नई दिल्ली/जयपुर। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में नर्मदा नदी परियोजना से जुड़े दशकों पुराने लंबित विवादों के समाधान की दिशा में मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच विभिन्न मुद्दों पर महत्वपूर्ण समझौता हुआ। इस समझौते के साथ ही जल-प्लावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के विस्थापन और जमीन के मुआवजे से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवादो का समाधान हो सकेगा।
चारों राज्यों के मुख्यमंत्री की मौजूदगी में सभी राज्यों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में विवाद के सर्वमान्य समाधान पर सहमति व्यक्त की। अब चारों राज्यों के बीच हुए इस समझौते के बाद प्रभावित लोगों के पुनर्वास, भूमि मुआवजे और अन्य लंबित मामलों के समाधान की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से न केवल प्रभावित परिवारों को राहत मिलेगी, बल्कि परियोजना से जुड़े प्रशासनिक कार्यों को भी गति मिलेगी।
नर्मदा नदी परियोजना देश की सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं में से एक है। परियोजना से जुड़े बांधों और जलाशयों के कारण प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से विस्थापन, पुनर्वास और भूमि मुआवजे को लेकर विभिन्न राज्यों के बीच कई प्रशासनिक और कानूनी विवाद बने हुए थे। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे के विभिन्न पहलुओं पर लंबे समय से सहमति नहीं बन पा रही थी, जिसके कारण कई मामले वर्षों तक लंबित रहे।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, हाल के वर्षों में राज्यों के बीच जल बंटवारे और अंतरराज्यीय नदी परियोजनाओं से जुड़े पुराने विवादों के समाधान में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इससे पहले हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से जुड़ी किशाऊ बांध परियोजना के मुद्दे पर भी सहमति बनाने में सफलता मिली थी। वहीं राजस्थान और हरियाणा के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल विवादों के समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इसके बाद अंतरराज्यीय जल विवादों के समाधान से विकास परियोजनाओं में तेजी आएगी, प्रभावित लोगों को समय पर राहत मिल सकेगी और राज्यों के बीच सहयोग की भावना भी मजबूत होगी।। नर्मदा परियोजना पर हुआ यह समझौता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।