नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मौत की सजा

मेरठ।  नीला ड्रम हत्याकांड मामला जो पूरेदश में सुर्खियां बना था, उस मामले में जिला अदालत ने दोनों आरोपियों को मौत की सजा सुनाई है। मेरठ के सौरभ हत्याकांड में मेरठ की जिला अदालत ने साहिल और मुस्कान को फांसी की सजा सुनाई है। इससे पहले 30 सितंबर को कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराया था। साथ ही फैसले की तिथि 14 अक्टूबर तय की थी। कोर्ट ने जो सजा सुनाई है, उसमें 7 साल की सजा धारा 238 A में दी है और 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है, जो डेड बॉडी छिपाने के लिए है। जबकि 50 हजार रुपये का जुर्माना हत्या के जुर्म के लिए लगाया है। कोर्ट ने महाभारत के संस्मरण का भी जिक्र किया। साथ ही इसे जघन्य अपराध मानते हुए यह फैसला सुनाया।
जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने सौरभ राजपूत की नृशंस हत्या के मामले में उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को दोषी ठहराया था। अदालत ने इस वारदात को बेहद क्रूरतम कृत्य करार देते हुए कहा कि ऐसा अपराध समाज पर गहरा और नकारात्मक असर डालता है।
बुधवार को वर्चुअल माध्यम से कोर्ट में मुस्कान और साहिल की वर्चुअल माध्यम पेशी हुई। वादी पक्ष के अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने कहा, उन्होंने कोर्ट को यही बताया है कि हत्या का तरीका बेहद ही क्रूरतम है। यह कोई अचानक से उकसावे में आकर हत्या नहीं की गई है। बल्कि यह सोच-समझकर हत्या की गई। हत्या करने के बाद भी डेडबॉडी के टुकड़े किए गए। मृतक सौरभ के सिर को तो आरोपी साहिल अपने घर तक भी लेकर गया था। जिस तरह का दोष है, इसमें कम से कम मृत्यु दंड दिया जाए। अधिवक्ता विजय बहादुर ने कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक केस का हवाला देते हुए इस मामले में मृत्युदंड की मांग की है। मृतक सौरभ की मां रेनू और भाई बबलू भी सजा सुनाए जाने के दौरान कोर्ट में रहे।
इस मामले से जुड़े रहे अधिवक्ता विजय बहादुर ने कहा कि वह कोर्ट का सम्मान करते हैं। इस निर्णय को उन्होंने जन भावना से जुड़ा निर्णय बताया और कहा कि देशभर में नीला ड्रम केस के बाद ऐसी घटनाओं की बाढ़ सी आ गई थी, जो अदालत ने फैसला सुनाया है, यह पूरी तरह से स्वागत योग्य है। अब कम से कम ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी या जो इस तरह की घटनाओं में संलिप्त रहे हैं, उन पर कहीं ना कहीं रोक भी लगेगी। अधिवक्ता विजय बहादुर के anusar कोर्ट ने जो सजा सुनाई है, उसमें 7 साल की सजा धारा 238 A में दी है और 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।
उन्होंने कहा कि उम्मीद करते हैं कि अब भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगेगी. बता दें कि इस मामले में अदालत ने हत्या करने के लिए 50 हजार का जुर्माना लगाया है, जबकि साक्ष्य छुपाने के लिए 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। अधिवक्ता ने कहा कि मजबूत पैरवी की गई थी। कोर्ट में किसी भी तरह का कांट्रडिक्शन नहीं होने दिया। इस पूरे फैसले के बाद मैसेज यही जाने वाला है कि अपराधी अपराध करने से डरेगा और भय का वातावरण ऐसे लोगों में व्याप्त होगा। वहीं एडवोकेट दीप्ति चौधरी ने कहा कि जिस तरह का अपराध था, उसमें ऐसा ही निर्णय आना था और उसका स्वागत करते हैं।

कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि इन दोनों का गुनाह किसी भी कीमत पर माफी के लायक नहीं है और दोषियों को ऐसी सख्त सजा मिलनी चाहिए जो नजीर बने। इस सनसनीखेज मामले में करीब 13 से 16 महीनों तक चली सुनवाई के दौरान कुल 126 पेशियां हुईं. अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत के सामने 22 अहम गवाह पेश किए गए, जिनकी गवाही ने आरोपियों के खिलाफ अपराध को साबित किया। कोर्ट ने दोनों को हत्या के साथ-साथ साक्ष्य मिटाने और सबूत छिपाने का भी दोषी माना।

फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां रेनू देवी ने कहा, हमें बहुत अच्छा लग रहा है। हमें बहुत संतुष्टि मिल रही है कि उन दोनों को मौत की सज़ा सुनाई गई है। हमें इंसाफ मिल गया है। हम अपने वकीलों, सहयोगियों और स्टाफ के बहुत आभारी हैं और उनके ऋणी रहेंगे। ”
उल्लेखनीय है कि मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में मार्च 2025, में मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर पति सौरभ राजपूत की खौफनाक तरीके से न सिर्फ हत्या की थी, बल्कि उसके कई टुकड़े करके सीमेंट के घोल के साथ नीले ड्रम में भर दिए थे। इसके बाद वह घर पर ताला लगाकर प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ लगभग दस दिन के लिए हिमाचल घूमने चली गई थी।

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