्रतिशत बताई जा रही है तो कहीं अलग-अलग जातियों की संख्या को लेकर दावे किए जा रहे हैं। यदि ओबीसी की आबादी 55 प्रतिशत है तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरक्षण अभी भी 21 प्रतिशत ही क्यों है? क्या सरकार ओबीसी आरक्षण को 21 प्रतिशत से बढ़ाएगी या नहीं ?
डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार का उद्देश्य ओबीसी का आरक्षण बढ़ाना नहीं है,ओबीसी की अलग-अलग जातियों को आंकड़ों के नाम पर आपस में लड़ाने की कोशिश की जा रही है। पीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तीन महीने में आनी थी, लेकिन इसमें करीब डेढ़ साल लग गया। इस दौरान पंचायत और निकाय चुनाव भी समय पर नहीं हो सके। कई जगह चुने हुए जनप्रतिनिधियों की जगह प्रशासक बैठा दिए गए। प्रशासकों के जरिए ब्यूरोक्रेट्स को अधिकार दिए गए और चुने हुए जनप्रतिनिधियों को घर बैठना पड़ा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आने के बाद मुख्यमंत्री दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व से पूछ रहे हैं कि रिपोर्ट का क्या करना है और इसे किस तरह लागू करना है। उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति क्या होगी कि प्रदेश से जुड़ी रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री खुद निर्णय नहीं ले पा रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली से निर्देश लेने के बावजूद सरकार अब तक कोई स्पष्ट फैसला नहीं कर पाई है।
निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर डोटासरा ने कहा कि प्रदेश में चर्चा है कि 13 या 14 अगस्त को आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट सरकारी आदेश सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि जब 21 प्रतिशत आरक्षण पहले से लागू है तो नई रिपोर्ट के बाद ओबीसी के हिस्से में बढ़ोतरी होनी चाहिए या नहीं, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। यदि ओबीसी आबादी 55 प्रतिशत के आसपास है तो 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा को हटाने पर भी सरकार को विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसका फायदा सिर्फ ओबीसी को ही नहीं, बल्कि एससी-एसटी समेत अन्य वर्गों को भी मिल सकता है।
बीजेपी सरकार के ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के दावे पर भी सवाल उठाते हुए डोटासरा ने कहा कि यदि विधानसभा चुनाव 2028 में होने हैं और उन्हें लोकसभा चुनाव के साथ कराने की बात हो रही है तो इसे वन स्टेट, वन इलेक्शन कैसे कहा जा सकता है ? उन्होंने पूछा कि इसके लिए कौन सा कानून बनाया गया है ? क्या संसद से कोई कानून पारित हुआ है ? यदि नहीं तो सरकार केवल बयानबाजी क्यों कर रही है ? भरतपुर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां करीब ढाई साल से जिला प्रमुख का पद खाली है। जिला प्रमुख का चुनाव नहीं कराया गया और चुनाव जीत चुके उप जिला प्रमुख को भी अब तक चार्ज नहीं दिया गया, जिला कलेक्टर को प्रशासक बना दिया गया है।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की प्राथमिकता जनता की समस्याएं नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में बने रहने के लिए राजनीतिक खरीद-फरोख्त से लेकर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई तक का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए अलग-अलग मुद्दे उछाल रही है, लेकिन अब जनता सब समझ चुकी है और आने वाले चुनाव में इसका जवाब देगी।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार यह नहीं बता रही कि रिपोर्ट में वास्तव में क्या है, लेकिन मीडिया में रिपोर्ट को लेकर अलग-अलग आंकड़े और दावे लगातार सामने आ रहे हैं। मीडिया में ये आंकड़े आखिर कौन जारी कर रहा है ? उन्होंने आशंका जताई कि कहीं रिपोर्ट के आंकड़ों के जरिए ओबीसी की जातियों को ही आपस में लड़ाने की कोशिश तो नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस दिन कैबिनेट की बैठक में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आई थी, उसी दिन सरकार से मांग की गई थी कि इसे सार्वजनिक किया जाए और जनता को बताया जाए कि रिपोर्ट में क्या है।
जूली ने कहा कि रिपोर्ट आने में पहले ही काफी देरी की गई, अब यदि रिपोर्ट में कोई कमी या खामी नहीं है तो उसे सार्वजनिक करने में सरकार को डर किस बात का है ? उन्होंने कहा कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं बल्कि प्रदेश के लोगों के अधिकारों को मजबूत करने के लिए बनी है, इसलिए जनता को जानने का पूरा अधिकार है कि आयोग ने क्या पाया और सरकार आगे क्या करने जा रही है।
इसी के साथ डांगावास प्रकरण को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि इस मामले में छह लोगों की हत्या हुई, जिनमें पांच दलित थे। जिस बेरहमी से उन्हें मारा गया, वह बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन लोगों की हत्या किसने की ? सरकार की जिम्मेदारी है कि पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी हो और उन्हें न्याय दिलाए। यदि छह लोगों की हत्या हो गई और अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि हत्या किसने की, तो यह कानून-व्यवस्था और जांच व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि मामले की जांच सीबीआई कर रही है, यदि सीबीआई जांच में भी यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि हत्या के लिए जिम्मेदार कौन हैं, तो यह और भी गंभीर स्थिति है। सरकार को गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए मजबूती से पैरवी करनी चाहिए। इससे पहले प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कांग्रेस ओबीसी विभाग की बैठक में ओबीसी वर्ग की सामाजिक राजनीतिक और आर्थिक स्थिति पर चर्चा की गई साथ ही आगामी निकाय और पंचायत चुनाव में कांग्रेस पार्टी से ओबीसी वर्ग को ज्यादा से ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई।