नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि 1975 से भी ज्यादा खतरनाक आपातकाल लगा दिया गया है। सीजेपी नेताओं ने उन्हें जबरदस्ती हिरासत में लेने, फोन हैक करने जैसे आरोप भी दिल्ली पुलिस पर लगाए।
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका, सह-संयोजक सौरव दास और कानूनी प्रमुख रत्ना ने आरोप लगाया कि चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों, युवाओं और कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए दिल्ली में असाधारण सुरक्षा व्यवस्था की गई। CJP ने दावा किया कि सरकार ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए ऐसा कर रही है। पार्टी ने साफ किया कि हिरासत और पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा।
CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में ऐसे हालात बना दिए गए हैं, जहां सरकार अपने ही नागरिकों के खिलाफ खड़ी दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने और अपनी मांगें रखने के लिए दिल्ली आ रहे लोगों को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात किया गया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी किसी हिंसा के लिए नहीं, बल्कि अपनी शिकायतें सरकार तक पहुंचाने और निर्धारित स्थल पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने आए थे। सरकार को उनसे बातचीत करनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय उन्हें रोकने और हिरासत में लेने की कोशिश की गई।
सौरव दास ने आरोप लगाया कि पूरी कार्रवाई का मकसद ज्ञानेश कुमार को बचाना है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया कि आखिर ज्ञानेश कुमार को लेकर ऐसा क्या मामला है, जिसके कारण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई की जा रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सौरव दास ने मौजूदा हालात की तुलना आपातकाल से करते हुए कहा कि देश में विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को दिल्ली बुलाया गया और राजधानी में कई जगहों पर बैरिकेडिंग की गई। सौरव दास ने मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने, रेल सेवाओं पर असर पड़ने और दुकानों के बंद रहने का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि इस तरह की व्यवस्था से केवल प्रदर्शनकारियों को ही नहीं, बल्कि दिल्ली के आम नागरिकों को भी परेशानी होती है। उन्होंने सवाल किया कि अगर सरकार को लगता है कि प्रदर्शन से कोई समस्या हो सकती है, तो उसका समाधान बातचीत से क्यों नहीं निकाला जाता? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध प्रदर्शन के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।
दास ने आरोप लगाया कि उन्हें और उनके साथियों को विमान से जबरन उतारा गया। हिरासत में लेने के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि हिरासत में लेने का स्पष्ट आधार नहीं बताया गया और जरूरी दस्तावेज भी नहीं दिखाए गए। हिरासत के दौरान मोबाइल फोन ले लिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि वकीलों से संपर्क करने में परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने पर कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने फोन के साथ छेड़छाड़ की आशंका भी जताई। उन्होंने मानवाधिकार आयोग और न्यायपालिका से पूरे मामले का संज्ञान लेने की अपील की। दास ने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट या हिरासत में दुर्व्यवहार हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने अभिजीत दिपके की दादी के निधन का जिक्र करते हुए पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हिरासत में रहने के दौरान अभिजीत अपने परिवार से संपर्क करना चाहते थे, जिससे उन्हें घर में हुई घटना की जानकारी मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिजीत ने अपने परिवार से बात करने की अनुमति मांगी, लेकिन पुलिस ने उनकी परेशानी को समझने के बजाय मामले को सार्वजनिक तमाशा बनाने जैसा व्यवहार किया।
रांका ने अभिजीत के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि रिहाई के बाद वह अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अपने पैतृक गांव रवाना हो गए। व्यक्तिगत दुख के बावजूद अभिजीत ने आंदोलन से पीछे हटने से इनकार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार के प्रति संवेदना और सम्मान अपनी जगह है, लेकिन चुनावी जवाबदेही की मांग को लेकर संघर्ष जारी रहेगा।
आशुतोष रांका ने ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ियों और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर सरकार जवाब देने से बच रही है। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल हैं और इनका जवाब मिलना चाहिए। CJP ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय करने की मांग की। रांका ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया कि सरकार ज्ञानेश कुमार का बचाव क्यों कर रही है? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठने वाले सवालों का जवाब देना जरूरी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP ने प्रदर्शन के दौरान स्वतंत्र पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया। सौरव दास ने आरोप लगाया कि आंदोलन को कवर कर रहे पत्रकारों को पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने से रोकना लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने गुरुद्वारे में शरण ली थी, लेकिन पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की। उन्होंने इसे धार्मिक स्थल की गरिमा और वहां शरण लेने वाले लोगों के अधिकारों से जुड़ा मामला बताया। दास ने सिख समुदाय से अपील की कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं का साथ दें।
CJP की कानूनी प्रमुख रत्ना ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों को रोकने के लिए उनके घरों तक पहुंच रही है और उनके परिवारों पर दबाव बना रही है। रत्ना ने कहा कि बेंगलुरु से दिल्ली पहुंचने के दौरान उन्हें और उनके साथियों को कथित तौर पर ट्रैक किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पहुंचने के बाद पुलिसकर्मी घर पहुंचे और बाद में उन्हें कई घंटों तक हिरासत में रखा गया। हिरासत में लेने का कारण पूछने पर पुलिसकर्मियों ने कहा कि उन्हें ऊपर से आदेश मिले हैं।
रत्ना ने सवाल किया कि अगर किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाता है, तो उसका कानूनी आधार क्या है और इसके लिए जवाबदेह कौन होगा? उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना, एक जगह इकट्ठा होना और अपनी मांगें रखना नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई इन अधिकारों को प्रभावित कर रही है. हिरासत में लिए गए लोगों के साथ कथित मारपीट, मोबाइल फोन छीने जाने और वकीलों से संपर्क में बाधा डालने जैसे मामलों की जांच होनी चाहिए।
CJP नेताओं ने कहा कि चुनावी जवाबदेही की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन किसी एक संगठन तक सीमित नहीं है। इसमें छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अलग-अलग राजनीतिक दलों के लोग भी शामिल हैं। पार्टी ने अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, माणिक सरकार और पिनाराई विजयन सहित विपक्षी नेताओं का जिक्र करते हुए आंदोलन का समर्थन करने वालों का आभार जताया। CJP नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के सवाल पर अलग-अलग संगठनों का साथ आना जरूरी है। CJP ने दावा किया कि आंदोलन में शामिल कई संगठनों के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। पार्टी ने मांग की कि हिरासत में लिए गए लोगों के अधिकारों का सम्मान किया जाए और पुलिस कार्रवाई की जांच हो।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में CJP नेताओं ने साफ किया कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने देशभर के छात्रों, युवाओं और नागरिकों से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाने की अपील की। आशुतोष रांका ने कहा कि व्यक्तिगत परेशानियों और हिरासत जैसी परिस्थितियों के बावजूद पार्टी अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेगी। वहीं, सौरव दास ने कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों की बात सुननी चाहिए और उनके सवालों का जवाब देना चाहिए।