कांग्रेस ने गहलोत को उतारा मैदान में,भाजपा -आरएसएस कटघरे में

नई दिल्ली। राम मंदिर चढ़ावे में चोरी और जमीन घोटाले के मामले को लेकर कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को मैदान में उतार दिया है। इसी के साथ कांग्रेस की ओर से उन्होंने भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद पर हमलावर बोला है।  गहलोत ने कहा कि राम मंदिर की चढ़ावे में हुई चोरी से लोगों की आस्था को चोट पहुंची है।

गहलोत ने राम मंदिर ट्रस्ट को तुरंत भंग करने और चोरी की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में कराने की भी मांग की है। गहलोत ने मंगलवार को नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि मौजूदा ट्रस्ट को भंग करके नया ट्रस्ट बनाया जाए. तब जाकर लोगों में विश्वास पैदा होगा, गहलोत ने कहा कि अगर यह लोग घटनाक्रम होने के तुरंत बाद ही ट्रस्ट को भंग कर देते तो लोगों में विश्वास बना रहता। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष ने खुद कहा कि यह चोरी नहीं बल्कि डकैती है। भाजपा आरएसएस भी मान गई है की गड़बड़ी हुई है तो फिर बचा क्या है,इसलिए इस ट्रस्ट को तुरंत भंग किया जाए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है, लेकिन इस एसआईटी पर लोगों को विश्वास नहीं है, क्योंकि इनमें यूपी के ही अधिकारियों को शामिल किया गया है। इसलिए वो इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं कर पाएंगे। पूर्व मुख्यमंत्री ने एसआईटी की जांच पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि एसआईटी को भी अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करना चाहिए जिससे कि पता चल सके कि इस मामले में एसआईटी ने क्या रिपोर्ट तैयार की थी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नए ट्रस्ट में धर्माचार्य और शंकराचार्य को लिया जाना चाहिए। गहलोत ने कहा कि जब देश में इलेक्ट्रोल बॉन्ड हुआ था तभी सुप्रीम कोर्ट इसे असंवैधानिक बताया था. चुनाव आयोग तैयार नहीं हुआ लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने समय सीमा निर्धारित की थी कि किसने किस पार्टी को कितना चंदा दिया है उसके नाम बताने पड़ेंगे। उसके बाद नाम सार्वजनिक किए गए थे, गहलोत ने कहा कि एक व्यक्ति ने दावा किया है कि उसने 5 करोड़ रुपए चंदा राम मंदिर को दिया है तो ऐसे में कितने लोगों ने राम मंदिर को कितना चंदा दिया है उसे भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

राम मंदिर और देश के अन्य मंदिरों के दान में फर्क : पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि तिरुपति मंदिर हो, वैष्णो देवी मंदिर हो ,बद्रीनाथ- केदारनाथ मंदिर हो, महाकाल मंदिर हो, शिरडी मंदिर हो या फिर राजस्थान का सांवलिया सेठ मंदिर हो। उनके चंदे में और राम मंदिर के चन्दे में बहुत फर्क है। राम मंदिर पूरे देश का है तो फिर इतना फर्क कैसे रह गया, क्या यहां पर श्रद्धालु कम आते हैं, या भक्तों की संख्या का मिलान नहीं हो पा रहा है. कहीं न कहीं गड़बड़ी जरूर हुई है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट सरकार का ही है, क्योंकि जब राम मंदिर बनकर तैयार हुआ था उसके उद्घाटन में कोई शंकराचार्य और धर्माचार्य नहीं गए थे। प्रधानमंत्री खुद गए थे जो काम धर्माचार्य के होते हैं वो काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किए थे. अगर गांव में भी छोटे-बड़े मंदिर की स्थापना होती है तो वहां भी धर्माचार्य पहुंचते हैं। पूरे देश के लिए राम मंदिर एक है, धर्माचार्य बोलते रहे लेकिन प्रधानमंत्री ने किसी की परवाह नहीं की। जब उस काम को प्रधानमंत्री ने इतनी दिलचस्पी से किया था तो अब वो आगे क्यों नहीं आ रहे हैं। उन्हें आगे आकर इस मामले पर बयान देना चाहिए।

