किसानों के खातेदारी अधिकारों पर विधायक डूंगरराम गेदर के तीखे सवाल

सदन में मंत्री संतोषजनक जवाब देने में विफल — सूरतगढ़ के 2650 किसानों के खातेदारी अधिकारों पर विधायक डूंगरराम गेदर के तीखे सवाल

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में सूरतगढ़ विधायक डूंगरराम गेदर ने नियम 131 के तहत सूरतगढ़ क्षेत्र में भूमि आवंटन की मूल पत्रावलियों और नक्शों के गायब होने का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड के अभाव में हजारों किसान खातेदारी अधिकार, बैंक ऋण, फसल बीमा और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से प्रभावित हो रहे हैं।

सरकार की ओर से मंत्री ने अपने जवाब में स्वीकार किया कि सूरतगढ़ तहसील के कई गांवों में रिकॉर्ड एवं नक्शों की स्थिति में गंभीर विसंगतियाँ हैं। करडू, भगवानवाला, सूरतगढ़ रोही, रघुनाथपुरा रोही आदि क्षेत्रों के नक्शे कटे-फटे और अपठनीय हैं, जबकि कई स्थानों पर रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर पाया गया है। सर्वे, रि-सर्वे, चकबंदी और 1-2-1 मैपिंग की प्रक्रियाएँ लंबित होने से किसानों को खातेदारी अधिकार मिलने में देरी हो रही है। इससे राजस्व अभिलेखों के संरक्षण एवं प्रबंधन में गंभीर लापरवाही उजागर होती है।

विधायक डूंगरराम गेदर ने सदन में यह तथ्य भी रखा कि सरकार स्वयं पूर्व में स्वीकार कर चुकी है कि सूरतगढ़ तहसील में 2650 प्रकरणों में खातेदारी जारी करना शेष है। पिछले लगभग 30 वर्षों में नई भूमि आवंटित नहीं होने के बावजूद इतने पुराने मामलों का लंबित रहना प्रशासनिक विफलता का स्पष्ट प्रमाण है। जब उन्होंने पूछा कि ये 2650 प्रकरण किन गांवों के हैं और खातेदारी क्यों नहीं दी जा रही, तो मंत्री स्पष्ट एवं तथ्यात्मक उत्तर देने में असफल रहे।

उन्होंने यह भी बताया कि जमीनी स्तर पर किसानों को मूल पत्रावलियों के अभाव का हवाला देकर खातेदारी से वंचित किया जा रहा है। हरिसिंह पुत्र चंद्र सिंह जाट तथा भागीरथ पुत्र धोकलराम मेघवाल जैसे किसानों के मामले इस समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं। यह स्थिति किसानों को आर्थिक एवं कानूनी असुरक्षा की ओर धकेल रही है।

विधायक सूरतगढ़ ने सरकार से मांग की है कि 2650 लंबित प्रकरणों का क्षेत्रवार विवरण सार्वजनिक किया जाए, मूल पत्रावलियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा समयबद्ध योजना बनाकर किसानों को खातेदारी अधिकार प्रदान किए जाएँ। सूरतगढ़ के किसानों को अब आश्वासन नहीं, बल्कि न्याय चाहिए।

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