जयपुर। जिस ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का बहाना बनाकर निकाय और पंचायत चुनाव टाले जा रहे थे, उसी ओबीसी आरक्षण के लिए गठित ओबीसी आयोग ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। आयोग के अध्यक्ष मदन लाल भाटी और अन्य सदस्यों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस दौरान पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा, आयोग के सचिव अशोक कुमार जैन भी मौजूद रहे।
इस मौके पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने की लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सरकार ने स्थानीय निकाय और पंचायत राज्य संस्थाओं के चुनाव समय पर कराने का जो वादा किया था, उसे पूरा करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वन स्टेट वन इलेक्शन की अवधारणा को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अगर प्रदेश में स्थानीय निकाय पंचायत चुनाव एक साथ कराए जाते हैं, तो बार-बार चुनाव प्रक्रिया से होने वाले प्रशासनिक व्यवधान कम होंगे।
इससे सरकारी मशीनरी, विकास और जन कल्याण के कामों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेगी. इससे समय, धन और संसाधनों की भी बचत होगी। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से विकास परियोजनाओं पर असर पड़ता है और प्रशासनिक व्यवस्था का बड़ा हिस्सा चुनावी तैयारी में व्यस्त हो जाता है। ऐसे में एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था सुशासन को मजबूत करने के साथ-साथ विकास के कामों को निरंतर गति देने में भी सहायक सिद्ध होगी।
दूसरी ओर ओबीसी आयोग की ओर से रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग की रिपोर्ट के जरिए जातियों को आपस में लड़ाने की साजिश की जा रही है। डोटासरा ने बुधवार शाम मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि आयोग की रिपोर्ट अभी कांग्रेस के पास नहीं पहुंची है, इसलिए उसका अध्ययन किए बिना अंतिम टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। हालांकि उन्हें जो अपुष्ट जानकारी मिली है उसके आधार पर आशंका जताई है कि रिपोर्ट के जरिए ओबीसी समाज की विभिन्न जातियों के बीच विभाजन पैदा करके उन्हें आपस में लड़ने की कोशिश की गई है।
डोटासरा ने कहा कि रिपोर्ट हमारे पास आएगी, तब पता चलेगा कि उसमें क्या है और वो सही है या गलत है। लेकिन मेरे पास जो अपुष्ट समाचार हैं, उसके अनुसार केवल ओबीसी का अध्ययन नहीं किया गया बल्कि अलग-अलग जातियों का भी सर्वे करके उन्हें एक–दूसरे से लड़ाने का पुख्ता इंतजाम किया गया है। आखिर सरकार को किसने कहा था कि अलग-अलग जातियों का सर्वे करके उसे सार्वजनिक कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने और उसके विस्तृत अध्ययन के बाद ही कांग्रेस अपना आधिकारिक पक्ष रखेगी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आयोग का कार्यकाल 3 महीने का था,जबकि रिपोर्ट लगभग 15 महीने बाद आई है। यह रिपोर्ट किस आधार पर तैयार हुई है, यह अध्ययन के बाद स्पष्ट हो सकेगा। डोटासरा ने कहा कि सरकार ने ओबीसी समाज की जातियों के बीच मतभेद पैदा करने का जाल बिछाया है, यदि रिपोर्ट में ऐसा कोई प्रयास सामने आता है, तो कांग्रेस इसका विरोध करेगी।