गहलोत ने कहा कि चोरी की एफआईआर दर्ज करने के लिए भी प्रधानमंत्री कार्यालय से पूछना पड़ रहा है जबकि एफआईआर दर्ज करने का अधिकार तो थानेदार को होता है। गहलोत ने कहा कि राम मंदिर चोरी में जो आरोप लगे हैं बहुत संगीन आरोप है, क्योंकि 2 करोड़ की जमीन 18 करोड़ में खरीद ली गई। ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे. जिन लोगों को ट्रस्ट में शामिल किया गया था, उनका बैकग्राउंड क्यों नहीं चेक किया गया। चंदे का कोई हिसाब किताब नहीं है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष का बयान भी हैरान करने वाला है। कोषाध्यक्ष कह रहे हैं कि जो भी कुछ हुआ है उसमें उनका कोई लेना नहीं है क्योंकि उन्होंने किसी चेक पर साइन नहीं किए हैं। भले ही ट्रस्ट में तीन लोगों के हस्ताक्षर चलते हो लेकिन सबसे अहम हस्ताक्षर कोषाध्यक्ष के ही होते हैं। गहलोत ने कहा कि कोषाध्यक्ष कह रहे हैं कि मैं तो डमी था तो फिर वो किस बात के कोषाध्यक्ष थे।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राम मंदिर से देश के करोड़ों लोगों की आस्था जुडी हुई है। करीब 40 साल पहले विश्व हिंदू परिषद, आरएसएस ने गांव-गांव घूम घूम कर मंदिर बनाना के लिए पदयात्रा की थी। तब लोगों ने अपने जेवर तक निकल कर दे दिए थे. मंदिर निर्माण के लिए किसी ने 100, किसी ने 500 , किसीने 5 लाख दिए। किसी ने एक करोड़ दिए लेकिन आस्था सब की समान होती है लेकिन अब जिस प्रकार की चोरी राम मंदिर ट्रस्ट में हुई है, उसे लेकर गांव गांव में यह बात पहुंच गई है. लोगों में इस बात को लेकर भयंकर आक्रोश है, लोगों की आस्था के साथ विश्वासघात किया गया है।

गहलोत ने कहा कि कहा कि नरसिम्हा राव के समय साधु संतों को लेकर ट्रस्ट बनाया गया था. अगर आज भी ट्रस्ट में साधु संतों को लिया जाता तो यह नौबत नहीं आती। गहलोत ने कहा कि जब राम मंदिर का निर्माण हो रहा था तब चंपत राय राजस्थान के भरतपुर से गैर कानूनी पत्थर लेकर जा रहे थे। तब मैंने उनसे कहा कि मंदिर निर्माण जैसे काम में गैर कानूनी पत्थर नहीं लगाने चाहिए। यह मामला प्राइम मिनिस्टर ऑफिस तक पहुंचा और भरतपुर के बंसी पहाड़ को लीगल माइनिंग घोषित की गई और तब यहां से पत्थर वहां पहुंचा और राम मंदिर का निर्माण हुआ था लेकिन उसके बाद भी इन लोगों ने हमें धन्यवाद तक नहीं दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि चाल, चरित्र चेहरे की बात करने वाले लोग आज पूरी तरीके से एक्सपोज हो गए हैं। इनका चाल, चरित्र और चेहरा जनता के सामने आ चुका है। गहलोत ने कहा कि चंदा चोरी के मामले में केवल लीपा पोती की जा रही है कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. 42 दिन में 70 घटनाएं हुई है। और विपक्ष के लोग जब इस मामले में आवाज उठा रहे हैं तो उन पर एफआईआर दर्ज की जा रही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *