पुरानी घोषणाएं धूल फांक रहीं, बुधवार को फिर होगी जुमलों की बौछार; भाजपा का बजट केवल आंकड़ों का मायाजाल: टीकाराम जूली
जयपुर । राजस्थान विधानसभा में बुधवार को पेश होने वाले राज्य बजट से पूर्व नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए जूली ने सरकार के पिछले वादों का ‘रियलिटी चेक’ किया और वर्तमान शासन को “विकास विरोधी व हेडलाइन प्रेमी” करार दिया।
घोषणाओं का रिपोर्ट कार्ड:* 26% कार्यों को अब तक हाथ भी नहीं लगाया
नेता प्रतिपक्ष ने ठोस आंकड़ों के साथ सरकार को घेरते हुए बताया कि विज्ञापन और दावों के शोर के बीच धरातल पूरी तरह खाली है।
*कुल घोषणाएं: 2717*
*पूर्ण कार्य: मात्र 754*
*शून्य प्रगति: 707 घोषणाएं (26.02%) ऐसी हैं जिन्हें सरकार ने दो साल बीतने के बावजूद छुआ तक नहीं है।*
जूली ने सवाल उठाया, “जब पिछली घोषणाओं का धरातल पर अस्तित्व ही नहीं है, तो नए बजट का क्या औचित्य? यह बजट प्रदेश के विकास का दस्तावेज नहीं, बल्कि भाजपा की विफलता को छिपाने का ‘आंकड़ों वाला पर्दा’ होगा।”
*”मुख्यमंत्री की नाक के नीचे विकास का पहिया जाम”*
सरकार की प्रशासनिक सुस्ती पर प्रहार करते हुए जूली ने उदाहरण दिया कि जयपुर के सिविल लाइन्स का फ्लाईओवर आज भी अधूरा है, जबकि इसी मार्ग से मुख्यमंत्री का काफिला प्रतिदिन गुजरता है।
“जो सरकार अपनी आंखों के सामने चल रहे प्रोजेक्ट्स पूरे नहीं करा सकती, वह प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों में विकास क्या खाक करेगी? सहकार मार्ग फ्लाईओवर की घोषणा तो केवल कागजी पुल बनकर रह गई है।”
*रिफाइनरी और इलेक्ट्रिक बसें: वादों की ‘एक्सपायरी डेट’ निकली*
जूली ने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की लेटलतीफी पर तंज कसते हुए कहा:
*बाड़मेर रिफाइनरी:* भाजपा ने इसे ‘बीरबल की खिचड़ी’ बना दिया है। दिसंबर 2024 की डेडलाइन को बढ़ाकर अगस्त 2025 किया गया, लेकिन आज फरवरी 2026 तक भी लोकार्पण का कोई अता-पता नहीं है।
*इलेक्ट्रिक बसें:* 2024 में प्रदेश को 1000 इलेक्ट्रिक बसें देने का वादा किया गया था। दो साल बीत गए, लेकिन सड़कों पर एक भी नई बस नहीं उतरी। जनता आज भी धुआं उगलती खटारा बसों में सफर को मजबूर है।
*जनता देख रही है ‘आंकड़ों की बाजीगरी’*
नेता प्रतिपक्ष ने आगाह किया कि कल पेश होने वाला बजट भी लुभावने जुमलों और झूठी उम्मीदों का अंबार होगा। सरकार अपनी परफॉरमेंस रिपोर्ट (जो कि शून्य है) को छिपाने के लिए फिर से भारी-भरकम शब्दजाल बुनेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्थान की जागरूक जनता अब इन छलावों में आने वाली नहीं है और सरकार से पिछले दो वर्षों का हिसाब मांग रही है।