भाजपा और करणी सेना के बीच वार्ता, सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं आया

 

जयपुर। यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर निकाली गई सवर्ण न्याय यात्रा के समापन के दौरान जयपुर में एक युवक की मौत के बाद शुरू हुए विवाद पर भाजपा और श्री राजपूत करणी सेना के बीच अहम वार्ता सकारात्मक हुई। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना और अन्य पदाधिकारियों ने मुलाकात कर मृतक देवराज के मामले में सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखीं। वार्ता के बाद आर्थिक सहायता, संविदा पर सरकारी नौकरी और पुलिस कार्रवाई के संबंध में सकारात्मक आश्वासन दिया गया। वहीं पंचायत निकाय चुनाव के विरोध पर करनी सेना ने साफ कहा कि विरोध जारी रहेगा। वहीं राठौड़ ने कहा कि यह हमारे अपने हैं। हमें सबक सिखाएंगे तो खुद को सबक मिलेगा।

श्री राजपूत करणी सेना ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली, मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता दी जाए. दूसरी, परिवार के एक सदस्य को संविदा के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाए। तीसरी, घटना के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि वार्ता में मदन राठौड़ की ओर से कहा गया कि नियमों के अनुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि परिवार के एक सदस्य को संविदा पर सरकारी नौकरी देने का भी आश्वासन दिया गया। वहीं पुलिस अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने की मांग पर सरकार ने स्पष्ट किया कि पहले पूरे मामले की जांच होगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि मकराना ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि करणी सेना की ओर से जो आंदोलन की चेतावनी दी गई थी और 7 दिन का अल्टीमेट में वह बरकरार है, क्योंकि अभी सभी मांगे पूरी नहीं हुई है। अभी सरकार के पास 5 दिन का समय है। वह इन मांगों को पूरा करें। जहां तक यूजीसी का मामला है, हमारी रणनीति स्पष्ट है. आंदोलन इस बार राजस्थान में था, अगला चरण हमारा दिल्ली की तरफ होगा और उसके बाद फिर अलग-अलग राज्यों में जाएंगे  जब तक यूजीसी रोलबैक नहीं होगा, तब तक यह आंदोलन सवर्ण यात्रा जारी रहेगी

करणी सेना की ओर से यूजीसी मुद्दे और आंदोलन के दौरान हुई घटना को लेकर सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने तथा  आगामी निकाय और पंचायत चुनावों में भाजपा का विरोध करने का भी ऐलान किया था  हालांकि वार्ता के बाद दोनों पक्षों के बीच संवाद का रास्ता खुलता दिखाई दिया, लेकिन करणी सेना की ओर से पंचायत निकाय चुनाव के विरोध के सवाल पर राठौड़ ने कहा कि वे आखिर जाएंगे कहां, सभी अपने ही हैं। वे हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं। सबक किसे सिखाएंगे, खुद को ही सबक मिलेगा। जहां तक करणी सेना की मांगों का सवाल है। इन्होंने अपनी तीन मांगे रखी हैं। उन पर सरकार संवेदनशीलता के साथ विचार कर रही है, जो भी न्याय चित्र मांग होगी उसे पूरा किया जाएगा।

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