स्वास्थ्य विभाग से आगामी सत्र में लेंगे पाई-पाई का हिसाब
सरकार को देना होगा बदहाली पर जवाब: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली
जयपुर । 06 अगस्त 2026। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री टीकाराम जूली ने प्रदेश के जर्जर और बदहाल स्वास्थ्य ढाँचे को लेकर राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आम जनता इलाज और जीवन रक्षा की उम्मीद में अस्पताल जाती है, लेकिन राजस्थान में अस्पताल ही जनता के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।
सुजानगढ़ स्थित मातृ एवं शिशु अस्पताल का बरामदा गिरने से एक महिला के गंभीर रूप से घायल होने की घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए श्री जूली ने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में कांग्रेस पार्टी इस बदहाली पर सरकार को पूरी तरह घेरेगी और सीधा सवाल पूछेगी कि क्या राजस्थान में आम इंसान की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है?
*सरकारी उपेक्षा और लापरवाही का परिणाम :*
नेता प्रतिपक्ष श्री टीकाराम जूली ने कहा कि सुजानगढ़ अस्पताल में हुआ हादसा कोई सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि मौजूदा सरकार की लापरवाही और प्रशासनिक निकम्मेपन का प्रत्यक्ष प्रमाण है। प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्थाएँ पूरी तरह पटरी से उतर चुकी हैं। आम जनता इलाज कराने अस्पताल पहुँच रही है, लेकिन जर्जर इमारतों के कारण उनकी जान जोखिम में पड़ी हुई है। ऐसी संवेदनहीन और भ्रष्ट व्यवस्था प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे पर एक गंभीर सवालिया निशान खड़ी करती है।
*जर्जर इमारतों से मंडराता खतरा और सरकार का अहंकार :*
श्री जूली ने प्रदेश भर में ढांचागत व्यवस्थाओं के चरमराने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केवल अस्पताल ही नहीं, बल्कि प्रदेश भर में हजारों विद्यालय भवनों सहित कई सरकारी इमारतें अत्यंत जर्जर और अत्यंत दयनीय अवस्था में हैं।
आए दिन छतें और बरामदे ढहने की घटनाएँ सामने आ रही हैं, लेकिन सत्ता के अहंकार में डूबी भाजपा सरकार पूरी तरह कुंभकर्णी नींद में सो रही है। नए विकास कार्य करवाना तो दूर, यह नाकारा सरकार पहले से बने बुनियादी ढाँचे और जनसुविधाओं को सुरक्षित रखने में भी पूरी तरह विफल साबित हुई है। कागज़ों में विकास और भाषणों में झूठी उपलब्धियों का ढोल पीटने वाली सरकार की असलियत धरातल पर गिरती इमारतें बयां कर रही हैं।
*विधानसभा में अनुत्तरित प्रश्न, जवाबदेही से भागती सरकार :*
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनवरी सेमार्च तक चले बजट सत्र के दौरान कई विधायकों ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण सवाल पूछे थे। अत्यंत शर्मनाक बात यह है कि सत्र के दौरान और सत्र समाप्त होने के इतने समय बाद भी विभाग द्वारा उन सवालों के जवाब नहीं दिए गए हैं। वर्तमान में मेडिकल डिपार्टमेंट से जुड़े 200 से अधिक सवालों के जवाब लंबित पड़े हैं। यह दर्शाता है कि सरकार न तो जनता के प्रति जवाबदेह है और न ही जनप्रतिनिधियों के सवालों का सामना करने की हिम्मत रखती है। आगामी विधानसभा सत्र में जनहित के इन मुद्दों पर सरकार से पाई-पाई का हिसाब माँगा जाएगा।