मुंबई। उद्धव ठाकरे ने शिवाजी पार्क में एक रैली के दौरान सोनम बांगचुक के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि “धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एक मामूली बात है। असली लड़ाई उस सरकार को बदलने की होनी चाहिए जो लोगों को आजीविका देने में नाकाम रहती है। ”
नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर रद्द होने के बाद आत्महत्याओं के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को भूख हड़ताल से दिल्ली पुलिस की ओर जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराने पर उद्धव ठाकरे ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “यह सरकार न तो नौकरी देती है और न ही शिक्षा। इसलिए, इस निकम्मी सरकार को बदला जाना चाहिए। मैं यहां आपका नेतृत्व करने नहीं आया हूं, बल्कि आप सभी को खुद नेता बनना होगा- इसीलिए मैं यहां आया हूं। आज जो आग मैं आपमें देख रहा हूं, वह सरकार बदलने तक जलती रहनी चाहिए। इस तानाशाह सरकार को उस आग में जलकर राख हो जाना चाहिए। इन लोगों ने आपका भविष्य चुरा लिया है।”
उद्धव ठाकरे ने मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल के दौरान अन्ना हजारे की भूख हड़ताल को याद करते हुए कहा कि जब अन्ना हजारे भूख हड़ताल पर बैठे थे, तो उसे देश भर में बड़े पैमाने पर प्रचार मिला था। उस समय किसी ने उन्हें गद्दार या चीन का एजेंट नहीं कहा था। इसके विपरीत, तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने अन्ना हजारे के साथ सम्मानजनक चर्चा की थी। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आज की सरकार दमन का सहारा ले रही है।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि भले ही आप वांगचुक के विरोध प्रदर्शन को चादर से ढकने की कोशिश करें, लेकिन सच को छिपाया नहीं जा सकता। आपके पापों का घड़ा भर चुका है। सरकार ‘एक देश, एक चुनाव’ लागू करना चाहती है। सरकार अब वास्तव में ‘एक देश, एक चुनाव’ लागू करके खुद को साबित करके दिखाए।
उद्धव ठाकरे ने सवाल किया कि सोनम वांगचुक ने इस देश को क्या दिया है? और इस निकम्मी सरकार ने देश को क्या दिया है? इस पर एक बार हमेशा के लिए हिसाब-किताब हो ही जाना चाहिए। वांगचुक ने बर्फ के बीच देश की रक्षा करने वाले हमारे जवानों के लिए ‘सोलर टेंट’ बनाए। उन्होंने लद्दाख में पानी की भारी किल्लत के समय मदद पहुंचाई। इसके बावजूद, यही सरकार आज सोनम वांगचुक को गद्दार और चीन का एजेंट बता रही है।
आरएसएस के होसाबले की ओर से भारत को पाकिस्तान से बात करनी चाहिए वाले बयान और इससे मोहन भागवत के सहमत होने पर तंज कसते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा- “एक ऐसा देश जो हमारे जवानों की जान लेना चाहता है, लेकिन सरकार एक ऐसे व्यक्ति से बातचीत करने को तैयार नहीं है जो हमारी सेना और देश के लिए दिन-रात काम करता है। आज देश में जो कुछ भी हो रहा है, क्या वह सच में एक ‘हिंदू राष्ट्र’ है?”