जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर पंचायत राज और निकाय चुनाव नहीं करने को लेकर निशाना साधा है
सोशल मीडिया पोस्ट पर डोटासरा ने लिखा है कि राजस्थान में भाजपा सरकार की हठधर्मिता और अलोकतांत्रिक नीतियां अब प्रदेश के विकास में अड़चन डालने का काम कर रही हैं। इस प्रदेश का दुर्भाग्य कहा जा सकता है कि जनता को ऐसा मुखिया, मिला है जिसने प्रदेश में लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने के बजाय उन्हें कमजोर करने का बीड़ा उठाया है। हमारे लोकतांत्रिक देश में चुनाव टालना जनता के अधिकारों का हनन है। जो प्रदेश में भाजपा सरकार बीते 1 साल से कर रही है।
उच्च न्यायालय द्वारा सरकार को नगर निकाय एवं पंचायतीराज चुनाव कराने के लिए 15 अप्रैल तक की डेडलाइन दी गई थी, लेकिन इस समयसीमा के अंदर चुनाव कराने में सरकार पूरी तरह से विफल साबित हुई है। सरकार द्वारा उच्च न्यायालय में एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है जो महज चुनाव टाले जाने का एक बहाना मात्र हैं। प्रार्थना पत्र में सरकार द्वारा उल्लेखित 8 आधार पूरी तरह से तर्कहीन और अपनी जवाबदेही से बचने का जरिया मात्र है।
देश संविधान से चलता है और संविधान को मानना ही हम सभी की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए लेकिन भाजपा सरकार द्वारा हर बार संविधान की अवहेलना की जाती रही है। संविधान में उल्लेखित अनुच्छेद 243E और 243U स्पष्ट करते हैं कि पंचायतीराज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनाव समय पर कराया जाना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
डोटासरा ने पोस्ट में लिखा कि सरकार कहती है कि कर्मचारियों की कमी है। हम पूछना चाहते हैं क्या सरकार कोई नई भर्ती करने जा रही है, जिससे एक-दो लाख कर्मचारियों की व्यवस्था इन 2-4 महीनों में हो जाएगी? सच तो यह है कि सरकार ना ही कोई नई भर्तियां निकाल पा रही है ना ही लंबित चल रही भर्तियों के जरिए रिक्त पदों को भर पा रही है। जब हर चुनाव में यही सरकारी मशीनरी काम करती आ रही है, तो आज अचानक संसाधनों की कमी कैसे हो गई?
शिक्षा सत्र का हवाला देकर सरकार स्वयं की नीयत पर सवाल खड़े कर रही है। देश में लोकसभा चुनाव भीषण गर्मी में होते हैं, विधानसभा चुनाव कड़ाके की सर्दी में भी कराए जाते हैं, और कई बार शैक्षणिक सत्र के बीच में भी चुनाव संपन्न होते हैं। फिर स्थानीय निकाय चुनावों के लिए ही यह बाधा क्यों? क्या पंचायतीराज और निकाय चुनाव ही इतने भारी हो गए कि पूरा शिक्षा तंत्र चरमरा जाएगा?
डोटासरा का मानना है कि सरकार द्वारा गर्मी, लू और मानसून का हवाला देना पूरी तरह से तर्कहीन और हास्यास्पद है। क्या अब देश में मौसम देखकर चुनाव होने लगेंगे? अगर ऐसा होता, तो देश में कभी भी चुनाव समय पर नहीं हो पाते। इस देश ने हर मौसम में लोकतांत्रिक परंपरा को निभाया है।
OBC आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण प्रक्रिया के मुद्दे को सरकार द्वारा महज़ मोहरा बनाया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय ने कई बार स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबित किया जाना संविधान की अवहेलना है।
सरकार सिर्फ और सिर्फ चुनाव से बचना चाहती है, क्योंकि उसे जनता का सामना करने का साहस नहीं है। यह लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है और कांग्रेस पार्टी इसका पुरजोर विरोध करती है।
डोटासरा ने लिखा कि हम माननीय उच्च न्यायालय से निवेदन करते हैं कि वह संविधान की मूल भावना और अनुच्छेद 243E एवं 243U की बाध्यता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को समय पर चुनाव कराने के लिए बाध्य करे, ताकि लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत किया जा सके।
न्यायालय इस बात पर भी गौर करे कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने कोरोनाकाल में भी चुनावी प्रक्रिया को थमने नहीं दिया। सीमित संसाधनों और सख्त गाइडलाइंस के बावजूद चुनाव सफलतापूर्वक कराए गए। यदि कोरोना महामारी जैसी विषम परिस्थिति में भी चुनाव कराए जा सकते हैं, तो अब सामान्य परिस्थितियों में सरकार चुनाव कराने से क्यों पीछे हट रही है।