सरकारी गवाह बन जाएं ज्ञानेश कुमार, वर्ना राष्ट्रद्रोह का मुकदमा झेलने को तैयार रहें

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बोले – चुनाव आयोग ने कोर्ट को गुमराह किया

नई दिल्ली/ बेंगलुरु। देश में मुख्य चुनाव आयुक्त की (CEC) मुश्किलें बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस वी. गोपाल गौड़ा ने कहा है कि देश में लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण पर दिए गए हालिया फैसले को गैर-कानूनी और असंवैधानिक करार देते हुए मांग करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत को खुद संज्ञान लेकर अपने इस फैसले को तुरंत वापस लेना चाहिए।

पूर्व न्यायमूर्ति ने आरोप लगाया कि यह फैसला भारत के चुनाव आयोग की ओर से तथ्यों को गलत तरीके से पेश करके और कोर्ट को गुमराह करके की गई धोखाधड़ी का नतीजा था। बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में वोट चोरी के खिलाफ आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व जज जस्टिस गोपाल गौड़ा ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने कोर्ट के सामने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करके यह फैसला हासिल किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने अदालत से धोखेबाजी की है।

जस्टिस गौड़ा ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट को चुनाव आयोग के सभी संबंधित रिकॉर्ड मंगाकर यह जांच करनी चाहिए कि क्या एसआईआर का निर्णय पूरे चुनाव आयोग की बहुमत से दी गई सहमति और मंजूरी से लिया गया था या नहीं।
मुख्य चुनाव आयुक्त और केंद्र सरकार की भूमिका पर हमला बोलते हुए जस्टिस गौड़ा ने कहा कि आजादी के 78 वर्षों के इतिहास में आज मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा केंद्र सरकार के शीर्ष लोगों के समर्थन से लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि देश की जनता ऐसे लोगों को खुद सबक सिखाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस के सांसद पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके कहा कि इससे विपक्ष के दावे को कानूनी मजबूती मिलती है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने न केवल मनमाने ढंग से काम किया है बल्कि माननीय सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने के लिए एसआईआर प्रक्रिया को गलत तरीके से पेश भी किया है।
आगे उन्होंने कहा कि हमें यकीन माननीय सुप्रीम कोर्ट देश की नैतिक अपील सुनेगा और एसआईआर फैसले को वापस लेकर उचित कदम उठाएगा। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि अब उनकी मुश्किले बढ़ने वाली हैं। उन्हें इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बन जाना चाहिए, वरना देशद्रोह के मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

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