आशुतोष रांका और सौरव दास को 9 दिन बाद मिली जमानत

नई दिल्ली। CJP नेता आशुतोष रांका व सौरव दास को आज 9 दिन बाद एसईएम अदालत से जमानत मिल गई है। दोनों को हिरासत में लिए जाने के बाद 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इसके बाद 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी थी। ये अवधि आज 21 अक्टूबर को खत्म हो रही थी और दोनों तिहाड़ जेल में थे।
इससे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर व कनॉट प्लेस से जुड़े मामलों में CJP नेताओं आशुतोष रांका व सौरव दास को लेकर जांच का दायरा अब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच तक पहुंच गया। 13 अक्टूबर को दर्ज दोनों मामलों को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया। इनमें एक मामला कनॉट प्लेस में प्रवेश से जुड़ा है, जबकि दूसरा जंतर-मंतर इलाके में कथित तौर पर प्रवेश करने को लेकर दर्ज किया गया था। दोनों मामलों की जांच अब क्राइम ब्रांच करेगी।
दिल्ली पुलिस के अनुसार 13 अक्टूबर को आशुतोष रांका, सौरव दास और CJP के अन्य सदस्य जंतर-मंतर पहुंचे थे। जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद वहां प्रवेश को लेकर पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी। पुलिस का आरोप है कि समूह ने निजी परिसर के रास्ते प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया व बैरिकेड पार किए। इस दौरान कुल 14 लोगों को हिरासत में लिया गया था घटना के संबंध में दो मामले दर्ज किए गए थे।
दिल्ली पुलिस के अनुसार 13 अक्टूबर को आशुतोष रांका, सौरव दास और CJP के अन्य सदस्य जंतर-मंतर पहुंचे थे। जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद वहां प्रवेश को लेकर पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी। पुलिस का आरोप है कि समूह ने निजी परिसर के रास्ते प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया व बैरिकेड पार किए। इस दौरान कुल 14 लोगों को हिरासत में लिया गया था। घटना के संबंध में दो मामले दर्ज किए गए थे।
इधर दोनों नेताओं ने अपनी हिरासत को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती भी दी है। उनकी याचिका में आरोप लगाया गया है कि जमानत/जमानती प्रक्रिया के तहत पेश किए गए दस्तावेजों के बावजूद रिहाई नहीं हुई और हिरासत बढ़ाने का फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ है। दोनों ने मामले में तत्काल सुनवाई व रिहाई की मांग की गई है।
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी उनकी याचिका पर आज सुनवाई हुई। दिल्ली हाई कोर्ट ने आशुतोष रांका और सौरव दास की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों की उम्र पूछी। इसके बाद कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा के कि “दोनों GEN Z नहीं हैं, क्योंकि एक ने अपनी उम्र 27 साल बताई तो दूसरे ने 31 साल। पहले यह छात्रों का प्रदर्शन था, इसमें बच्चे भी शामिल थे, लेकिन अब प्रदर्शन का मुद्दा बदल गया है।

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि लोग वही हैं, लेकिन अब प्रदर्शन का मकसद बदल गया है। आप कौन हैं, किस संगठन से जुड़े हैं और उस संगठन का मकसद क्या है? जब शांति भंग होने का डर हो, तब इन सवालों का जवाब जानना जरूरी हो जाता है। कोर्ट ने कहा ऐसे समूह जिनके मुद्दे और उद्देश्य समय-समय पर बदलते रहते हैं, उनके बारे में सवाल उठता है कि क्या मजिस्ट्रेट को शांति भंग होने की आशंका पर विचार करते समय इन पहलुओं को देखना चाहिए।
सुनवाई के दौरान ASG चेतन शर्मा ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट में अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट इस बात का ध्यान रखेंगे। ASG चेतन शर्मा ने यह भी कहा कि मामले में भेदभावपूर्ण व्यवहार हुआ है। उन्होंने बेल बॉन्ड रद्द किए जाने और चार श्योरिटी पर दोबारा विचार किए जाने का मुद्दा भी उठाया। इसके बाद सुनवाई समाप्त हो गई।

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