जैसलमेर के क्षेत्रों में अकाल के हालात गंभीर, सरकार की नींद नहीं खुल रही

 

जैसलमेर और आसपास के क्षेत्रों में अकाल के हालात गंभीर, फिर भी सरकार की नींद नहीं खुल रही: अशोक गहलोत

• कई गायों की मृत्यु हो गई, अनेक गायें इतनी कमजोर हो गई हैं कि खड़ी तक नहीं हो पा रहीं
• प्रभावित क्षेत्रों में चारे का प्रबंधन और गायों के लिए शिविर लगाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए
• पंचायतीराज चुनावों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं से पूरी ताकत के साथ जुटने का आह्वान

जैसलमेर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को जैसलमेर में पंचायतीराज चुनाव सम्मेलन एवं किसान संवाद को संबोधित करते हुए पश्चिमी राजस्थान में सूखे और अकाल के गंभीर हालात को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में हालात बहुत गंभीर हैं, गायें मर रही हैं, खरीफ की फसल चौपट हो गई है और स्थिति लगातार बिगड़ रही है। दूसरे राज्यों में मुख्यमंत्री सूखे के हालात का जायजा लेने के लिए दौरे करने लगे हैं, जबकि राजस्थान सरकार की अभी तक नींद नहीं खुली है। उन्होंने कहा कि वे बार-बार सरकार को चेता रहे हैं। यह राजनीति का विषय नहीं, बल्कि किसानों, पशुपालकों और आमजन को राहत पहुंचाने का सवाल है।

गहलोत ने कहा कि जैसलमेर में पशुधन की स्थिति बेहद चिंताजनक है। रामगढ़ रोड पर गायें मर रही हैं और डिपो में उनके शव सड़ रहे हैं। कई गायों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि अनेक गायें इतनी कमजोर हो गई हैं कि खड़ी तक नहीं हो पा रहीं। यह स्थिति बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी हालात की गंभीरता को समझें। मुख्यमंत्री के बाड़मेर दौरे के दौरान केवल एक करोड़ रुपये की घोषणा की गई, लेकिन चारा डिपो तक नहीं खुले। चारे की कीमत 20 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। पशुपालक आखिर अपने पशुओं को कैसे बचाएं? कांग्रेस सरकार ने लंपी बीमारी के दौरान पशुपालकों को प्रति गाय 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी थी। मौजूदा सरकार को भी पशुधन की रक्षा के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि अकाल प्रभावित क्षेत्रों में चारे का प्रबंधन और गौवंश के लिए शिविर लगाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

गहलोत ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अकाल के समय राहत पहुंचाने में कोई कमी नहीं रखी गई थी। अपने पूर्व कार्यकाल में उन्होंने अकाल के दौरान श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार से भी राजस्थान के लिए सहायता प्राप्त की थी। आज तो प्रदेश और केंद्र दोनों जगह भाजपा की सरकारें हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इस डबल इंजन सरकार में दिल्ली का इंजन कब काम आएगा? उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को हालात की गंभीरता समझते हुए केंद्र सरकार के सहयोग से अकाल प्रभावित क्षेत्रों के लिए तत्काल राहत पैकेज की व्यवस्था करनी चाहिए। जैसलमेर के भाजपा विधायक भी क्षेत्र में विकास कार्यों और सूखे से राहत दिलाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी भी नहीं सुन रही है। जब सत्तारूढ़ दल के विधायक की बात तक नहीं सुनी जा रही, तो आम किसान और पशुपालक अपनी फरियाद लेकर कहां जाएं?

गहलोत ने कहा कि जैसलमेर जिले में करीब 3,500 गांव और ढाणियां दूर-दूर तक बसी हुई हैं। ऐसे क्षेत्र में पेयजल की व्यवस्था के लिए व्यापक योजना और प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है। जल जीवन मिशन की योजना ठप पड़ी है। सरकार को तत्काल इसकी समीक्षा कर हर गांव और ढाणी तक पेयजल पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अकाल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को पीने का पानी उपलब्ध करवाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

गहलोत ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का संकट गहराता जा रहा है। मनरेगा के भुगतान अटके हुए हैं और देशभर में करीब 17 हजार करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। मनरेगा को बंद कर दिया गया और अब वीबी-जी राम जी योजना लाई गई है, जिससे ग्रामीणों के लिए काम हासिल करना और मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सूखे के इस दौर में ग्रामीण परिवारों को रोजगार की सबसे ज्यादा जरूरत है।

गहलोत ने सामाजिक सौहार्द के मुद्दे पर कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में हिंदू और मुसलमान सदियों से प्रेम, भाईचारे और आपसी सद्भाव के साथ रहते आए हैं। भाजपा के लोगों की नीयत पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि समाज में तनाव पैदा करने के बजाय लोगों को जोड़ने का काम होना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर में मस्जिदों और मजारों को गिराने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने कहा कि इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह से जवाब मांगा गया है। राजस्थान की सांझी संस्कृति और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

गहलोत ने पंचायतीराज चुनावों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं से पूरी ताकत के साथ जुटने का आह्वान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नगरीय निकाय चुनावों में भाजपा ने गुंडागर्दी की और परिसीमन में बेईमानी की। उन्होंने असम का उदाहरण देते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनहित के मुद्दों पर संघर्ष करते हुए भाजपा सरकार को जवाबदेह बनाएगी।

गहलोत ने कहा कि भाजपा सरकार ने कांग्रेस सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को ठप कर दिया है। अन्नपूर्णा फूड पैकेट योजना बंद कर दी गई, जिसके तहत जरूरतमंद परिवारों को मसाले सहित अन्य खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाई जाती थी। आज भी गांवों में इस योजना के थैले दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री चाहें तो उन थैलों से मेरी फोटो हटाकर अपनी फोटो लगा लें, लेकिन जनता के हित की योजना को बंद क्यों किया गया? सरकार को राजनीति से ऊपर उठकर जरूरतमंद परिवारों को राहत देनी चाहिए। उन्होंने भाजपा सरकार पर जनता के टैक्स के पैसे की फिजूलखर्ची करने और जनहित के कामों के बजाय प्रचार पर अधिक ध्यान देने का आरोप भी लगाया।

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