मुख्यमंत्री का कांग्रेस पर हमला, विपक्ष में सुनने का माद्दा नहीं

 

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में शनिवार को वर्तमान भाजपा सरकार के 2 साल बनाम पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार के 5 साल के कार्यकाल की तुलना को लेकर सदन में जोरदार हंगामा रहा। इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जैसे ही सरकार के दो वर्षों की उपलब्धियां गिनाने खड़े हुए, कांग्रेस विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। नारेबाजी के बीच सदन की कार्यवाही पांच बार स्थगित हुई। हंगामे के दौरान मुख्यमंत्री ने बोलना जारी रखा और संकल्प पत्र के 73 फीसदी वादे पूरे करने का दावा किया। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को ‘जीरो’ बताते हुए तुलनात्मक पुस्तिका भी पेश की। इससे नाराज कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि विपक्ष के पास सुनने का माद्दा नहीं है और वह आपसी लड़ाई में उलझा हुआ है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि उनकी सरकार ने अपने दो वर्षों के कार्यकाल में जनकल्याण और विकास के कार्य प्रदेशहित में किए हैं और पहली बार सदन में 2 साल का रिपोर्ट कार्ड रखकर सार्थक चर्चा का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2023 के संकल्प पत्र के 392 बिंदुओं में से 285 बिंदुओं यानी 73 प्रतिशत पर क्रियान्वयन कर लिया है। सीएम ने सदन की अनुमति से एक पुस्तिका भी पेश की, जिसमें वर्तमान सरकार के दो साल के कार्यकाल और पूर्ववर्ती सरकार के पांच साल के कार्यकाल की उपलब्धियों का तुलनात्मक विवरण दिया गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं ने जब इस पुस्तिका को पढ़ा तो उनकी ही सरकार की ‘किरकिरी’ सामने आ गई।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि कांग्रेस के पांच साल के कार्यकाल में ‘जीरो काम’ हुए, जबकि उनकी सरकार ने दो वर्षों में ही प्रदेश के विकास को नई दिशा दी है। सदन में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने संकल्प पत्र के अधिकांश वादों पर तेजी से अमल किया है और जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारा है। उन्होंने दावा किया कि बुनियादी ढांचे, सामाजिक सुरक्षा और निवेश के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम कर रही है और पहली बार दो साल का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड सदन में रखा गया है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष मुद्दाविहीन है और केवल हंगामा कर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर काम कर रही है, जो कांग्रेस को रास नहीं आ रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष मुद्दाविहीन है और यदि पिछली सरकार ने समय रहते काम किया होता तो आज सदन में मजबूती से अपनी बात रख पाती। सीएम ने कहा कि कांग्रेस चाहे तो केवल 5 साल ही नहीं, अपने 15 साल के कार्यकाल पर भी सदन में चर्चा करा ले। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को स्वयं सदन में आकर अपनी सरकार के कामकाज का पक्ष रखना चाहिए था, लेकिन विपक्ष की ओर से ठोस जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्ष 2024-25 में सरकार ने 1277 घोषणाएं की हैं और ‘पालनहार योजना’ में पिछली सरकार की तुलना में दोगुना बजट दो वर्षों में खर्च किया गया है।

सरकार के दावों पर कांग्रेस विधायकों ने तीखा विरोध दर्ज कराया। इस दौरान हंगामे और नारेबाजी के बीच कार्यवाही बाधित हुई। बाद में मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान ही कांग्रेस के विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। कांग्रेस के वॉकआउट पर मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के नेताओं में सुनने का माद्दा नहीं है, इसलिए वे सदन से वॉकआउट करके चले गए। इससे पहले भी बजट सत्र और राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो चुकी है। कांग्रेस लगातार बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर सरकार को घेरती रही है, जबकि भाजपा सरकार पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन के कार्यकाल की तुलना कर अपनी उपलब्धियां गिनाती रही है।

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