नेहा बोरा नहीं करेंगी पीस बॉन्ड का हस्ताक्षर, नोटिस से जुड़े कागजात उपलब्ध कराए

नई दिल्ली। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि संगठन और मैं पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को रोकने के लिए पीस बॉन्ड का उपयोग किया जा रहा है, वह संविधान से मिले लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार के खिलाफ है।

नेहा बोरा ने मीडिया से बात करते हुए एसआईआर के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए पुलिस की कार्रवाई और जारी किए गए नोटिस पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस को नोटिस जारी करने के आधार से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने और आगे की कार्यवाही में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा के पीस बॉन्ड मामले में मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट में अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी। AISA के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद SEM कोर्ट ने नेहा को उनके खिलाफ जांच से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं। नेहा ने शांति भंग होने की आशंका के आधार पर जारी नोटिस को चुनौती दी थी। संगठन का कहना है कि वह कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करेगा, लेकिन नेहा किसी भी ऐसे पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी, जिसे संगठन विरोध-प्रदर्शन के अधिकार पर रोक लगाने का माध्यम मानता है।
नेहा के खिलाफ शांति भंग होने की आशंका के आधार पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इस कार्रवाई को AISA ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। संगठन ने नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि नेहा को उन दस्तावेजों की जानकारी नहीं दी गई थी, जिनके आधार पर शांति भंग होने की आशंका जताई गई। संगठन के अनुसार, 22 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने फिलहाल नोटिस को रद्द नहीं किया और मामले के गुण-दोष पर निर्णय नहीं दिया। हालांकि, संगठन ने कोर्ट के आदेश के पैरा 38 का हवाला देते हुए कहा कि इसमें प्रक्रिया से जुड़ी कमियों का जिक्र किया गया है और SEM कोर्ट को जांच से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
AISA ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि नेहा को मामले से संबंधित कलंदर उपलब्ध नहीं कराया गया। संगठन का कहना था कि दस्तावेजों के अभाव में नेहा को यह स्पष्ट जानकारी नहीं थी कि उनके खिलाफ कार्रवाई किस आधार पर की जा रही है और उन्हें सुनवाई के लिए क्यों बुलाया गया है। संगठन के मुताबिक, हाईकोर्ट के निर्देश के बाद SEM कोर्ट ने अब जांच से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं। इससे नेहा को मामले में लगाए गए आरोपों और कार्रवाई के आधार को समझने का अवसर मिलेगा।इधर्कAISA ने आरोप लगाया कि मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचने पर नेहा को वहां मौजूद दक्षिणपंथी भीड़ के विरोध का सामना करना पड़ा। संगठन के मुताबिक, भीड़ ने पुलिस स्टेशन के प्रवेश द्वार पर नारेबाजी की और नेहा को धमकियां दीं। AISA का दावा है कि करीब एक घंटे बाद दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा देकर नेहा को SEM कोर्ट की सुनवाई में शामिल कराया। इस घटनाक्रम को लेकर संगठन ने पुलिस की भूमिका और प्रदर्शनकारियों के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं।

 

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