वीआईपी मूवमेंट के नाम पर गरीबों को कुचलने का अधिकार किसी को नहीं

जयपुर। मुख्यमंत्री के काफिला निकलने से पहले पुलिस की गलती से एक लड़की के गर्म पानी से झुलसने के मामले में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और जयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा ने निशाना साधते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।
आज पीड़िता से मुलाकात के बाद टीकाराम जूली ने कहा कि वीआईपी मूवमेंट के नाम पर गरीबों को इस तरह कुचलने का अधिकार किसी सरकार को नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री जी, आपने स्वयं कहा था कि आपने अपना काफिला छोड़ दिया। आपने कहा था कि मैं लाल बत्ती पर भी रुकता हूँ और मुझे किसी वीआईपी मूवमेंट की आवश्यकता नहीं है। फिर यह सब क्या हो रहा है?

जूली ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि आपने घोषणा की, आपने अखबारों में छपवाया कि आप आम आदमी की तरह चलेंगे, लाल बत्ती पर भी रुकेंगे और किसी प्रकार का वीआईपी मूवमेंट नहीं होगा। फिर आपने प्रधानमंत्री जी की ईंधन बचाने की अपील के बाद आपने अपनी तस्वीरें भी जारी कीं कि आप ईवी में चलेंगे और काफिला भी हटा देंगे ।

नेता प्रतिपक्ष ने सवाल पूछा कि फिर वीआईपी मूवमेंट के नाम पर आपने इस बच्ची की ज़िंदगी क्यों बर्बाद कर दी गई? उसका आधा शरीर जल गया। अभी उसकी शादी भी नहीं हुई है। और हालात यह हैं कि प्रशासन के लोग कह रहे हैं कि उसने खुद पर पानी डाल लिया। मुख्यमंत्री जी, आप एक बार गर्म पानी में अपनी उंगली डालकर तो दिखा दीजिए ।

जो बेटी मेहनत-मजदूरी करके अपने पूरे परिवार का पालन-पोषण करती है, जिसके सिर से पिता का साया उठ चुका है, उसके साथ सरकार ने इतनी निर्दयता दिखाई। उसके बाद न सरकार की ओर से कोई मदद, न मुआवजा और न ही दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई। क्या पुलिस को यह अधिकार दे दिया गया है कि वह जो चाहे, वही करे?

क्या गरीब इंसान नहीं होते? क्या उनमें जीवन नहीं होता? क्या उनकी भावनाएँ नहीं होतीं? कमाल है…

जूली ने कहा कि आज एक सप्ताह होने को आ रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री ने इस परिवार की कोई सुध नहीं ली। मुख्यमंत्री जी, आपके वीआईपी मूवमेंट की वजह से इस बच्ची के साथ यह हादसा हुआ है। यह बच्ची भी हमारी बेटियों जैसी ही है। क्या इंसानों में भी अब फर्क किया जाएगा? और दूसरी ओर भाजपा नाटक करती है, महिला सम्मान और महिला सुरक्षा की बातें करती है।

जूली ने पूछा कि क्या यही आपकी महिला सुरक्षा है? मैं मुख्यमंत्री जी से कहना चाहता हूँ कि अभी भी समय है, चेत जाइए। इंसान को इंसान समझिए। जनता के साथ इस प्रकार की घटनाएँ हो रही हैं, उनमें जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई कीजिए।

क्या आपने अपने अधिकारियों को खुली छूट दे दी है कि जो मन में आए वही करें? इस मामले में सरकार को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।

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