दलितों को जुमलों से न बहलाएं, एससी योजनाओं में कम खर्च उनके वाजिब हक़ पर डाका जैसा
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति की रिपोर्ट को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जातियों के कल्याण के लिए आवंटित बजट का बड़ा हिस्सा खर्च न कर वापस लौटाना सरकार की नीयत और प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जूली ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में एससी विभाग के लिए 10,309 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन इनमें से 2,345 करोड़ रुपये, यानी लगभग 23 प्रतिशत राशि सरकार द्वारा सरेंडर कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह दर्शाता है कि सरकार दलित कल्याण की योजनाओं को लेकर न तो संवेदनशील है और न ही प्रतिबद्ध।
नेता प्रतिपक्ष ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पहले बजट अनुमान में राशि बढ़ाकर बड़ी घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन संशोधित अनुमान में इसे करीब 30 प्रतिशत तक घटा दिया जाता है। इसके बावजूद जो राशि बचती है, उसका भी पूरा उपयोग नहीं हो पाता, जो प्रशासनिक विफलता और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को उजागर करता है।
जूली ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की सोच केवल जुमलेबाजी तक सीमित है। उन्होंने कहा, “यदि सरकार वास्तव में अनुसूचित जातियों के कल्याण के प्रति गंभीर होती, तो योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाकर हर रुपये का उपयोग सुनिश्चित करती, न कि बजट को वापस लौटाने की नौबत आती।”
उन्होंने आरोप लगाया कि दलित समाज के अधिकारों और विकास को लेकर सरकार की उदासीनता स्पष्ट है। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के बजाय बजट सरेंडर करना यह साबित करता है कि सरकार की प्राथमिकताओं में दलित कल्याण शामिल नहीं है।