जयपुर। राजधानी में रविवार को जारी बरसात के बीच बीजेपी कार्यकर्ता और समर्थक ने तिरंगा रैली निकाली। बीजेपी की ओर से जयपुर के अल्बर्ट हॉल से निकाली गई ‘हर घर तिरंगा यात्रा’ में बारिश के बावजूद लोगों का उत्साह अच्छा रहा। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित कई नेता मौजूद रहे।
इससे पहले मंच से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सम्मान को लेकर पूर्ववर्ती सरकारों और राजनीतिक दलों पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि जब संविधान और राष्ट्रगान को राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में जगह दी गई, तो ‘वंदे मातरम’ को क्यों बाहर रखा गया ? इसे भूल माने या तुष्टिकरण की राजनीति।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राजस्थान की धरती को नमन करते हुए कहा कि इस तिरंगे के लिए देश के लोगों ने अपना खून-पसीना, जवानी और जीवन तक न्योछावर कर दिया। ऐसे सभी वीरों और स्वतंत्रता सेनानियों को नमन। वे आज भी देश के लिए प्रेरणा और ऊर्जा के स्रोत हैं। भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है और तिरंगा केवल एक कपड़ा या ध्वज नहीं है, ये 140 करोड़ भारतीयों की भावना है।
उन्होंने तिरंगे के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि जुलाई 1947 में देश ने तिरंगे को राष्ट्रध्वज के रूप में अपनाया। इसमें तीन रंगों के साथ अशोक चक्र को स्थान दिया गया उन्होंने बताया कि लंबे सफर के बाद तिरंगा देश की पहचान और राष्ट्रीय गौरव का जीवंत प्रतीक बन गया। आज भारत को दुनिया गंभीरता से देख रही है। दुनिया मान रही है कि भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में लगातार कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आह्वान किया कि राष्ट्रध्वज सिर्फ सरकारी इमारतों पर ही नहीं, बल्कि देश के हर घर पर लहराना चाहिए। इसी सोच के साथ ‘हर घर तिरंगा’ अभियान शुरू हुआ और देखते ही देखते ये जन आंदोलन बन गया। तिरंगा भारत की संप्रभुता, एकता और राष्ट्रीय अस्मिता का जीवंत प्रतीक है. हर भारतीय को इसके प्रति सम्मान और गर्व की भावना रखनी चाहिए।
जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में राष्ट्रध्वज और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े कानून का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि Prevention of Insults to National Honour बिल में राष्ट्रीय ध्वज राष्ट्रगान संविधान के सम्मान को लेकर कानून बनाया गया है। देश के संविधान और राष्ट्रगान को राष्ट्रीय गौरव से जोड़ा गया, लेकिन वंदे मातरम को लेकर लंबे समय तक अलग स्थिति रही। इसे भूल माना जाए या तुष्टिकरण की राजनीति, इस पर देश को विचार करना चाहिए। अब कानून में संशोधन किया गया है और राष्ट्रगीत को भी इसमें शामिल किया गया है।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में राष्ट्रीय पुनर्जागरण और नेशनल कंस्ट्रक्शन का दौर आगे बढ़ रहा है। देश को गुलामी की विरासत और औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकालने का काम शुरू हुआ है। आज हम शान के साथ राष्ट्रीय ध्वज के नीचे खड़े होते हैं और तिरंगा यात्राएं निकालते हैं। राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किया गया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमृत महोत्सव के दौरान ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत की थी. आज इस अभियान ने जन आंदोलन का रूप ले लिया है। तिरंगा हमारी एकता और विविधता का प्रतीक है। तिरंगे का राजस्थान से भी पुराना नाता है. देश में जब पहला तिरंगा फहराया गया था, वो जयपुर जिले में ही बना था।
उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन और उसके बाद तिरंगे ने देशवासियों को एकजुट करने का काम किया, इसीलिए तिरंगा केवल घरों पर फहराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ये हर भारतीय के दिल में होना चाहिए। ये हमारे लिए गौरव और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है। तिरंगा यात्रा देशवासियों के भीतर राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और मजबूत करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास का काम हो रहा है। राजस्थान में भी विकास के कई बड़े काम प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुए हैं। जब भी देश के सामने कोई चुनौती आई है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुश्मन को करारा जवाब देने का काम किया गया है।
तिरंगा रैली में केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा प्रदेश प्रभारी डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा और दीया कुमारी सहित प्रदेश सरकार के कई मंत्री, विधायक, सांसद, पूर्व जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता शामिल हुए।