जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में प्रत्येक माह के दो शनिवार को कार्यदिवस घोषित किए जाने के फैसले को लेकर उपजे विवाद पर अब औपचारिक स्तर पर मंथन शुरू हो गया है।
मंगलवार को हाईकोर्ट बार पदाधिकारियों के साथ हुई लंबी बैठक के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने इस पूरे मामले की समीक्षा के लिए न्यायाधीशों की एक कमेटी गठित करने की घोषणा की है।
बैठक के कुछ देर बाद ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी किए गए एक आदेश के अनुसार हाईकोर्ट के 5 जजों की कमेटी गठित करने की जानकारी दी गयी.
इस कमेटी में राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस समीर जैन, जस्टिस कुलदीप माथुर, जसिअस अनिल कुमार उपमन, जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित, जस्टिस सुनील बेनीवाल शामिल हैं.
यह कमेटी 21 जनवरी को अपनी रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर, राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन जोधपुर और राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन जोधपुर के पदाधिकारियों ने मंगलवार शाम कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा से करीब डेढ़ घंटे तक बैठक की।
इस बैठक में राजस्थान बार काउंसिल के चेयरमैन भुवनेश शर्मा और वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद पुरोहित भी शामिल रहे। बैठक का प्रमुख एजेंडा हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा जारी कैलेंडर में प्रत्येक माह दो शनिवार को कार्यदिवस घोषित करने के निर्णय को वापस लेने की मांग था।
मंगलवार शाम लगभग 4.30 बजे शुरू हुई इस बैठक में बार पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि शनिवार को कार्यदिवस घोषित करने से अधिवक्ताओं को गंभीर व्यावहारिक और पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
जस्टिस वी.एस. मलीमत कमेटी की सिफारिशें
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल और महासचिव दीपेश शर्मा ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को बताया कि शनिवार को कार्यदिवस होने से न केवल वकीलों का पारिवारिक जीवन प्रभावित होगा, बल्कि पक्षकारों से संवाद और केस की तैयारी में भी दिक्कतें आएंगी।
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने बैठक में यह भी तर्क रखा कि जस्टिस वी.एस. मलीमत कमेटी की सिफारिशों के अनुसार हाईकोर्ट के लिए वर्ष में 210 कार्यदिवस निर्धारित हैं और इसमें किसी भी प्रकार के बदलाव के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक है। ऐसे में बिना व्यापक परामर्श के शनिवार कार्यदिवस घोषित करना नियमों की भावना के विपरीत है।
राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन जोधपुर के अध्यक्ष दिलीप सिंह उदावत ने इस निर्णय को “बिना बार से परामर्श लिया गया एकतरफा फैसला” बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की।